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आंकड़े राजनाथ के पक्ष में, जीत-हार के अंतर को लेकर बना संशय
Thu, 23 May 2019 09:08 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 23 May 2019 09:08 AM IST
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Rajnath Singh-Poonam Sinha-Pramod Krishnam
- फोटो : social Media
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी का गढ़ माने जाने वाली लखनऊ सीट पर मतदाताओं को रुझान गृहमंत्री राजनाथ सिंह की ओर दिख रहा है, लेकिन ईवीएम में कैद वोटरों फैसले से पर्दा 23 को उठेगा। इस सीट पर राजनाथ का मुकाबला सपा-बसपा गंठबंधन उम्मीदवार व अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा व कांगेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद कृष्णम से है।
साल 1991 के बाद से भाजना लखनऊ सीट पर नहीं हारी है। ऐसे में आंकड़ें राजनाथ के पक्ष में हैं। लखनऊ की सीट पर पिछले कई सालों से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। ऐसे में वोटों की गणना से ही पता चल पाएगा कि मतदाताओं को कौन सा प्रत्याशी कितना भाया और जीत हार में कितना अंतर रहा।
उम्मीदवार घोषित होने के बाद से प्रमोद कृष्णम ने काफी मेहनत की। लखनऊ की जनता से विकास के ढेर सारे वादे किए। पूनम सिन्हा के लिए शत्रुघ्न सिन्हा, बेटी सोनाक्षी सिन्हा व बेटे कुश ने जोर लगया। वहीं राजनाथ के लिए पार्टी कार्यकताओं ने भी कमर तोड़ मेहनत की है।
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साल 1991 के बाद से भाजना लखनऊ सीट पर नहीं हारी है। ऐसे में आंकड़ें राजनाथ के पक्ष में हैं। लखनऊ की सीट पर पिछले कई सालों से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। ऐसे में वोटों की गणना से ही पता चल पाएगा कि मतदाताओं को कौन सा प्रत्याशी कितना भाया और जीत हार में कितना अंतर रहा।
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उम्मीदवार घोषित होने के बाद से प्रमोद कृष्णम ने काफी मेहनत की। लखनऊ की जनता से विकास के ढेर सारे वादे किए। पूनम सिन्हा के लिए शत्रुघ्न सिन्हा, बेटी सोनाक्षी सिन्हा व बेटे कुश ने जोर लगया। वहीं राजनाथ के लिए पार्टी कार्यकताओं ने भी कमर तोड़ मेहनत की है।
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अटल के घर में राजनाथ अश्वस्त
अटल की परांपरिक सीट पर 2014 में चुनाव जीत चुके राजनाथ को पार्टी ने 2019 में फिर से प्रत्याशी बनाया। वहीं काफी मंथन करने के बाद सपा-बसपा गठबंधन ने पूनम सिन्हा व कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को टिकट दिया। प्रत्याशी घोषित होने के बाद अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में राजनाथ जरा भी चिंतित नहीं दिखे। उनसे जब अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों के बारे में पूछा गया तो जवाब दिया कि किसी न किसी तो चुनाव लड़ना ही था।
सभी ने किए विकास और सुरक्षा के वादे
लखनऊ सीट जीतने के लिए सभी प्रत्याशियों ने बेहतर विकास, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वादे किए। प्रमोद कृष्णम ने कई समुदायों के लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनी और समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर शहर का बेहतर विकास करेंगे।
वहीं पूनम सिन्हा ने भी शहरी विकास के साथ महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जोर दिया। उन्होंने लखनऊ को महिलाओं के लिए और सुरक्षित बनाए जाने को वादा किया। राजनाथ सिंह ने महंगाई, बुनियादी सुविधाओं पर ही वोट मांगा।
सभी ने किए विकास और सुरक्षा के वादे
लखनऊ सीट जीतने के लिए सभी प्रत्याशियों ने बेहतर विकास, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वादे किए। प्रमोद कृष्णम ने कई समुदायों के लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनी और समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर शहर का बेहतर विकास करेंगे।
वहीं पूनम सिन्हा ने भी शहरी विकास के साथ महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जोर दिया। उन्होंने लखनऊ को महिलाओं के लिए और सुरक्षित बनाए जाने को वादा किया। राजनाथ सिंह ने महंगाई, बुनियादी सुविधाओं पर ही वोट मांगा।
मुस्लिम वोट पाने के लिए खूब लगा जोर
लखनऊ सीट पर मुस्लिस समुदाय का समर्थन पाने के लिए सभी पार्टियों ने जोर लगाया। राजनाथ, पूनम और प्रमोद सभी मुस्लिम धर्म गुरुओं से मिले और जिताने को कहा। नेताओं ने शिया और सुन्नी कमेटियों के अध्यक्षों से अलग-अलग मुलाकात की। पूनम सिन्हा और आचार्य प्रमोद ने सुन्नी धर्म गुरु खालिद राशिद फिरंगी महली से मिले।
वहीं राजनाथ ने शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे सादिक से मुलाकात कर समर्थन मांगा। चुनाव के कुछ दिन पहले मौलाना कल्बे सादिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शियाओं से राजनाथ को वोट देने की अपील भी की।
अदब के शहर में नहीं हुई गंदी राजनीति
चुनावी मौसम में जिस तरह राजनीति का स्तर लगातार गिरता रहा, उससे लखनऊ अछूता रहा। एक दूसरे से जीतने के लिए यहां प्रत्याशियों ने एक दूसरे के खिलाफ अभद्र टिप्पणी नहीं की। अच्छे काम किए जाने को लेकर सबने एक दूसरे पर आरोप लगाए, लेकिन किसी भी भाषण में सीमाएं नहीं लांघी गईं।
वहीं राजनाथ ने शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे सादिक से मुलाकात कर समर्थन मांगा। चुनाव के कुछ दिन पहले मौलाना कल्बे सादिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शियाओं से राजनाथ को वोट देने की अपील भी की।
अदब के शहर में नहीं हुई गंदी राजनीति
चुनावी मौसम में जिस तरह राजनीति का स्तर लगातार गिरता रहा, उससे लखनऊ अछूता रहा। एक दूसरे से जीतने के लिए यहां प्रत्याशियों ने एक दूसरे के खिलाफ अभद्र टिप्पणी नहीं की। अच्छे काम किए जाने को लेकर सबने एक दूसरे पर आरोप लगाए, लेकिन किसी भी भाषण में सीमाएं नहीं लांघी गईं।