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लविवि : शोध को मिलेगी रफ्तार, 32 परियोजनाओं को मंजूरी
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लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शोध को नई धार देने के उद्देश्य से उप्र शासन के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विभिन्न विभागों के कुल 32 शोध परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं के लिए लाखों रुपये की अनुदान राशि मंजूर की गई है। इनमें पर्यावरण, स्वास्थ्य, खाद्य गुणवत्ता, शिक्षा और बाल पोषण जैसे अहम विषय शामिल हैं। बता दें कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से लविवि को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस योजना में 19 और रिसर्च एवं डेवलपमेंट में 13 शोध प्रस्तावों को ग्रांट मिला है। ये शोध कार्य केमिस्ट्री, जूलॉजी, बॉटनी, सांख्यिकी, कॉमर्स और फिजिक्स जैसे विषयों में होंगे।
परियोजना के तहत लविवि के बायोकेमिस्ट्री विभाग की डॉ. मधु कांबले को भंडारित अनाज में कीट प्रबंधन पर काम करने के लिए लगभग 9.79 लाख रुपये दिए गए हैं। जूलॉजी विभाग के डॉ. परमजीत सिंह और डॉ. तृप्ति यादव को कैंसररोधी तत्वों की खोज और पर्यावरण अनुकूल कीट नियंत्रण रणनीति पर शोध के लिए चार-चार लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। वहीं केमिस्ट्री विभाग के डॉ. सुशील कुमार मौर्य को तीन लाख और डॉ. विजय कुमार राय को सात लाख रुपये का सबसे अधिक अनुदान मिला है।
लविवि के प्रस्तावों को सर्वोच्च श्रेणी में रखा
उत्तर प्रदेश शासन की ''सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'' योजना के तहत लविवि को सबसे अधिक शोध परियोजनाओं और बजट की मंजूरी मिली है। विशेषज्ञ समिति के गहन मूल्यांकन के बाद लविवि के प्रस्तावों को सर्वोच्च श्रेणी में रखा गया। प्रदेश के सात विश्वविद्यालयों के लिए कुल 2.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें लविवि को 19 महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिलीं।
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फसलों पर भारी धातुओं के प्रभाव पर होगा शोध
बॉटनी विभाग में डॉ. अजय सिंह को फसलों में भारी धातुओं के प्रभाव को कम करने के लिए सेलेनियम नैनोपार्टिकल्स के उपयोग पर शोध के लिए 10.40 लाख रुपये दिए गए हैं। इसी तरह, मिलेट्स फसलों की भूमिका पर भी शोध होगा।
राजधानी में वायु-जल प्रदूषण पर होगा महत्वपूर्ण शोध
डॉ. आदित्य आभा सिंह को लखनऊ में वायु प्रदूषण और पौधों की सहनशीलता पर शोध के लिए उतनी ही राशि दी गई है। केमिस्ट्री विभाग में जल गुणवत्ता और गंगा जल में रासायनिक व नुकसान पहुंचाने वाले प्रभाव पर भी शोध होगा। वहीं जूलॉजी में स्वास्थ्य संबंधी विषयों जैसे फाइब्रोसिस और प्रोटीन बदलावों पर शोध किया जाएगा। कुलपति प्रो. जेपी. सैनी ने कहा कि ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के माध्यम से विश्वविद्यालय न केवल शोध की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि राष्ट्रीय रैंकिंग में भी उल्लेखनीय सुधार करेगा।
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भाषा विवि में रामायण का होगा फारसी में अनुवाद, दस परियोजनाओं को ग्रांट
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत 10 परियोजनाओं के तहत 15.80 लाख की अनुदान राशि की स्वीकृति मिली है। खास बात है कि फारसी विभाग के डॉ. आरिफ अब्बास को रामायण के फारसी अनुवाद व विस्तृत अध्ययन के लिए सहायता राशि दी गई है, जिससे भारतीय व फारसी साहित्यिक परंपरा संबंधों को नई दृष्टि मिलेगी।
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परियोजना के तहत लविवि के बायोकेमिस्ट्री विभाग की डॉ. मधु कांबले को भंडारित अनाज में कीट प्रबंधन पर काम करने के लिए लगभग 9.79 लाख रुपये दिए गए हैं। जूलॉजी विभाग के डॉ. परमजीत सिंह और डॉ. तृप्ति यादव को कैंसररोधी तत्वों की खोज और पर्यावरण अनुकूल कीट नियंत्रण रणनीति पर शोध के लिए चार-चार लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। वहीं केमिस्ट्री विभाग के डॉ. सुशील कुमार मौर्य को तीन लाख और डॉ. विजय कुमार राय को सात लाख रुपये का सबसे अधिक अनुदान मिला है।
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लविवि के प्रस्तावों को सर्वोच्च श्रेणी में रखा
उत्तर प्रदेश शासन की ''सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'' योजना के तहत लविवि को सबसे अधिक शोध परियोजनाओं और बजट की मंजूरी मिली है। विशेषज्ञ समिति के गहन मूल्यांकन के बाद लविवि के प्रस्तावों को सर्वोच्च श्रेणी में रखा गया। प्रदेश के सात विश्वविद्यालयों के लिए कुल 2.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें लविवि को 19 महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिलीं।
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फसलों पर भारी धातुओं के प्रभाव पर होगा शोध
बॉटनी विभाग में डॉ. अजय सिंह को फसलों में भारी धातुओं के प्रभाव को कम करने के लिए सेलेनियम नैनोपार्टिकल्स के उपयोग पर शोध के लिए 10.40 लाख रुपये दिए गए हैं। इसी तरह, मिलेट्स फसलों की भूमिका पर भी शोध होगा।
राजधानी में वायु-जल प्रदूषण पर होगा महत्वपूर्ण शोध
डॉ. आदित्य आभा सिंह को लखनऊ में वायु प्रदूषण और पौधों की सहनशीलता पर शोध के लिए उतनी ही राशि दी गई है। केमिस्ट्री विभाग में जल गुणवत्ता और गंगा जल में रासायनिक व नुकसान पहुंचाने वाले प्रभाव पर भी शोध होगा। वहीं जूलॉजी में स्वास्थ्य संबंधी विषयों जैसे फाइब्रोसिस और प्रोटीन बदलावों पर शोध किया जाएगा। कुलपति प्रो. जेपी. सैनी ने कहा कि ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के माध्यम से विश्वविद्यालय न केवल शोध की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि राष्ट्रीय रैंकिंग में भी उल्लेखनीय सुधार करेगा।
भाषा विवि में रामायण का होगा फारसी में अनुवाद, दस परियोजनाओं को ग्रांट
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत 10 परियोजनाओं के तहत 15.80 लाख की अनुदान राशि की स्वीकृति मिली है। खास बात है कि फारसी विभाग के डॉ. आरिफ अब्बास को रामायण के फारसी अनुवाद व विस्तृत अध्ययन के लिए सहायता राशि दी गई है, जिससे भारतीय व फारसी साहित्यिक परंपरा संबंधों को नई दृष्टि मिलेगी।