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लखनऊ : किसान आयोग के गठन के लिए भाकियू ने डाला डेरा, मांगें पूरी होने तक गन्ना संस्थान में बैठे रहने का एलान

Sun, 19 Dec 2021 10:21 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 19 Dec 2021 10:21 PM IST
सार

यूनियन ने एलान किया है कि जब तक किसान आयोग का गठन, किसान संगठनों के नेताओं की चल-अचल संपत्ति की जांच कराने सहित 10 सूत्री मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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Lucknow: Bhakiyu camped for the formation of Farmers Commission, announced to sit in sugarcane institute till the demands are met
यूपी विधानभवन। - फोटो : amar ujala

विस्तार

भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने रविवार से गन्ना संस्थान में डेरा डाल दिया है। यूनियन ने एलान किया है कि जब तक किसान आयोग का गठन, किसान संगठनों के नेताओं की चल-अचल संपत्ति की जांच कराने सहित 10 सूत्री मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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ट्रैक्टर ट्रॉलियों से अपराह्न करीब 11 बजे गन्ना संस्थान पहुंचे संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह की अध्यक्षता में महापंचायत हुई। वक्ताओं ने कहा कि पूर्व में सरकार के समक्ष रखी गई मांगों पर कोई निर्णय नहीं हुआ है, इसलिए दोबारा डेरा डाला गया है। पदाधिकारियों ने सरकार पर किसानों के मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। कहा, मुख्यमंत्री से लेकर उप मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन दिया गया है, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। महापंचायत को योगेश प्रताप सिंह, रिषि मिश्रा, आशु चौधरी, उपेंद्र, तारा सिंह बिष्ट व केपी सिंह ने भी संबोधित किया।
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संगठन की प्रमुख मांगें
किसान आयोग का गठन हो, किसानों को कर्जामुक्त किया जाए, रिकवरी के नाम उत्पीड़न बंद हो, जैविक खेती व कृषि आय बढ़ाने के लिए सुविधाएं मिलें, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को 10 हजार प्रतिमाह जीवन यापन भत्ता दिया जाए। भाकियू भानू गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित अन्य किसान संगठन के नेताओं की 30 वर्ष की चल-अचल संपत्ति की जांच कराई जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। फिरोजाबाद या एटा में आलू प्रसंस्करण इकाई लगे। किसानों को ट्यूबवेल के लिए बिजली फ्री की जाए। गांव में बिजली-पानी व्यवस्था सुधारें। किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस हों। आवारा पशुओं से किसानोें की फसल बचाने का इंतजाम हो और तारबंदी पर कोई कानूनी कार्रवाई न हो।

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