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कोरोना काल में युवाओं का कॅरिअर और सपने भी हो गए लॉक, प्लेसमेंट हुआ पर नहीं मिला ऑफर लेटर

Tue, 09 Jun 2020 11:41 AM IST
प्राची प्रियम अक्षय कुमार, लखनऊ
अक्षय कुमार, लखनऊ Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 09 Jun 2020 11:41 AM IST
सार

  • जनवरी-फरवरी में हुए प्लेसमेंट में चयनित विद्यार्थियों को ऑफर लेटर ही नहीं मिले।
  • इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट के विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट का पीक टाइम होता है अगस्त-सितंबर व जनवरी-फरवरी।
  • निजी कंपनियों में नई भर्ती की उम्मीद नहीं, बल्कि पुरानों पर ही छंटनी का खतरा मंडरा रहा।

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Lockdown due to Corona outbreak in country adversely affected career and placements
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

कोरोना ने देश के भविष्य यानी युवाओं के करियर और उनके सपनों को भी लॉक कर दिया है। हर नौजवान का सपना पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने का होता है, लेकिन इस बार कोरोना की मार से कराह रही निजी कंपनियां नई भर्ती के बारे में सोच भी नहीं रही हैं। बल्कि छंटनी का सहारा लेकर वजूद बचाने में लगी हैं।

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इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के विद्यार्थियों के लिए अगस्त-सितंबर और जनवरी-फरवरी में प्लेसमेंट का पीक टाइम होता है। एमटेक व गेट क्वालीफाई स्टूडेंट को नवरत्न कंपनियों में ऑफर मिलते थे। प्रक्रिया पूरी होते-होते एक-दो महीने लगते हैं और विद्यार्थियों के पास होने के साथ ही जॉब शुरू हो जाती है। 
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लेकिन इस बार कोरोना काल में 15 मार्च के बाद अप्रैल और मई में प्लेसमेंट पूरी तरह लॉक रहे। इससे पहले जनवरी-फरवरी में हुए प्लेसमेंट में चयनित विद्यार्थियों को ऑफर लेटर ही नहीं मिले हैं। अब ज्वॉइनिंग के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा या नौकरी ही नहीं मिलेगी, यह डर युवाओं को सता रहा है।
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एकेटीयू में तीन महीने से प्लेसमेंट प्रभावित
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) सालभर अपने से संबद्ध 750 से अधिक कॉलेज के विद्यार्थियों की नौकरी के लिए कैंपस प्लेसमेंट आयोजित करता है, लेकिन इस बार 15 मार्च के बाद, अप्रैल व मई में भी इसमें ब्रेक लगा रहा। यूनिवर्सिटी इंडस्ट्री इंटरफेस सेल के अनुसार जनवरी-फरवरी में 53 कंपनियों ने प्लेसमेंट इंटरव्यू किए। 

इसमें से आदित्य बिरला ने दो, अलम्बिक ने 37, एनटीटी डेटा ने 14, स्कवार्ड्स ने 2, टेक महिंद्रा ने 56, कैप जेमिनी ने 513 को शॉर्टलिस्ट किया। हालांकि, अभी तक न तो इनका फाइनल इंटरव्यू हुआ और न ही चयन। इसका एक कारण फाइनल रिजल्ट आना भी बाकी है। 

विवि प्रवक्ता आशीष मिश्रा कहते हैं कि पीक टाइम में लॉकडाउन ने काफी असर डाला। अब इक्का-दुक्का कंपनियां ही आ रही हैं। सेलेक्शन भी कम हो रहे हैं। जो पहले से चयनित हैं, उनकी ज्वॉइनिंग में दिक्कत न आए, इसका प्रयास होगा।

आईईटी-बीबीएयू में भी प्लेसमेंट का सूखा

राजधानी के एकमात्र सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज आईईटी में भी प्लेसमेंट की हालत चिंताजनक हैं। यहां तीन महीने से प्लेसमेंट नहीं हुआ है। अब ऑनलाइन प्लेसमेंट की तैयारी चल रही है। वहीं, होली के बाद जो चुने गए, अभी तक उनकी ज्वॉइनिंग नहीं हुई है।

वहीं, शहर के इकलौते केंद्रीय विश्वविद्यालय बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में पिछले महीने एक कंपनी का ऑनलाइन इंटरव्यू होना था, लेकिन हुआ नहीं। यहां के प्लेसमेंट सेल प्रभारी प्रो. एमएस खान ने कहा कि कोरोना से आर्थिक असर पड़ा है। 

हाल में विश्वविद्यालय में सेलेक्शन नहीं हुए हैं। जो पूर्व में हुए, उनकी ज्वॉइनिंग नहीं हुई है। कंपनियों ने मना नहीं किया है, इसलिए आश्वस्त हैं कि चयनितों को नौकरी मिलेगी।

भारतीय कंपनियों को नहीं मिल रहे ऑर्डर
एकेटीयू के सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज के निदेशक प्रो. मनीष गौड़ ने बताया कि आईटी सेक्टर में अधिकतर काम विदेश से मिलते हैं। कोरोना और बदले आर्थिक परिदृश्य से भारतीय कंपनियों को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। कई नामी कंपनियों में कोई मांग नहीं है। मैकेनिकल, सिविल और केमिकल के विद्यार्थियों को मौके तो मिलेंगे, लेकिन कम। 

इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट के स्टूडेंट के लिए जनवरी-फरवरी से मई-जून सेलेक्शन का पीक टाइम होता है। इस साल तो जॉब प्रभावित होंगे। पहले से चयनितों की जॉब बची रहे, ये भी बड़ी बात है।

जनवरी में हुआ था चयन, ज्वॉइनिंग का इंतजार
नोएडा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र अभिनंदन तिवारी ने बताया कि प्रतिष्ठित कंपनी में जनवरी में उनका चयन हुआ था। 3.70 लाख रुपये का सालाना पैकेज था। अभी ज्वॉइनिंग लेटर नहीं मिला है। कई कंपनियों में पहले से काम कर रहे साथियों की जॉब जा रही हैं या प्रोबेशन पीरियड बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में डर है कि ज्वॉइनिंग होगी या नहीं।

फाइनल एग्जाम के बाद होगी नियुक्ति

राजधानी के प्रतिष्ठित संस्थान से एमटेक कर रहे राहुल निगम का भी चयन बड़ी कंपनी में जनवरी में ही हुआ। 3.60 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिला। फाइनल एग्जाम के बाद ज्वॉइनिंग होगी। 

राहुल कहते हैं कि कोरोना ने जिस तरह दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है, उससे भविष्य को लेकर थोड़ा आशंकित होना स्वाभाविक है। सेलेक्शन न पाने वाले दोस्त चिंतित हैं कि नौकरी मिलेगी या नहीं।

किसी की सैलरी फंसी तो किसी की जॉब गई
कोरोना से उपजे हालात से वे भी प्रभावित हैं, जिन्हें हाल के दिनों में नौकरी मिली है। नोएडा की कंपनी में ट्रेनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उसका सालाना आठ लाख का पैकेज था, लेकिन जॉब चली गई। बंगलूरू की कंपनी में जावा डेवलपर का काम कर रहे और चार लाख सालाना का पैकेज पाने वाले अन्य युवा की भी जॉब कोरोना काल में चली गई। 

नोएडा की ही एक कंपनी में फरवरी में ज्वॉइनिंग करने वाले युवक ने बताया कि उसकी दो महीने से सैलरी फंसी हुई है। उससे काम लिया जाएगा या नहीं, कंपनी यह भी स्पष्ट नहीं कर रही है।

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