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Lucknow News: लिफ्ट बंद, मंजिलों में कैद जिंदगी, लखनऊ के पार्थ आद्यंत अपार्टमेंट में 20 से अधिक परिवार कैद भरी जिंदगी जीने पर मजबूर

Fri, 06 Jun 2025 02:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jun 2025 02:07 AM IST
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Lift closed in Parth Aadyant Apartment in Lucknow
अपार्टमेंट में बैठे लोग।
लखनऊ। लखनऊ के शहीद पथ स्थित पार्थ आद्यंत अपार्टमेंट के रेवती बी टावर में 20 से अधिक परिवार लिफ्टें खराब होने के कारण कैद जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। एक लिफ्ट पिछले एक महीने से बंद है, जबकि दूसरी पांच दिनों से खराब पड़ी है। सीढि़यां चढ़ने- उतरने में असमर्थ बुजुर्ग, बीमार और बच्चे 14वीं–15वीं मंजिल पर फंसे हैं। जरूरत की वस्तुएं तक लेकर जा पाना मुश्किल हो गया है।
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मेजर के माता-पिता 15वीं मंजिल पर फंसे
रेवती बी टावर की 15वीं मंजिल पर रहने वाले पूर्व सैनिक उमाशंकर श्रीवास्तव और उनकी पत्नी रेखा श्रीवास्तव गंभीर संकट में हैं। रेखा श्रीवास्तव का पैर टूटा हुआ है। वह इलाज के लिए अस्पताल नहीं जा पा रहीं। उमाशंकर बताते हैं, हम पांच दिन से कमरे में कैद हैं। दोनों बेटे सीमा पर देश की सेवा में तैनात हैं। बेटे मेजर शिवम ने पार्थ आद्यंत के प्रतिनिधियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
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आरडब्ल्यूए-बिल्डर एक-दूसरे पर थोप रहे मामला

अपार्टमेंट के निवासी जब इस समस्या को लेकर बिल्डर के पास पहुंचे तो उन्होंने जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए पर डाल दी। वहीं, आरडब्ल्यूए का कहना है कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। गुरुवार को जब 10 से ज्यादा निवासी बिल्डर पार्थ इंफ्रा से मिले और शिकायत की तो लिफ्ट सुधारने के लिए तकनीशियन भेजे गए।
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बीमार मरीज, नहीं मिल रही फिजियोथेरेपी

आठवीं मंजिल पर रहने वाली 72 वर्षीय कृष्णा देवी लकवा पीड़ित हैं। उन्हें नियमित फिजियोथेरेपी की जरूरत है, लेकिन पांच दिनों से न तो वह नीचे जा पा रही हैं, न ही कोई फिजियोथेरेपिस्ट ऊपर आने को तैयार है। वहीं, 11 वर्षीय उज्ज्वल के पैरों में खिंचाव है, लेकिन डॉक्टर के पास ले जाना संभव नहीं हो पा रहा।

खुले डक्ट, बच्चों की सुरक्षा खतरे में

लिफ्ट के अलावा रेवती बी टावर में खुले डक्ट भी खतरा बने हुए हैं। परिजनों को डर है कि इनमें गिरने से बच्चों को गंभीर नुकसान हो सकता है। अभिभावकों ने मांग की है कि इन डक्ट्स को तत्काल बंद किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।


रेवती बी भवन में रहने वालों को कब्जा तो दे दिया गया है, लेकिन अभी तक भवन निर्माण पूर्ण होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला है। ऐसे में उसकी देखरेख करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। फिर भी हम मेंटेनेंस से लेकर सफाई और बिजली-पानी की सुविधा दे रहे हैं। उसमें जो लिफ्ट लगी है, वह दूसरी कंपनी की है, इसलिए उसे सही करने की जिम्मेदारी कंपनी की है।
- सुनील कुमार सिंह, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए
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