पर्यटक बनकर इंडो-नेपाल बॉर्डर से आंतकी कर सकते हैं घुसपैठ!
इंडो-नेपाल की श्रावस्ती में खुली 62 किलोमीटर की सीमा व यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार आईएसआईएस की घुसपैठ का सबब बन सकते हैं। वहीं, पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के पंजीयन व निगरानी के नाकाफी इंतजाम भी खतरे की संभावना को बढ़ा रहे हैं।
भारत-नेपाल के बीच नोमेंस लैंड पर लगे चंद पत्थर ही भूभाग को अलग दर्शाने का जरिया हैं। दोनों ओर से आने जाने के लिए खेत खलिहान का रास्ता यहां तक कि कुछ गांव भी हैं जो नोमेंस लैंड पर ही बसे हैं।
ककरदरी, भरथा रोशनगढ़ आदि गांवों की आबादी दोनों तरफ चौबीसों घंटे आती-जाती है। जहां देखने पर यह पता नहीं चलता कि कौन सा हिस्सा नेपाल में है और कौन सा हिस्सा भारत में।
आने-जाने वालों की नहीं है डिटेल
विदेशी पर्यटकों पर नजर रखने की व्यवस्था नहीं
इन गांवों से होकर वाहनों का जिला मुख्यालय की ओर आवागमन भी बना रहता है। साथ ही बघौड़ा, ककरदरी, जमुनहा सरीखे कई साप्ताहिक बाजार भी आतंकियों की घुसपैठ मददगार हो सकते हैं।
उधर एसपी जीएन त्रिपाठी ने बताया कि किसी गुप्त घुसपैठ से इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन नोमेंस लैंड सीमा पर जगह-जगह पर एसएसबी चौकी बना कर तैनात है।
बौद्ध तपोस्थली में हर साल लगभग डेढ़ से दो लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। पर्यटकों के आने की सूचना उनके विदेश मंत्रालय द्वारा जिले के अधिकारियों को भेजी जाती है लेकिन कौन पर्यटक आया, अपने साथ क्या लाया, कितने दिनों तक जिले में रहा, इसका विवरण नहीं है।