फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   lucknow CJM will investigate in Mahant's death case of Raebareli

महंत की मौत मामले में पुलिस ने केस दर्ज होने से 6 घंटे पहले ही महिला को पकड़ा, बेटे को दी धममकी

Mon, 04 Feb 2019 01:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 04 Feb 2019 01:32 PM IST
विज्ञापन
lucknow CJM will investigate in Mahant's death case of Raebareli
महंत प्रेमदास (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
रायबरेली में महंत प्रेमदास की मौत के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि इस मामले में जिस महिला को गिरफ्तार किया गया है, उसे पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने से छह घंटे पहले ही हिरासत में ले लिया था।
विज्ञापन


खंडपीठ ने लखनऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को इसकी जांच के आदेश दिए हैं। महिला के बेटे द्वारा दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस राजीव सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया सामने आया है कि सीसीटीवी तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि दो जनवरी को सुबह आठ बजे पुलिस सत्यभामा के घर पर थी।
विज्ञापन


सवा आठ बजे पुलिस एक महिला को ले जाते हुए नजर आ रही है। हालांकि घटना की एफआईआर दोपहर ढाई बजे दर्ज की गई। इस मामले में महिला के पति के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच प्रभावित किए जाने के आरोपों के बाद मामलो की जांच लखनऊ एसपी ग्रामीण को पहले ही सौंपी जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को आदेशों की अनुपालना सुनिश्वित करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी।

ये कैसी पुलिस... धमकी दी, कोर्ट में गलत तथ्य तक दिए

बेटे ने गिरफ्तारी का कारण पूछा तो धमकी
महिला सत्यभामा मौर्या की ओर से दायर याचिका में उसके बेटे ने कोर्ट को बताया कि वह दिल्ली में रहकर पढ़ाई करता है। दो जनवरी को घरवालों और मित्रों ने बताया कि उसकी मां को रायबरेली पुलिस हिरासत में नगर कोतवाली ले गई है।

जब वह रायबरेली पहुंचा और पुलिस ने मां को हिरासत में लेने की वजह पूछी तो एसएचओ ने उसे धमकाया। कहा- वह इस मामले को भूल जाए। अगर कानूनी सहायता लेगा तो उसे फर्जी केस में फंसाकर उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

एसपी बोले- गिरफ्तारी छह जनवरी को
एसपी रायबरेली ने शपथपत्र में बताया कि महंत स्वामी प्रेमदास का शव दो जनवरी की सुबह ऊंचाहार स्थित इतौरा बुजुर्ग के गांव बाबा का पुरवा के रामजानकी मंदिर के मुख्य द्वारा पर फंदे से लटका मिला था। मामले में सत्यभामा के पति बैजनाथ मौर्या, बाबा रामस्वरूप दास, संजीव कुमार मौर्या और अमृतलाल को गिरफ्तार किया गया।

सत्यभामा को छह जनवरी को गिरफ्तार किया। अभी वह रायबरेली जिला जेल में है। याची का दावा गलत है कि आरोपियों को कोतवाली ले जाया गया। गैरकानूनी गिरफ्तारी के आरोपों की जांच अभी एएसपी कर रहे हैं।

सीसीटीवी में 2 जनवरी को ही ले जाती दिखी पुलिस

सत्यभामा के बेटे ने याचिका में बताया कि दो जनवरी को पुलिस जबरदस्ती उनके घर में घुसी और मां को ले गई। उन्हें आरोपी की पत्नी होने की वजह से गिरफ्तार किया गया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद है। इसकी फोटो उसने याचिका में दी।

उसने एसपी रायबरेली को भी घटना के बारे में तीन जनवरी को बताया, लेकिन उन्हाेंने कुछ नहीं किया। जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस राजीव सिंह ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे की तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि पुलिस 2 जनवरी को सुबह करीब आठ बजे महिला को अपने साथ ले गई।

अब प्रमुख सचिव और डीजीपी करें अनुपालन
हाईकोर्ट ने कहा कि महिला के पति बैजनाथ ने अपने पर दर्ज केस रद करने के लिए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि ऊंचाहार के सीओ विनीत सिंह ने याची के वकील को मामले की सुनवाई प्रभावी ढंग से न करने को कहा है। इस आरोप की जांच  लखनऊ एसपी ग्रामीण को दी गई थी। पुलिस किसी दागी की तरह जांच कर रही है और इसे बिगाड़ रही है। प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी इन आदेशों की अनुपालना करें।

 

याची ने कहा- फर्जी एंट्री लिखी, याचिका के बाद दिखाई गिरफ्तारी

याची ने कहा कि कहीं कोई सुनवाई न होने पर उसने 5 जनवरी को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसका नोटिस सरकारी वकील को गया। इसके बाद पुलिस ने जनरल डायरी में फर्जी एंट्री लिखी और छह जनवरी को सत्यभामा की औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई। एसपी ने शपथपत्र में गलत तथ्य दिए हैं। उम्मीद नहीं है कि उनके नेतृत्व में मामले की निष्पक्ष जांच हो सकती है

पुलिस ने दिया गलत शपथ पत्र, सीजेएम जांच करें
हाईकोर्ट ने सीजेएम लखनऊ को निर्देश दिए कि वे मामले की जांच करें। सत्यभामा को हिरासत में लेने के समय और तारीख को लेकर यह भी देखें कि कौन पुलिस अधिकारी व कर्मी महिला को ले गए थे।  संबंधित सभी दस्तावेज दिए जाएं। सीजेएम जांच में डीएम या किसी अन्य एजेंसी का सहयोग ले सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि रायबरेली पुलिस ने शपथपत्र के जरिए कोर्ट में गलत तथ्य पेश किए। यह कोर्ट को झूठे साक्ष्य देना और कोर्ट की अवमानना है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed