लखनऊ : राज्यपाल ने कहा, कार्यशैली और आचरण का अवलोकन करें विधायक, संसदीय आचरण को गंभीर बनाने की आवश्यकता
राज्यपाल ने कहा कि जनप्रतितिनिधियों की भूमिका में लगातार वृद्धि और परिवर्तन हो रहे है। संसदीय क्षेत्र में कर्तव्य और दायित्व का विस्तार हो रहा है। ऐसे में ससंदीय विधान और कार्य कौशल में विशिष्टता सदस्यों को दायित्व के निर्वहन में सरलता और सहजता प्रदान करती है।
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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि विधानमंडल के सदस्यों को कार्यशैली, विशेष रूप से सदन और सदन के बाहर आचरण का अवलोकन करना होगा। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही निर्बाध और सुचारू संचालित हो सके इसके लिए राज्यपाल अभिभाषण जैसे संवैधानिक कार्य पर संसदीय आचरण और गंभीरता बनाने की आवश्यकता है। तब ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया सफल होगी और लोकतंत्र मजबूत होगा। सोमवार को राष्ट्रपति की मौजूदगी में विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जनप्रतितिनिधियों की भूमिका में लगातार वृद्धि और परिवर्तन हो रहे है। संसदीय क्षेत्र में कर्तव्य और दायित्व का विस्तार हो रहा है। ऐसे में ससंदीय विधान और कार्य कौशल में विशिष्टता सदस्यों को दायित्व के निर्वहन में सरलता और सहजता प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव देश के स्वावलंबन और भारत की विकासयात्रा के अवलोकन का अवसर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के जरिये पूरे राज्य में महोत्सव मनाया जा रहा है। आजादी का अमृत महोत्सव राष्ट्रीय यात्रा का उत्सव है। आजादी की विरासत को संजोने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और आदर्शों को आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि यह विधायिका आदर्शों और संघर्ष का प्रतिरूप है, यहां किसी भी वर्ग, समुदाय और अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी सदन का सदस्य निर्वाचित हो सकता है।