{"_id":"665935b7b8bc20a8ca085e39","slug":"lok-sabha-election-2024-show-a-special-ten-rupee-note-and-take-away-liquor-disclosure-of-liquor-in-raids-2024-05-31","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: नेताजी के 'दस रुपइया' से एक बोतल शराब, चौंकाने वाला खुलासा; वोटरों को खुश करने के लिए नए रास्ते का पता चला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: नेताजी के 'दस रुपइया' से एक बोतल शराब, चौंकाने वाला खुलासा; वोटरों को खुश करने के लिए नए रास्ते का पता चला
Fri, 31 May 2024 09:45 AM IST
शाहरुख खान
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 31 May 2024 09:45 AM IST
सार
नेताजी के 'दस रुपइया' से एक बोतल शराब मिल रही है। दस रुपये का ‘खास’ नोट दिखाने पर यह शराब मिल रही है। छापों में शराब की जब्ती के बीच खुलासा हुआ है। हवाला की तर्ज पर वोटरों को शराब दी जा रही है।
विज्ञापन
Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल शराब का होता है। जिला निर्वाचन अधिकारियों की सख्ती के कारण पहली बार यूपी में 57 करोड़ से ज्यादा की शराब सीज की गई है। अब राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने नया रास्ता खोज निकाला। दस रुपये के नए नोट की गड्डी से शराब बांटने का खुलासा हुआ।
दस के नोटों की सीरीज ही ‘कोडवर्ड’ है। हर दल और प्रत्याशी की अलग सीरीज है। जिसे शराब देनी होती है, उसे दस का ‘खास’ नोट दिया जाता है। उस नोट को दिखाकर दुकान से शराब मिल जाती है। छापों में शराब की जब्ती के दौरान सप्लाई के इस रास्ते की पहचान हुई।
चुनाव किसी भी दौर के हों, शराब हमेशा चर्चा में रहती है। शराब का वोटरों पर खासा असर पड़ता है। खास तौर पर ग्रामीण, पिछड़े और गरीब वर्ग में। सुरा प्रेमियों की इस कमजोर ‘नब्ज’ को नेता खूब जानते हैं इसीलिए चुनावी सीजन में कार्यकर्ताओं से लेकर वोटरों तक पर शराब पर पैसा पानी की तरह बहाया जाता है।
विज्ञापन
इस बार भी शराब पर पैसा जमकर खर्च किया गया लेकिन जिला निर्वाचन अधिकारियों की चौकसी ने रंग में भंग डाल दिया। शराब की रोजाना धरपकड़ और निगरानी की वजह से इसका तोड़ निकाल लिया। हालांकि जिला निर्वाचन अधिकारियों की टीमों ने इसमें भी सेंध लगा दी और शराब को जब्त किया है।
विज्ञापन
दस के नोटों की सीरीज ही ‘कोडवर्ड’ है। हर दल और प्रत्याशी की अलग सीरीज है। जिसे शराब देनी होती है, उसे दस का ‘खास’ नोट दिया जाता है। उस नोट को दिखाकर दुकान से शराब मिल जाती है। छापों में शराब की जब्ती के दौरान सप्लाई के इस रास्ते की पहचान हुई।
विज्ञापन
चुनाव किसी भी दौर के हों, शराब हमेशा चर्चा में रहती है। शराब का वोटरों पर खासा असर पड़ता है। खास तौर पर ग्रामीण, पिछड़े और गरीब वर्ग में। सुरा प्रेमियों की इस कमजोर ‘नब्ज’ को नेता खूब जानते हैं इसीलिए चुनावी सीजन में कार्यकर्ताओं से लेकर वोटरों तक पर शराब पर पैसा पानी की तरह बहाया जाता है।
विज्ञापन
इस बार भी शराब पर पैसा जमकर खर्च किया गया लेकिन जिला निर्वाचन अधिकारियों की चौकसी ने रंग में भंग डाल दिया। शराब की रोजाना धरपकड़ और निगरानी की वजह से इसका तोड़ निकाल लिया। हालांकि जिला निर्वाचन अधिकारियों की टीमों ने इसमें भी सेंध लगा दी और शराब को जब्त किया है।
हवाला की तरह दस के नोट से शराब का एक्सचेंज
गत्तों, गाड़ियों और कारों में शराब की थोक सप्लाई पर सख्त निगरानी के बाद ‘दस के नोट’ लांच किए गए। आमतौर पर दस के नोट का इस्तेमाल हवाला में होता है। हवाला में नोट देखकर सामान डिलीवर कर दिया जाता है।
गत्तों, गाड़ियों और कारों में शराब की थोक सप्लाई पर सख्त निगरानी के बाद ‘दस के नोट’ लांच किए गए। आमतौर पर दस के नोट का इस्तेमाल हवाला में होता है। हवाला में नोट देखकर सामान डिलीवर कर दिया जाता है।
ठीक उसी फार्मेट में दस के नोटों की हजारों गड्डियां हर प्रत्याशी या राजनीतिक दलों ने लीं। हर गड्डी का सीरियल नंबर अपने पास नोट किया। फिर कार्यकर्ता से लेकर मतदाता तक को दस के नोट प्रतिदिन के हिसाब से दिए गए।
विधानसभा क्षेत्र में शराब की दुकानों को पहले ही एडवांस रकम पहुंचा दी गई। ब्रांड बता दिया गया और सीरीज के नंबर की लिस्ट दे दी गई। दस का खास नोट लेकर जो दुकान जाएगा, दुकानदार बिना कहे शराब दे देगा। जिस नेता की जो सीरीज होगी, उसमें शराब का पैसा कट जाएगा।
साथ ही ग्राहक से मिले दस के नोट नेताजी के पास पहुंच जाएंगे। जितने नोट वापस आएंगे, उतनी ही शराब की बिक्री मानी जाएगी। शराब बांटने और पकड़ने की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक करीब सात लाख लीटर शराब पकड़ी जा चुकी है।