दिवाली पर चीन के बजाए स्थानीय कारीगरों की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां व दीये बढ़ाएंगे बाजार की रौनक
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इस बार दिवाली पर चीन के बजाय स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां व दीये बाजार की रौनक बढ़ाएंगे। प्रदेश में हस्तनिर्मित मूर्तियों की लागत ज्यादा होने के कारण चीन की मूर्तियां बाजार में ज्यादा बिकती रही हैं। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में आकर्षक, गुणवत्तायुक्त एवं कम लागत की मूर्तियां और दीये बनाने की कार्ययोजना तैयार कराई गई है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुश्रवण समिति का गठन भी किया गया है।
खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि निर्माण तकनीक एवं सामग्री में भिन्नता के कारण प्रदेश में बनने वाली मूर्तियों की लागत अधिक होती है। वहीं विदेशों में जो मूर्तियां बनती हैं, वह मिट्टी की नहीं होतीं। वे सांचे में ढालकर स्वचालित मशीनों से बनाई जाती हैं जिससे उनकी लागत कम आती है।
दिवाली में मिट्टी की मूर्तियों की पूजा का विधान है, इसलिए प्रदेश में गुणवत्तायुक्तमिट्टी की आकर्षक मूर्तियां बनाई जाएंगी। हर जिले में कारीगरों को इसके लिए 8 इंच और 12 इंच की 100-100 डाई का वितरण कराया जा रहा है।
दीया निर्माण को गति प्रदान करने का दिया निर्देश
मूर्तियों की पेंटिंग के लिए छह एयर कंप्रेसर (50 लीटर क्षमता वाले) स्प्रे मशीन, पेंटिंग व्हील आदि का वितरण भी करने के निर्देश दिए गए हैं। माटीकला बोर्ड के अधिकारियों को मिट्टी कारीगरों की मांग के हिसाब से दीया निर्माण को गति प्रदान करने के भी निर्देश दिए गए हैं। परंपरागत करीगरों को दीया बनाने वाली मशीन (डाई सहित) वितरित की जा रही है।
सिद्धार्थनाथ ने बताया कि प्रदेश में परंपरागत रूप से लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाने वाले समूहों को चिह्नित कर उन्हें कार्यस्थल पर उप्र डिजाइन संस्थान से एप्रूव्ड योग्य कलाकारों के माध्यम से प्रशिक्षण देने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।