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लविवि : नई शुल्क व्यवस्था के विरोध में महाविद्यालय

Mon, 28 Sep 2026 02:57 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:57 AM IST
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LU: Colleges protest against the new fee system
लखनऊ विश्वविद्यालय।
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में लागू नई शुल्क व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया है। राजधानी समेत कई जिलों के संबद्ध महाविद्यालयों की ओर से शिकायतें दर्ज कराए जाने के बाद अब लखनऊ विवि सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने भी इस मुद्दे को उठाया है। संगठन ने कुलपति को पत्र भेजकर वित्त समिति की ओर से बढ़ाए गए शुल्क को अनुचित बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि जल्द पुनर्विचार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
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लुआक्टा ने 17 जुलाई 2026 की संशोधित अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि विद्यार्थियों से पहले ही एलयूआरएन के लिए 100 रुपये और नामांकन शुल्क के रूप में 500 रुपये लिए जाते हैं। ऐसे में प्रति सेमेस्टर 250 रुपये पंजीकरण शुल्क लेना समझ से परे है। संगठन ने सवाल उठाया कि जब विद्यार्थी का विश्वविद्यालय में पंजीकरण एक बार होता है तो प्रत्येक सेमेस्टर पंजीकरण शुल्क लेने का औचित्य क्या है।
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लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय और महामंत्री डॉ. अंशु केडिया ने रेंजर-रोवर्स के लिए 50 रुपये वार्षिक शुल्क पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जिन महाविद्यालयों में यह व्यवस्था नहीं है और वे इसे शुरू नहीं करना चाहते, वहां सभी विद्यार्थियों से यह शुल्क लेना उचित नहीं है।
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संगठन ने प्रति सेमेस्टर 100 रुपये एलुमनाई शुल्क, प्रैक्टिकल/मौखिकी के 100 रुपये, इंटर्नशिप के 300 रुपये और मार्कशीट के 100 रुपये शुल्क पर भी सवाल उठाए हैं। लुआक्टा का कहना है कि प्रैक्टिकल परीक्षा और उपकरणों की व्यवस्था महाविद्यालय स्वयं करते हैं। प्रवेश के समय शुल्क लिए जाने के बाद दोबारा शुल्क लेना उचित नहीं है।
खेलकूद के लिए प्रति छात्र प्रति सेमेस्टर 50 रुपये और अन्य प्रोसेसिंग शुल्क पर भी संगठन ने आपत्ति जताई है। पत्र में कहा गया है कि महाविद्यालय पहले से ही बिजली, पानी, इंटरनेट, पुस्तकालय, स्टेशनरी और खेलकूद समेत कई नियमित खर्च वहन कर रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क से महाविद्यालयों और विद्यार्थियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

परीक्षा फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि घोषित होने का हवाला देते हुए लुआक्टा ने शुल्क संबंधी आदेशों पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। संगठन ने कहा है कि अनुचित शुल्क वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन किया जाएगा।
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