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Lucknow News: महज शब्दों की कारीगरी नहीं है साहित्य

Sat, 23 Nov 2024 05:05 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Nov 2024 05:05 AM IST
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Literature is not just the work of words
कोशल साहित्य महोत्सव के मंच पर ईला अरुण।

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लखनऊ। साहित्य महज शब्दों की कारीगरी नहीं है। नए हिंदी साहित्यकारों को बने बनाए खांचे से निकलना होगा। साहित्य ऐसा हो, जिसमें समय का युगबोध शामिल हो। साहित्य और अखबार उच्च वर्गीय व साधन संपन्न लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी होना चाहिए। ये बातें हिंदी के मशहूर युवा लेखक नीलोत्पल मृणाल ने शुक्रवार को संगीत नाटक अकादमी में आयेजित तीन दिवसीय कोशल लिटरेचर फेस्टिवल में कहीं।

चंद्रशेखर वर्मा से बातचीत में चुटीले अंदाज में उन्होंने कहा कि आईएएस नहीं बन पाया तो अमरत्व की चाह में लेखक बन गया। युवा हिंदी लेखकों को सुझाव दिया कि हमें जमीन से जुड़ना होगा। अपने आसपास की दुनिया में दिलचस्पी लेने से ही अच्छा साहित्य लिखा जा सकता है। हिंदी लेखन को भी व्यवसायिकता में आगे आना होगा।
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इसके पहले के सत्र में लेखक जयंत कृष्णा की किताब सर्कल्स ऑफ फ्रीडम पर टीसीए राघवन ने उनसे बातचीत की। स्वतंत्रता सेनानी अरुणा आसफ अली के जीवन पर चर्चा करते हुए जयंत ने क्विट इंडिया समेत आजादी के आंदोलन के घटनाक्रमों पर चर्चा की। राजधानी के कैसरबाग में हुए लखनऊ पैक्ट पर भी बात की।
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अगले सत्र में साहिर लुधियानवी की रचनाओं पर सुमति मिश्रा और अजय जैन की बातचीत को लोगों ने पसंद किया। दोपहर बाद के सत्र में मशहूर गायिका व अभिनेत्री ईला अरुण के साथ सह लेखिका अंजुला बेदी ने ईला की आत्मकथा ''''परदे के पीछे'''' पर चर्चा की। ईला अरुण के राजस्थानी लोक संगीत से बॉलीवुड स्टाडम तक की यात्रा पर चर्चा हुई। ईला ने बताया कि कैसे उन्होंने रूढ़िवादिता से परे अपने जीवन की यात्रा को प्रतिबिंबित करने के लिए वाक्यांश को परदे के पीछे में बदलकर कथा को बदल दिया।



अगले सत्र में इतिहाकार संजीव सान्याल और वरिष्ठ पत्रकार शैलवी शारदा के बीच ''''क्रांति: आजादी की लड़ाई'''' पर चर्चा हुई। संजीव सान्याल ने कहा, युवा पीढ़ी को पढ़ाई सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान हासिल करने के लिए भी करनी चाहिए। कहा कि इतिहास लिखते समय में कई ऐतिहासिक तथ्य को उजागर नहीं किया गया।


अवध की संस्कृति के नाम रही शाम



संवाद न्यूज एजेंसी

लखनऊ। कोशल साहित्य उत्सव की शाम अवध की संगीत और संस्कृति के नाम रही। रमेश्त बैंड से जुड़े आरजे प्रतीक की टीम ने लोक संगीत की प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक लोकधुनों को आधुनिक लय के साथ गुनगुनाया।
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