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अयोध्या: छुटभइये ही नहीं, बड़े नेता भी नहीं बचा सके जमानत, इज्जत बचाने के लिए पाने होंगे 1.90 लाख वोट
Thu, 18 Apr 2024 12:02 PM IST
ishwar ashish
सतीश पाठक, अमर उजाला, अयोध्या
सतीश पाठक, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 18 Apr 2024 12:02 PM IST
सार
अयोध्या की लोकसभा सीट पर बड़े दलों के नेता भी अपनी जमानत नहीं बचा सके हैं। इस बार भी जमानत बचाने के लिए नेताओं को कम से कम एक लाख 90 हजार वोटों की जरूरत पड़ेगी।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
संसदीय चुनावों में नेताओं के लिए सम्मान रूपी जमानत राशि बचानी भी चुनौतीपूर्ण रही है। जीत का सेहरा बांधने के मकसद से चुनावी रण में कूदे कई नेता अंत तक अपनी जमानत बचाने के लिए भी जूझते दिखे। यह हाल सिर्फ छुटभइयों का ही नहीं, बल्कि कई बड़ी पार्टियों के बड़के नेताओं का भी रहा। उनकी भी यहां जमानत जब्त हो चुकी है।
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सम्मान से जोड़कर देखी जाती है प्रत्याशियों की जमानत राशि
- नामांकन के समय प्रत्याशियों को कुछ रकम भी जमा करनी होती है, जिसे जमानत राशि कहते हैं।
- सामान्य वर्ग के लिए यह राशि 25,000 रुपये व आरक्षित कोटे के प्रत्याशी के लिए 12,500 रुपये निर्धारित है। यह सिर्फ जमानत राशि ही नहीं, बल्कि इसे प्रत्याशियों के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाता है। वैध मतों का छठां हिस्सा मिलने पर ही यह राशि प्रत्याशियों को लौटाई जाती है।
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बड़े दल के नेताओं की भी हो चुकी है जमानत जब्त
- जिले में हुए पिछले कई चुनावों में 80 प्रतिशत से अधिक प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके। सिर्फ निर्दल व छोटे दल के नेता ही इस अग्निपरीक्षा में फेल नहीं हुए, बल्कि कांग्रेस, बसपा जैसे बड़े दल के नेताओं ने भी अपमान रूपी यह घूंट पिया है। इस बार भी चुनावी सरगर्मी बढ़ रही है।
- प्रमुख राजनीतिक दल तो अपना पत्ता खोल चुके हैं। कई निर्दल व छोटे दलों के प्रत्याशी भी निश्चित तौर से ताल ठोंकेंगे। अभी तो फिलहाल सभी स्वयं के जीतने का दावा ही करेंगे, लेकिन कौन जमानत बचा पाता है यह तो परिणाम ही बताएगा।
इस बार जमानत बचाने के लिए 1.90 लाख वोट की दरकार
- जिले में इस बार 19 लाख मतदाता अपना सांसद चुनेंगे। इनमें यदि 60 प्रतिशत मतदान भी होता है तो 11.40 लाख वोट पड़ेंगे।
- इनमें से जमानत राशि बचाने के लिए प्रत्याशी को न्यूनतम 1.90 लाख वोट पाना जरूरी होगा।
छह बार जमानत गंवा चुकी है कांग्रेस
- कांग्रेस यहां से छह बार जमानत राशि गंवा चुकी है। 2019, 2014, 2004, 1999, 1991 में निर्मल खत्री व 1996 में यदुवंश राम त्रिपाठी कुल पड़े मतों का छठां हिस्सा नहीं पा सके।
- वहीं, 2014 में बसपा के जितेंद्र सिंह बब्लू, 1999 में सपा के हीरालाल यादव, कम्युनिस्ट पार्टी के मित्रसेन यादव, 1996 में बसपा के इकबाल खान, 1989 व 1991 में बसपा के आरके चौधरी भी अपनी जमानत राशि नहीं बचा सके।
वर्ष -- प्रत्याशी -- जमानत जब्त
1957 -- 09 -- 07
1962 -- 04 -- 01
1967 -- 04 -- 01
1971 -- 08 -- 06
1977 -- 06 -- 04
1980 -- 10 -- 08
1984 -- 15 -- 14
1989 -- 14 -- 12
1991 -- 30 -- 28
1996 -- 60 -- 58
1998 -- 12 -- 09
1999 -- 21 -- 19
2004 -- 17 -- 14
2009 -- 23 -- 19
2014 -- 11 -- 09
2019 -- 13 -- 11