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कभी पूर्वांचल में चलता था कांग्रेस का सिक्का, अब खोई प्रतिष्ठा पाने की बड़ी चुनौती

Wed, 24 Apr 2019 04:37 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 24 Apr 2019 04:37 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019 Performance of congress in poorvanchal.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला

पूर्वांचल में कांग्रेस के सामने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने की बड़ी चुनौती है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ को छोड़कर यहां एनडीए प्रत्याशियों का एकछत्र राज रहा, जबकि 1990 के दशक की शुरुआत तक पूर्वांचल में एक तरह से कांग्रेस का ही सिक्का चलता था।

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मौजूदा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यहां गंगा यात्रा, रोड शो, नुक्कड़ सभाओं और सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन लेकर नुकसान की भरपाई का प्रयास किया है। इसमें उन्हें कहां तक सफलता मिलती है, यह तो 23 मई को ईवीएम ही बता पाएंगी।
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यूपी में कांग्रेस को 1989 के चुनाव से झटका लगना शुरू हुआ। वर्ष 2014 की मोदी लहर में कांग्रेस दो सीटों पर सिमट कर रह गई। महज गांधी परिवार के दो अहम सदस्य राहुल गांधी और सोनिया गांधी ही चुनाव जीत सके। पिछले लोकसभा चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवार अंतिम पायदान पर थे। वाराणसी से कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय एकमात्र ऐसे थे, जो नरेंद्र मोदी के सामने भी तीसरे स्थान पर रहे।
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गाजीपुर सीट पर कांग्रेस के मो. मसूद छठे स्थान पर खिसक गए। चंदौली में कांग्रेस के तरुण पटेल को मात्र 27 हजार वोट मिले। वे चौथे स्थान पर रहे। भदोही में कांग्रेस के सरताज इमाम पांचवें स्थान पर रहे। घोसी से 2014 में पहली बार कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय के परिवार के बाहर के कुंवर सिंह पर बाजी लगाई, मगर उन्हें कुल पड़े मतों का 1.86 फीसदी मत ही मिले।

इन सीटों पर ये रहा हाल

जौनपुर सीट पर फिल्म स्टार रवि किशन का भी जादू नहीं चला। मछलीशहर सीट पर कांग्रेस के तूफानी सरोज और रॉबर्ट्सगंज सुरक्षित सीट से भगवती प्रसाद चौधरी भी चौथे नंबर से आगे नहीं बढ़ पाए।

आजमगढ़ सदर सीट से कांग्रेस के अरविंद जायसवाल और लालगंज सुरक्षित सीट से बलिहारी बाबू अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। मिर्जापुर में अपना दल की अनुप्रिया पटेल के सामने ललितेश पति त्रिपाठी भी टिक नहीं सके थे। वे तीसरे स्थान पर रहे। अनुप्रिया ने दो लाख से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की थी।

पूर्वांचल में विकास का पर्याय माने जाने वाले और लगातार चार बार सांसद व केंद्रीय मंत्री रहे कल्पनाथ राय की पत्नी सुधा राय का भी सिक्का नहीं चल सका। 17 लाख 68 हजार मतदाताओं वाली बलिया संसदीय सीट के चुनाव में सुधा राय को महज 13 हजार वोट मिले। वे पांचवें स्थान पर रहीं।

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