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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीएमएस में जनसूचना अधिकारी नियुक्त करने के आदेश पर लगाई रोक
Wed, 08 Sep 2021 09:13 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 08 Sep 2021 09:13 PM IST
सार
सीएमएस के अधिवक्ता का कहना था कि वह लोक प्राधिकारी की श्रेणी में नहीं आता। याचिका पर सुनवाई के दौरान आयोग के आदेश को क्षेत्राधिकार के बाहर पाते हुए कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए सभी विपक्षीगणों को छह हफ्ते में जवाबी हलफ नामा और याची को प्रतिउत्तर दाखिल करने को कहा है।
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लखनऊ हाईकोर्ट
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सिटी मांटेसरी स्कूल में जनसूचना अधिकारी नियुक्त करने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग द्वारा इस बारे में मुख्य सचिव को जारी आदेश को कानूनन गलत बताया है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि नियमों के तहत यदि सीएमएस किसी सरकारी अधिकारी या पब्लिक अथारिटी को कोई सूचना देने के लिए बाध्य है तो उसे सूचना देनी पड़ेगी। कोर्ट ने सिर्फ सीएमएस के संबंध में जनसूचना अधिकारी नियुक्त करने संबंधी आदेश पर रोक लगाई है।
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न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश सीएमएस की तरफ से इसके फाउंडर-मैनेजर जगदीश गांधी की याचिका पर दिया। याची ने राज्य सूचना आयोग द्वारा मुख्य सचिव को शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत आने वाले सभी संस्थानों में एक-एक जनसूचना अधिकारी नियुक्त करने के आदेश को उसके क्षेत्राधिकार से परे बताया था। आयोग ने यह आदेश संजय शर्मा की ओर से उसके समक्ष प्रस्तुत शिकायत पर दिया था।
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सीएमएस के अधिवक्ता का कहना था कि वह लोक प्राधिकारी की श्रेणी में नहीं आता। याचिका पर सुनवाई के दौरान आयोग के आदेश को क्षेत्राधिकार के बाहर पाते हुए कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए सभी विपक्षीगणों को छह हफ्ते में जवाबी हलफ नामा और याची को प्रतिउत्तर दाखिल करने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया कि संजय शर्मा की शिकायत पर आयोग नियमानुसार सुनवाई आगे बढ़ा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 6 हफ्ते बाद होगी।
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