गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न होने से नाराज किसानों ने किया प्रदर्शन, पराली जलाकर जताया विरोध
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गन्ना मूल्य बढ़ोतरी न होने के विरोध में बुधवार सुबह सवा पांच बजे भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने बापू भवन के निकट धान की पराली और गन्ने की होली जलाकर प्रदर्शन किया। वहीं, दूसरी ओर किसानों ने देवा रोड पर जाम लगाकर सरकार विरोधी नारे लगाए।
भाकियू कार्यकर्ताओं ने सुबह 5.15 बजे ओसीआर बिल्डिंग से विधानभवन की ओर कूच कर किया तो पुलिस ने बापू भवन के पास बैरीकेडिंग से पहले ही उन्हें रोक लिया। इस पर किसानों ने बापू भवन चौराहे के बीच गन्ना व धान की पराली जलाकर किसानों की बदहाली की तरफ सरकार का ध्यान खींचा। पुलिस ने भाकियू जिलाध्यक्ष गुरमीत सिंह व अन्नू यादव समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को दिया। इसमें गन्ना मूल्य बढ़ाने के साथ ही ब्याज समेत बकाया भुगतान दिलाने और गन्ना पर्चियों की व्यवस्था ठीक करने की मांग की। जिलाध्यक्ष गुरमीत सिंह ने कहा कि मांगे नहीं माने जाने पर किसान 21 दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर हल क्रांति आंदोलन शुरू करेंगे।
उधर, भाकियू के मंडल अध्यक्ष बीती रात विधानभवन पर प्रदर्शन के लिए गन्ना व धान लेकर आ रहे थे। पुलिस व प्रशासन ने रात में एक बजे उन्हें देवा रोड पर नौबस्ता में किसान भवन पर ही रोक दिया। बुधवार सवेरे उनकी अगुवाई में किसानों ने देवा रोड पर जाम लगाकर धान व गन्ने की होली जलाई। भाकियू नेता हरिनाम वर्मा ने कहा कि सरकार किसानों को आत्महत्या के रास्ते पर ले जा रही है। किसानों की मेहनत से रिकवरी बढ़ने के बावजूद पूरा लाभ पूंजीपतियों को दिया जा रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगें
गन्ना मूल्य 450 रुपये क्विंटल घोषित हो, लागत मूल्य में 50 फीसदी जोड़कर समर्थन मूल्य तय हो, एमएसपी से कम दाम पर धान की खरीद को अपराध घोषित किया जाए। मेंथा को फसल का दर्जा देकर मंडी शुल्क माफ करें, आलू, गन्ना व धान के किसानों के बोनस दें, आवारा पशुओं पर रोक लगाई जाए, मूल्य स्थिरीकरण कोष की स्थापना हो ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रेट पर फसल बिकने पर भरपाई हो सके। बढ़ी हुई बिजली दरें वापस लें, किसान आय आयोग का गठन हो और आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे सरकार वापस लें।