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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   lok sabha election 2019 : only 8 muslim candidates went to parliament in 16 elections

16 आम चुनाव में तीन सीटों से मात्र आठ मुस्लिम सांसद चुने गए, जाने क्या रही वजह

Fri, 17 May 2019 02:21 PM IST
Amulya Rastogi अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 17 May 2019 02:21 PM IST
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lok sabha election 2019 : only 8 muslim candidates went to parliament in 16 elections
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
गंगा व राप्ती की पट्टी का मैदान मुस्लिम नुमाइंदगी को लेकर बहुत उदार नहीं रहा है। कांग्रेसी, समाजवादी व वामपंथी मिजाज की इस धरती की जिन 13 सीटों पर अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होने जा रहा है, उन पर अब तक हुए 16 आम चुनावों में मात्र तीन सीटों से आठ मुस्लिम सांसद चुनकर संसद पहुंच सके हैं।
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इन 13 में से 10 सीटें ऐसी हैं जिनसे अभी तक कोई मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया। लोकसभा के पिछले चुनाव में तो प्रदेश भर से ही कोई मुस्लिम सांसद चुनकर नहीं गया था। पर, उससे पहले भी इस इलाके से मुस्लिम चेहरों को बहुत ज्यादा नुमाइंदगी का मौका नहीं मिला।
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राजनीतिक विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि इस इलाके का सामाजिक ताना-बाना ही ऐसा है। इसीलिए भाजपा ने हिंदुत्व के समीकरण से 2014 में इन सभी 13 सीटों पर झंडा फहराया। भाजपा के रणनीतिकारों ने इस इलाके के गणित को समझते हुए हिंदुत्व के एजेंडे से जातीय खांचों को तोड़कर कामयाबी का रास्ता निकाला। 

इन सीटों में चार सीटें ही ऐसी हैं जिन पर मुस्लिम मतदाता 3 लाख से अधिक हैं। पिछले चुनाव में बसपा, सपा और कांग्रेस तीनों अलग-अलग चुनाव लड़े। ऐसे में मुस्लिम मतों का बंटवारा और उनकी कम संख्या के तुलना में हिंदुओं की लामबंदी भाजपा के पक्ष में चली गई।

उम्मीदवार उतारने में भी कंजूसी

राजनीति शास्त्री प्रो. एसके द्विवेदी इन 13 सीटों को भारतीय राजनीति में जाति के महत्व की बानगी बताते हैं। वह कहते हैं कि कांग्रेस, सपा और बसपा मुस्लिमों के मुद्दे पर बातें तो बड़ी-बड़ी करती हैं, पर जब टिकट देने का मौका आता है तो सभी के सामने इलाके का जातीय गणित आकर खड़ा हो जाता है। 

वे देखते हैं कि किस जाति के कौन-से चेहरे उतारकर वोटों के गणित को अपने पक्ष में किया जा सकता है। सीटें कौन जिताकर दे सकता है। उसी आधार पर पार्टियां उम्मीदवार तय करती हैं। शायद यही वजह रही कि इन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने में प्रमुख राजनीतिक दल बहुत उदार नहीं रहे।
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इस बार भी सिर्फ दो मुस्लिम उम्मीदवार  

लोकसभा के पिछले चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस ने सिर्फ तीन मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इस बार इन 13 सीटों में सिर्फ  दो मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस ने देवरिया में नियाज अहमद को उम्मीदवार बनाया है जबकि गाजीपुर से बसपा के टिकट पर अफजाल अंसारी चुनाव लड़ रहे हैं। 

जाहिर है कि इस बार भी इन 13 सीटों से मुस्लिम प्रतिनिधित्व में बड़े परिवर्तन की संभावनाएं नहीं दिख रही हैं। 2009 में प्रमुख राजनीतिक दलों ने सिर्फ तीन मुस्लिम प्रत्याशी इन सीटों पर उतारे थे। उससे पहले 2004 के चुनाव में भी सपा, बसपा और कांग्रेस की तरफ से सिर्फ तीन मुस्लिमों को ही टिकट दिया गया।

मिर्जापुर से सबसे ज्यादा चार बार चुने गए मुस्लिम सांसद

मिर्जापुर से सबसे अधिक चार बार मुस्लिम सांसद चुने गए। वहां 1971 और 1980 में कांग्रेस के अजीज इमाम, 1977 में भारतीय लोकदल के फाकिर अली और 1989 में जनता दल के यूसुफ बेग सांसद चुने गए। 

अल्पसंख्यकों की बात करें तो मिर्जापुर से 1957 में जेएन विल्सन चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके अलावा गाजीपुर से तीन बार मुस्लिम सांसद चुने गए। वर्ष  2004 में अफजाल अंसारी और कांग्रेस के जैनुल बशर 1980 व 1984 में सांसद चुने गए। इसके अलावा 1980 में अशफाक हुसैन महराजगंज से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए। 

इन सीटों से नहीं चुने गए मुस्लिम सांसद
गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, चंदौली, वाराणसी व रॉबर्ट्सगंज।
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