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लखनऊ : राष्ट्रपति भवन से एंबेसी तक व सरकारी विभागों में नौकरी के नाम पर ठगी, जालसाज पिता-पुत्र एसटीएफ के हत्थे चढ़े
Fri, 28 Jan 2022 07:09 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 28 Jan 2022 07:09 PM IST
सार
एसटीएफ ने गिरोह के मास्टरमाइंड व सरगना सहित दो लोगों को ठाकुरगंज इलाके से गिरफ्तार किया है। दोनों महाठग पिता-पुत्र है। टीम ने दोनों आरोपियों के पास से कई अहम दस्तावेज, मुहर, फर्जी नियुक्ति पत्र, नकदी व कार बरामद की है। एसटीएफ टीम पूछताछ कर रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
एसटीएफ ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो राष्ट्रपति भवन से लेकर ब्रिटिश व अमेरिकन एंबेसी तक और सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम ठगी कर रहा था। इस गिरोह का मास्टरमाइंड और सरगना पिता-पुत्र शुक्रवार को राजधानी के ठाकुरगंज इलाके से एसटीएफ के हत्थे चढ़ गए। टीम ने दोनों के पास से कई अहम दस्तावेज, मुहर, जाली नियुक्ति पत्र, नकदी व कार बरामद की है।
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पुलिस अधीक्षक एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, आरोपियों की पहचान मूलरूप से काकोरी के दुर्गागंज निवासी राजेश गुप्ता व उसके बेटे अभिषेक के रूप में हुई। वर्तमान में दोनों दुबग्गा के कन्हैया माधवपुरी कॉलोनी में रह रहे थे। मथुरा के त्रिभुवन सिंह ने रिफाइनरी थाने में पिछले साल मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि बेटे व बेटी को सीआरपीएफ में मुख्य आरक्षी के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाज पिता-पुत्र ने 25 लाख रुपये ठग लिए। इसके बाद दोनों ने माप-तौल, लिखित परीक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए जाली दस्तावेज देकर डीआईजी सीआरपीएफ अजमेर राजस्थान भेजा, जहां ठगी का पता चलने पर मुकदमा दर्ज कराया था।
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जीपीओ कैंटीन का सेल्समैन था राजेश
एसटीएफ एसपी के मुताबिक, आरोपी राजेश मास्टरमाइंड है और 1989 में जीपीओ लखनऊ के कैंटीन में सेल्समैन नियुक्त हुआ था। 2002 में उसे बर्खास्त कर दिया गया। 17 महीने बाद फिर से बहाल हुआ। 2005 में फिर निलंबित कर दिया गया, लेकिन उसका प्राइमरी स्केल पर वेतन कर दिया गया था। इसके बाद उसने ठगी का खेल शुरू कर दिया। इस दौरान उसने अधिकारियों से मिन्नतें करके कई लोगों को नौकरी दिलवाई, पर सभी को कुछ समय बाद निकाल दिया गया।
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खुद को बताता था मुख्य डाकघर का प्रबंधक
एसटीएफ एसपी के मुताबिक, आरोपी राजेश खुद को मुख्य डाकघर का प्रबंधक बताकर पीड़ितों को झांसे में लेता था। कुछ समय बाद उसने इस धंधे में बेटे अभिषेक को भी शामिल कर लिया था। पिता-पुत्र घर से ऑफर लेटर, नियुक्ति पत्र व कई सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के दस्तावेज तैयार करते थे। दोनों ने कई सरकारी विभागों के असली जैसे मुहर भी बनवा रखे थे। संबंधित विभाग के अधिकारियों के हुबहू दस्तखत भी बनाते थे।
इनसे की ठगी
एसटीएफ के मुताबिक, दोनों ने सैकड़ों लोगों से ठगी की है। जिसकी जानकारी जुटाई जा रही है। कानपुर के शुभम चौहान से 3.50 लाख, सिद्धार्थनगर के सिब्बू पांडेय से चार लाख, इटावा के सुशील यादव से 2.70 लाख, रमाशंकर शुक्ला से 50 हजार, मथुरा के त्रिभुवन सिंह से 25 लाख रुपये 2016 से 2019 के बीच में वसूला। इन सभी ने शिकायत की है।
इन विभागों में नौकरी का देते थे झांसा
एसपी एसटीएफ के मुताबिक, जालसाज पिता-पुत्र राष्ट्रपति भवन में नौकरी, ब्रिटिश व अमेरिकन एंबेसी में नौकरी लगवाने का झांसा देते थे। इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम एफसीआई, रेलवे, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, मेट्रो, विद्युत विभाग, शिक्षा विभाग, 108 एंबुलेंस, सीएचसी, सीआरपीएफ में नौकरी के नाम पर ठगी की है।
ये सामान हुआ बरामद
12 मोबाइल, एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, एक इंटरनेट डाेंगल, एक पैनकार्ड, दो आधार कार्ड, 6 चेकबुक, 3 पासबुक, 12 चेक, 23 सादा आईडी कार्ड, 9 नाम-पता लिखा आईडी कार्ड, 8 स्टांप पेपर, 91 बायोडाटा शैक्षिक दस्तावेज के साथ, 5 जाली नियुक्ति पत्र, एक ड्यूटी पास, एक पहचान पत्र जीपीओ, दो मुहर, 397 दस्तावेजों की प्रतियां, 1 मुहर पैड, 123 फोटो, 4 जाली ऑफर लेटर, 2 चार पहिया वाहन, 18600 नकदी।