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कम खर्च और कम दर्द में अब ऐसे निकलेगी गुर्दे की पथरी
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:46 PM IST
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मिनी व अल्ट्रॉमिनी पर्क तकनीक से एक ही छेद से गुर्दे की पथरी को निकालना संभव हो गया है। इससे मरीज को दर्द कम होता है, सर्जरी के दौरान खून कम बहता है और इलाज के बाद अस्पताल से भी छुट्टी जल्दी मिल जाती है।
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वो भी बहुत खर्च में। रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में इस तकनीक से तीन मरीजों की सर्जरी चिकित्सकों को लाइव दिखाई गई।
डॉ. लोहिया इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. दीपक मालवीय और यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. ईश्वर राम धयाल ने बताया कि 5 मिलीमीटर से छोटी पथरी को दवाएं देकर कम करने का प्रयास किया जाता है।
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जबकि मिनी पर्क विधि से 5 मिलीमीटर से लेकर 25 मिलीमीटर की तक की पथरी को निकाला जा सकता है। इससे बड़ी पथरी के लिए दूरबीन विधि का प्रयोग करना पड़ता है।
एक टांके से बंद हो जाता है छेद
मिनीपर्क में पीठ पर लगभग 12 मिलीमीटर का एक छोटा सा छेद किया जाता है। एक ही उपकरण से अंदर पथरी तक जाकर उसे तोड़कर बाहर खींच लिया जाता है। इसके बाद मात्र एक छोटे से टांके से छेद को बंद कर दिया जाता है।
रविवार को इसी तकनीक से पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग के प्रो. अनीस श्रीवास्तव और आगरा से आए डॉ. मधुसूदन अग्रवाल ने तीन मरीजों की सर्जरी कर उनके गुर्दे से पथरी निकाली।
इसका लाइव प्रसारण चिकित्सकों के लिए सेमिनार हॉल में किया गया। पहले एक मरीज की पुरानी तकनीक से सर्जरी की गई। इसके बाद मिनी पर्क से सर्जरी कर दोनों में अंतर बताया गया। डॉ. ईश्वर राम धयाल ने बताया कि मिनी पर्क विधि से अब तक लोहिया संस्थान 60 से अधिक सर्जरी कर चुका है।
रविवार को इसी तकनीक से पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग के प्रो. अनीस श्रीवास्तव और आगरा से आए डॉ. मधुसूदन अग्रवाल ने तीन मरीजों की सर्जरी कर उनके गुर्दे से पथरी निकाली।
इसका लाइव प्रसारण चिकित्सकों के लिए सेमिनार हॉल में किया गया। पहले एक मरीज की पुरानी तकनीक से सर्जरी की गई। इसके बाद मिनी पर्क से सर्जरी कर दोनों में अंतर बताया गया। डॉ. ईश्वर राम धयाल ने बताया कि मिनी पर्क विधि से अब तक लोहिया संस्थान 60 से अधिक सर्जरी कर चुका है।