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लिवर और गठिया से हैं परेशान तो गौमूत्र देगा रोग से निदान, यहां पढ़ें कैसे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:09 PM IST
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प्रदेश में गौमूत्र से लिवर और गठिया सरीखे रोगों की दवाएं तैयार होंगी। इसके लिए राज्य सरकार ने आयुर्वेद विभाग को जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके मद्देनजर अब आयुर्वेद विभाग गाय के दूध, दही, घी, गोबर व मूत्र से बने पंचगव्य और औषधियों से इलाज पर ध्यान केंद्रित करेगा।
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इससे पहले सरकार फ्लोर क्लीनर्स (फर्श साफ करने वाले पदार्थ) में गौमूत्र के अधिकाधिक प्रयोग के लिए कह चुकी है। यहां बता दें कि खास तौर से लिवर और ऑटो इम्यून डिजीज के इलाज में गौमूत्र से बनी दवाओं का इस्तेमाल होता है।
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आयुर्वेद विभाग ने अपने सभी राजकीय मेडिकल कॉलेज और डिस्पेंसरियों को गौमूत्र से बनी दवाओं के इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा अधिकारियों को भी अपने प्रिस्क्रिप्शन में इन्हें लिखने के निर्देश दिए गए हैं।
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आयुर्वेद विभाग के प्रदेश में राजधानी लखनऊ सहित आठ राजकीय मेडिकल कॉलेज हैं। साथ ही लखनऊ और पीलीभीत में दो फार्मेसी भी हैं, जहां आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण होता है।
बड़े काम का है पंचगव्य
आयुर्वेद विभाग के निदेशक प्रो.आरआर चौधरी ने बताया कि आयुर्वेदिक दवाओं में इस पद्धति की शुरुआत के समय से ही गौमूत्र, दूध, दही, घी, गोबर आदि का प्रयोग किया जाता है। यही नहीं गौमूत्र का शुद्धीकरण करके उसे दवा की तरह सेवन भी किया जाता है।
इसी को लेकर आदेश जारी किया गया है कि गौशालाओं से संपर्क कर गौमूत्र आदि से औषधियां बनाने के लिए वहां से सहयोग लें। गौमूत्र से गोनाइल बनाने का कार्य भी हो रहा है। प्रो. चौधरी ने बताया कि पतंजलि के अलावा कई निजी कंपनियां इसका इस्तेमाल दवाएं बनाने में कर रही हैं। पंचगव्य का इस्तेमाल कृषि के क्षेत्र में भी होता है।
इसी को लेकर आदेश जारी किया गया है कि गौशालाओं से संपर्क कर गौमूत्र आदि से औषधियां बनाने के लिए वहां से सहयोग लें। गौमूत्र से गोनाइल बनाने का कार्य भी हो रहा है। प्रो. चौधरी ने बताया कि पतंजलि के अलावा कई निजी कंपनियां इसका इस्तेमाल दवाएं बनाने में कर रही हैं। पंचगव्य का इस्तेमाल कृषि के क्षेत्र में भी होता है।
प्रदेश में हैं 495 गौशालाएं
गौसेवा अधिकारी संजय यादव ने बताया कि प्रदेश में 495 गौशालाएं गौसेवा आयोग में पंजीकृत हैं, जिन्हें सरकारी मदद दी जाती है। इन गौशालाओं में लगभग 87 हजार गायें हैं। इनके अलावा निजी खर्च और दान से भी कई गौशालाएं चलती हैं।
यहां बन रही हैं गौशालाएं
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद गायों की सुरक्षा को लेकर तेजी से काम हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक ब्लॉक में 1000 गायों की क्षमता वाली गौशाला बनाने के निर्देश दिए हैं। पहले चरण में बुंदेलखंड के सात जिलों और 16 शहरी इलाकों में गौशालाएं बनाई जा रही हैं।
यहां बन रही हैं गौशालाएं
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद गायों की सुरक्षा को लेकर तेजी से काम हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक ब्लॉक में 1000 गायों की क्षमता वाली गौशाला बनाने के निर्देश दिए हैं। पहले चरण में बुंदेलखंड के सात जिलों और 16 शहरी इलाकों में गौशालाएं बनाई जा रही हैं।