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Lucknow News: नुकसान सिर्फ 15 फीसदी, नहीं मिलेगा मुआवजा
Tue, 05 Mar 2024 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 05 Mar 2024 12:31 AM IST
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रायबरेली। बेमौसम आंधी और बारिश से भले ही किसानों की अच्छे उत्पादन की उम्मीद टूट गई है, लेकिन जिले के किसी भी किसान को नुकसान का मुआवजा नहीं मिलेगा। शासन की मंशा पर कराए गए सर्वे में कहीं 10 फीसदी तो कहीं अधिकतम 15 प्रतिशत ही फसलें बर्बाद हुई हैं।
नियमानुसार जिले में 33 प्रतिशत से अधिक फसलों का नुकसान होने के बाद ही मुआवजा देने का प्रावधान है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद किसानों की उम्मीदों को झटका लग गया है। जिला प्रशासन ने सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जिले में दो दिनों तक हुई बारिश और हवा चलने से किसानों के चेहरे मायूस हो गए।
बारिश व हवा चलने से गेहूं, सरसों की फसल जमीन पर गिर गई। कुछ क्षेत्रों में कटी पड़ी सरसों की फसल भीग गई। सदर, बछरावां, सलोन, लालगंज, महराजगंज, डलमऊ तहसील क्षेत्र में गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। गेहूूं की फसल जमीन पर गिर गई या खेतों में बारिश से पानी भर गया। इससे फसल के सड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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शासन ने फसल नुकसान की रिपोर्ट जिला प्रशासन से तलब की। शासन की मंशा पर सोमवार की सुबह तहसीलों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने फसलों के सर्वे का काम शुरू किया। शाम तक सर्वे का काम पूरा हो गया। सर्वे में 10 से 15 प्रतिशत तक फसलों का नुकसान मिला है।
उम्मीद टूटी, कैसे निकलेगी लागत
फसल खराब होने से किसान मायूस हैं। कहते हैं कि मौसम उन पर कहर बनकर टूटा है। फसल की लागत कैसे निकलेगी, यही सोचकर परेशान हूं। हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के सलेमपुर गांव के कृषक रमाकांत वाजपेयी कहते हैं कि गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है।
बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के नीमटीकर गांव के किसान राहुल तिवारी कहते हैं कि गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। मुुआवजा मिलना चाहिए। सदर तहसील क्षेत्र के खागीपुर सड़वा के किसान उमेश, दिनेश यादव, सतेंद्र कहते हैं कि गेहूं के साथ ही सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। जिले में इस बार एक लाख 68 हजार 203 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर गेहूं, जबकि नौ हजार 153 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल की बोआई की गई है।
आंधी-पानी से फसलों से हुए नुकसान की सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जिले में 10 से 15 प्रतिशत फसलों को नुकसान हुआ है। 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर ही किसानों को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।
- प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन
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नियमानुसार जिले में 33 प्रतिशत से अधिक फसलों का नुकसान होने के बाद ही मुआवजा देने का प्रावधान है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद किसानों की उम्मीदों को झटका लग गया है। जिला प्रशासन ने सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जिले में दो दिनों तक हुई बारिश और हवा चलने से किसानों के चेहरे मायूस हो गए।
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बारिश व हवा चलने से गेहूं, सरसों की फसल जमीन पर गिर गई। कुछ क्षेत्रों में कटी पड़ी सरसों की फसल भीग गई। सदर, बछरावां, सलोन, लालगंज, महराजगंज, डलमऊ तहसील क्षेत्र में गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। गेहूूं की फसल जमीन पर गिर गई या खेतों में बारिश से पानी भर गया। इससे फसल के सड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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शासन ने फसल नुकसान की रिपोर्ट जिला प्रशासन से तलब की। शासन की मंशा पर सोमवार की सुबह तहसीलों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने फसलों के सर्वे का काम शुरू किया। शाम तक सर्वे का काम पूरा हो गया। सर्वे में 10 से 15 प्रतिशत तक फसलों का नुकसान मिला है।
उम्मीद टूटी, कैसे निकलेगी लागत
फसल खराब होने से किसान मायूस हैं। कहते हैं कि मौसम उन पर कहर बनकर टूटा है। फसल की लागत कैसे निकलेगी, यही सोचकर परेशान हूं। हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के सलेमपुर गांव के कृषक रमाकांत वाजपेयी कहते हैं कि गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है।
बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के नीमटीकर गांव के किसान राहुल तिवारी कहते हैं कि गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। मुुआवजा मिलना चाहिए। सदर तहसील क्षेत्र के खागीपुर सड़वा के किसान उमेश, दिनेश यादव, सतेंद्र कहते हैं कि गेहूं के साथ ही सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। जिले में इस बार एक लाख 68 हजार 203 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर गेहूं, जबकि नौ हजार 153 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल की बोआई की गई है।
आंधी-पानी से फसलों से हुए नुकसान की सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जिले में 10 से 15 प्रतिशत फसलों को नुकसान हुआ है। 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर ही किसानों को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।
- प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन