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चुनावी मुद्दा: गोंडा में पैनी है मुद्दों की धार, साल-दर-साल इंतजार के बाद भी कुछ नहीं हो पाया, एक रिपोर्ट

Wed, 27 Mar 2024 02:07 PM IST
ishwar ashish समरपाल यादव, अमर उजाला, गोंडा
समरपाल यादव, अमर उजाला, गोंडा Published by: ishwar ashish Updated Wed, 27 Mar 2024 02:07 PM IST
सार

गोंडा जिला कई धरोहरों और स्वाधीनता सेनानियों की यादों को समेटे हुए है। कई मुद्दे हैं जो धरातल पर हैं। हालांकि, लंबे इंतजार के बाद भी यहां के लोग सुविधाओं से वंचित हैं। पढ़ें एक रिपोर्ट: 

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Loksabha Election 2024: Read about a ground report on district Gonda.
- फोटो : amar ujala

विस्तार

चुनाव में मुद्दों को लेकर मैदान में उतरने वाले महारथियों की इस बार भी अग्निपरीक्षा है। गोंडा लोकसभा क्षेत्र में तमाम ऐसे मुद्दे हैं जिन पर साल-दर-साल कुछ नहीं हो पाया। नतीजा, जस का तस है। यहां मुद्दों की धार पैनी है। वादे होते हैं, लेकिन चुनाव बाद उसे निभाने की रफ्तार धीमी हो जाती है। 

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गोंडा कई ऐतिहासिक विरासत संजोए हुए है। महाभारत काल में पृथ्वीनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग को एशिया के सबसे बड़े शिवलिंग का गौरव प्राप्त है। यहां छपिया का श्रीस्वामीनारायण मंदिर का मनमोहनी दृश्य सर्वविदित है। राजा देवीबक्श सिंह वीर योद्धा व देशभक्त भी यहां हुए, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के साथ लड़ते-लड़ते अपने जीवन के साथ ही परिवार को भी न्योछावर कर दिया। उनका बनवाया हुआ सागर तालाब आज भी नगर की शोभा बढ़ा रहा है।
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जिले का कुल क्षेत्रफल 4003 वर्ग किलोमीटर है। 1214 गांव वाले गोंडा में 17 पुलिस स्टेशन और 16 ब्लॉक और चार तहसीलें हैं। गौरा, गोंडा, मनकापुर, मेहनौन व उतरौला विधानसभा क्षेत्र हैं। मंडल मुख्यालय होने के बाद भी लोग सुविधाओं से वंचित हैं। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की बात हो या फिर लेखपाल ट्रेनिंग सेंटर, बड़ी परियोजनाओं का काम अधूरा है। सड़क, परिवहन, विकास सभी को लेकर मतदाता टकटकी लगाए हैं। मुद्दे बड़े हैं, इन्हें अमलीजामा पहनाने वाले की तलाश है।संवाद

ये मुद्दे भी खास हैं
- आठ साल से बन रहा राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अधूरा
- 16 साल से लटका पड़ा है लेखपाल ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण
- गतिशील नहीं हो पाई क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला
- राजकीय महाविद्यालय में सुविधाओं का अभाव
- बभनजोत में आईटीआई व सद्भाव मंडप निर्माण 
- 300 शैया का मंडलीय चिकित्सालय 
- कूड़ा निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटर 

ओवरब्रिज निर्माण
- मनकापुर, नवाबगंज, करनैलगंज, सुभागपुर व मसकनवा में रेलवे क्रॉसिंग पर लंबे जाम की समस्या 24 घंटे बनी रहती है। इसलिए यहां पर फ्लाईओवर का निर्माण सबसे ज्यादा जरूरी है। जनप्रतिनिधियों को इस मुद्दे की तरफ ध्यान देने की जरूरत है।

हाथ आते-आते फिसला विश्वविद्यालय
- देवीपाटन मंडल मुख्यालय पर विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। इसके लिए परसपुर ब्लॉक के डोमाकल्पी गांव में जमीन भी चिह्नित की गई, लेकिन विश्वविद्यालय बलरामपुर जिले की झोली में चला गया। 

मंडलस्तरीय रोडवेज बस अड्डा
- गोंडा में मंडलस्तरीय बसअड्डा बनाने को जमीन नहीं मिल पाई। शासन से निर्देश मिले उस पर कार्रवाई भी शुरू हुई, लेकिन जमीन न मिलने की बात को लेकर यात्रियों को राहत देने की यह योजना लंबित है। शहर के बीच में स्थापित रोडवेज बस स्टेशन में जगह का अभाव है। 

सीवर लाइन और नगरीय सीमा का विस्तार

- गोंडा नगर निकाय में सीवर लाइन की योजना करीब दस साल पहले बनी थी। शासन स्तर पर लिखापढ़ी की गई, लेकिन अब इसका कुछ पता नहीं है। इस कारण लोग जलनिकासी की समस्या से जूझ रहे हैं। 
- नगर की सीमा से सटे 22 गांवों को नगर पालिका परिषद गोंडा में शामिल करने की योजना भी लंबित है। गांवों को नगर में शामिल कराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई।

रिंग रोड का सपना
- शहर में जाम से मुक्त करने के उद्देश्य से रिंगरोड बनाने का खाका तैयार किया गया। बालपुर से कटहाघाट होते हुए पराग डेयरी और इसे आगे बढ़ाते हुए बलरामपुर रोड में मिलाकर गोंडा बहराइच मार्ग से फिर गोंडा लखनऊ मार्ग को जोड़ने की योजना अधर में है। 

उद्योग का हाल : जिले में उद्योग के नाम पर सिर्फ मनकापुर आईटीआई लिमिटेड है। वह भी धनाभाव से जूझ रही है। जिले में चार चीनी मिले हैं। इसके अलावा उद्योग के नाम पर यहां कुछ नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है। उद्योगों की स्थापना से पलायन रुक सकता है तो विकास को भी पंख लग सकते हैं, लेकिन उद्योगों की स्थापना में रुचि नहीं ली गई। व्यापारी ट्रांसपोर्टनगर स्थापित करने की मांग अरसे कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी मांग पूरी नहीं हुई। 

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