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लखनऊ:अंसल के संचालकों ने बनाईं थीं 148 कंपनियां, विदेशी खातों में ट्रांसफर की निवेशकों की रकम; बैंक खाते सीज

Sat, 12 Apr 2025 06:30 AM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ
अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 12 Apr 2025 06:30 AM IST
सार

Ansal controversy: आयकर विभाग के छापे की कार्रवाई में सामने आया है कि अंसल के संचालकों ने 148 कंपनियां खोली थीं, जिनके जरिये निवेशकों से जुटाई गई रकम को विदेश भेजा गया।

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Lucknow: Ansal's directors had formed 148 companies, transferred investors' money to foreign accounts
अंसल के बैंक खाते सीज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अंसल एपीआई रीयल एस्टेट कंपनी के दिल्ली और लखनऊ के दो दर्जन से अधिक ठिकानों पर बीते चार दिनों से जारी आयकर विभाग के छापे की कार्रवाई में सामने आया है कि अंसल के संचालकों ने 148 कंपनियां खोली थीं, जिनके जरिये निवेशकों से जुटाई गई रकम को विदेश भेजा गया। अधिकारियों का अनुमान है कि यह रकम एक हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। फिलहाल विभाग की दिल्ली स्थित जांच इकाई 8(1) के अधिकारी इन कंपनियों की मनी ट्रेल पता लगा रहे हैं।

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सूत्रों के मुताबिक अंसल के संचालकों ने जो 148 कंपनियां बीते एक दशक के दौरान बनाईं, उनमें से कई शेल कंपनियां थी। इनके जरिए ही निवेशकों की रकम को एक-दूसरे में डायवर्ट किया जाता रहा ताकि रकम के सही स्रोत को जांच एजेंसियों से छुपाया जा सके। अंत में रकम को इन कंपनियों के विदेशी खातों में भेज दिया गया। बाद में इन्हें दूसरी कंपनियों के रूट से वापस मंगाकर संपत्तियों को खरीदा गया। इसी वजह से आयकर विभाग के अधिकारी बीते चार दिन से अंसल के संचालकों और निदेशकों से लगातार पूछताछ कर रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो अंसल के ठिकानों में उम्मीद के मुताबिक नगदी बरामद नहीं हुई है। सभी ठिकानों से 10 लाख रुपये नकद मिले हैं, फिलहाल उन्हें जब्त नहीं किया गया है। संचालकों और निदेशकों के ठिकानों से करीब दो करोड़ रुपये कीमत के जेवरात मिलने के बाद उनका मूल्यांकन कराकर वापस दे दिया गया। आयकर विभाग की छापे की कार्रवाई शनिवार को भी जारी रह सकती है।
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रिसीवर तैनात होने के बाद से खाली हाथ
दरअसल, अंसल एपीआई के दिवालिया घोषित होने के बाद राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने रिसीवर नियुक्त कर दिया है, जो कंपनी की संपत्ति और देनदारियों के प्रबंधन का कार्य देख रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इसी वजह से अंसल के ठिकानों से खास नकदी बरामद नहीं की जा सकी। दिवालिया घोषित होने की वजह से कंपनी के अधिकांश बैंक खाते भी सीज हैं। वहीं निवेशकों से भी पैसा नहीं जमा कराया जा रहा है। केवल टाउनशिप के रखरखाव के लिए निवासियों द्वारा जमा कराई गई रकम ही खातों में मिली है।

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