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लोकसभा चुनाव 2019 : लखनऊ संसदीय सीट से जो हारा फिर नहीं लौटा दोबारा
Sat, 20 Apr 2019 03:13 PM IST
Amulya Rastogi
अमित यादव, अमर उजाला लखनऊ
अमित यादव, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 20 Apr 2019 03:13 PM IST
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लखनऊ
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उर्दू के मशहूर शायर मिर्जा गालिब का शेर है कि ‘बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले ...’ लखनऊ के रास्ते देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में पहुंचने का सपना देखने वाले प्रत्याशियों पर यह लाइन बिल्कुल फिट बैठता है।
तहजीब और अदब के लिए विशिष्ट पहचान वाले लखनऊ में जो भी आया, यहां के बाशिंदों ने उसका तहेदिल से स्वागत किया, लेकिन नुमांइदा चुनते समय उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि कौन उनके दिल के ज्यादा करीब है, कौन ज्यादा मुफीद है।
करीब दो दशक से भाजपा का गढ़ बन चुकी लखनऊ संसदीय सीट पर राजनीतिक दलों ने हर चुनाव में नए प्रयोग किए। नामी फिल्म अभिनेता, निर्माता-निर्देशक से लेकर ख्यात राजनीतिक हस्ती को चुनाव मैदान में उतारा। इनमें सपा से राज बब्बर, मुजफ्फर अली, नफीसा अली और कांग्रेस से डॉ. कर्ण सिंह व रीता बहुगुणा जोशी, सभी को भाजपा के सामने शिकस्त खानी पड़ी।
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तहजीब और अदब के लिए विशिष्ट पहचान वाले लखनऊ में जो भी आया, यहां के बाशिंदों ने उसका तहेदिल से स्वागत किया, लेकिन नुमांइदा चुनते समय उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि कौन उनके दिल के ज्यादा करीब है, कौन ज्यादा मुफीद है।
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करीब दो दशक से भाजपा का गढ़ बन चुकी लखनऊ संसदीय सीट पर राजनीतिक दलों ने हर चुनाव में नए प्रयोग किए। नामी फिल्म अभिनेता, निर्माता-निर्देशक से लेकर ख्यात राजनीतिक हस्ती को चुनाव मैदान में उतारा। इनमें सपा से राज बब्बर, मुजफ्फर अली, नफीसा अली और कांग्रेस से डॉ. कर्ण सिंह व रीता बहुगुणा जोशी, सभी को भाजपा के सामने शिकस्त खानी पड़ी।
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इनमें से अधिकतर ने दोबारा लखनऊ के चुनावी मैदान में लौटने की हिम्मत नहीं की। हां, राज बब्बर बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजधानी में जरूर सक्रिय हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर लड़ीं रीता बहुगुणा जोशी हों या सपा के अभिषेक मिश्रा या बसपा के नकुल दुबे,या फिर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अभिनेता जावेद जाफरी, सभी को हार मिली। रीता तो बाद में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं, वहीं बसपा के नकुल दुबे इस बार सीतापुर से किस्मत आजमा रहे हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर लड़ीं रीता बहुगुणा जोशी हों या सपा के अभिषेक मिश्रा या बसपा के नकुल दुबे,या फिर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अभिनेता जावेद जाफरी, सभी को हार मिली। रीता तो बाद में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं, वहीं बसपा के नकुल दुबे इस बार सीतापुर से किस्मत आजमा रहे हैं।
1991 से भाजपा का कब्जा
लखनऊ लोकसभा सीट पर 1991 से भाजपा का कब्जा है। इस संसदीय सीट को पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि कहा जाता है। वाजपेयी यहां से लगातार पांच बार चुने गए। उनके बाद 2009 में भाजपा के टिकट पर लालजी टंडन यहां से जीते।
कांग्रेस का भी रहा प्रभुत्व
1971 के लोकसभा चुनाव में शीला कौल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचीं। 1980 और 1984 में भी कांग्रेस प्रत्याशी शीला कौल ने लगातार दो बार जीत हासिल की।
कांग्रेस का भी रहा प्रभुत्व
1971 के लोकसभा चुनाव में शीला कौल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचीं। 1980 और 1984 में भी कांग्रेस प्रत्याशी शीला कौल ने लगातार दो बार जीत हासिल की।
यह है लिस्ट
लोकसभा चुनाव विजयी प्रत्याशी इन्हें दी शिकस्त
1991 अटल बिहारी वाजपेयी रणजीत सिंह (कांग्रेस)
1996 अटल बिहारी वाजपेयी राज बब्बर (सपा)
1998 अटल बिहारी वाजपेयी मुजफ्फर अली (सपा)
1999 अटल बिहारी वाजपेयी डॉ. कर्ण सिंह (कांग्रेस)
2004 अटल बिहारी वाजपेयी डॉ. मधु गुप्ता (सपा)
2009 लालजी टंडन रीता बहुगुणा जोशी (कांग्रेस)
2014 राजनाथ सिंह अभिषेक मिश्रा (सपा)
1991 अटल बिहारी वाजपेयी रणजीत सिंह (कांग्रेस)
1996 अटल बिहारी वाजपेयी राज बब्बर (सपा)
1998 अटल बिहारी वाजपेयी मुजफ्फर अली (सपा)
1999 अटल बिहारी वाजपेयी डॉ. कर्ण सिंह (कांग्रेस)
2004 अटल बिहारी वाजपेयी डॉ. मधु गुप्ता (सपा)
2009 लालजी टंडन रीता बहुगुणा जोशी (कांग्रेस)
2014 राजनाथ सिंह अभिषेक मिश्रा (सपा)