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बच्चे से कुकर्म के बाद हत्या करने वाले को आजीवन कारावास, पत्नी की गोली मारकर हत्या में 20 साल की कैद
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लखनऊ। नाबालिग को टॉफी का लालच देकर दुष्कर्म करने और शोर मचाने पर मुंह दबाकर हत्या करने के आरोपी राजकिशोर उर्फ राजू को दोषी ठहराकर पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद मिश्रा ने आजीवन कारावास और 50 हजार के जुर्माना से दंडित किया है। कोर्ट ने जुर्माने की सारी रकम पीड़ित की मां को प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।
कोर्ट में पॉक्सो एक्ट के विशेष अधिवक्ता सुखेंद्र प्रताप सिंह व अभिषेक उपाध्याय का तर्क था कि इस प्रकरण की रिपोर्ट 19 मार्च 2014 को मृतक बच्चे की मां ने अलीगंज थाने पर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि 17 मार्च 2014 की रात में उसका पुत्र गायब हो गया था। अगले दिन 18 मार्च को काफी तलाशने के बाद ईदगाह के पास स्थित कूड़ा घर में वह मृत मिला था। बहस के दौरान यह भी कहा गया कि मुखबिर की मदद से 19 मार्च 2014 को पुलिस ने पल्सर बाइक के साथ अभियुक्त को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त ने बताया कि होली वाले दिन बच्चे को टॉफी देकर आरोपी अपने कमरे पर ले गया जहां दुष्कर्म किया और चिल्लाने पर उसका मुंह दबाकर हत्या कर दी।
असुरक्षा का भाव बच्चों का बचपन छीन रहा
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरीके की घटनाएं समाज में सामान्य जनमानस के मन में अपने बच्चों को लेकर भय और असुरक्षा का भाव इस प्रकार से उत्पन्न कर रही हैं जिससे अभिभावक अपने छोटे बच्चों को खुलकर जीने की स्वतंत्रता नहीं दे पा रहे हैं। यह असुरक्षा का भाव बच्चों से उनका बचपन छीन रहा है जिसके चलते बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने आरोपी को दंडित करते हुए कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहने के कुछ सामाजिक नियम और व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। मनुष्य का यही गुण उसे पशुओं से अलग करता है। एक 30 साल के आरोपी के मन में 12 साल से कम उम्र के बच्चे को देखकर वासना का भाव उत्पन्न होना समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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पत्नी की गोली मारकर हत्या करने वाले को 20 साल की सजा
लखनऊ। दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी पति कमल किशोर यादव उर्फ कमलू को एडीजे कल्पना ने दोषी ठहराकर 20 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
कोर्ट में सरकारी वकील दुष्यंत मिश्रा एवं अरुण पांडेय ने बताया कि घटना की रिपोर्ट मृतका सविता के पिता रघुवीर प्रसाद ने 27 दिसंबर 2012 को थाना मलिहाबाद में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि घटना के चार साल पहले उसने माधवपुर के रहने वाले कमल किशोर यादव के साथ अपनी बेटी की शादी की थी लेकिन उसके पति एवं ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। ससुराल वालों के आचरण व दबाव को देखते हुए एक बार 2 लाख रुपये देकर मामले को शांत कराया था।अभियोजन की ओर से बहस के दौरान कहा गया कि 2 लाख रुपये देने के बावजूद ससुराल वालों ने सविता की गोली मारकर हत्या कर दी।
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कोर्ट में पॉक्सो एक्ट के विशेष अधिवक्ता सुखेंद्र प्रताप सिंह व अभिषेक उपाध्याय का तर्क था कि इस प्रकरण की रिपोर्ट 19 मार्च 2014 को मृतक बच्चे की मां ने अलीगंज थाने पर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि 17 मार्च 2014 की रात में उसका पुत्र गायब हो गया था। अगले दिन 18 मार्च को काफी तलाशने के बाद ईदगाह के पास स्थित कूड़ा घर में वह मृत मिला था। बहस के दौरान यह भी कहा गया कि मुखबिर की मदद से 19 मार्च 2014 को पुलिस ने पल्सर बाइक के साथ अभियुक्त को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त ने बताया कि होली वाले दिन बच्चे को टॉफी देकर आरोपी अपने कमरे पर ले गया जहां दुष्कर्म किया और चिल्लाने पर उसका मुंह दबाकर हत्या कर दी।
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असुरक्षा का भाव बच्चों का बचपन छीन रहा
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरीके की घटनाएं समाज में सामान्य जनमानस के मन में अपने बच्चों को लेकर भय और असुरक्षा का भाव इस प्रकार से उत्पन्न कर रही हैं जिससे अभिभावक अपने छोटे बच्चों को खुलकर जीने की स्वतंत्रता नहीं दे पा रहे हैं। यह असुरक्षा का भाव बच्चों से उनका बचपन छीन रहा है जिसके चलते बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने आरोपी को दंडित करते हुए कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहने के कुछ सामाजिक नियम और व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। मनुष्य का यही गुण उसे पशुओं से अलग करता है। एक 30 साल के आरोपी के मन में 12 साल से कम उम्र के बच्चे को देखकर वासना का भाव उत्पन्न होना समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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पत्नी की गोली मारकर हत्या करने वाले को 20 साल की सजा
लखनऊ। दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी पति कमल किशोर यादव उर्फ कमलू को एडीजे कल्पना ने दोषी ठहराकर 20 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
कोर्ट में सरकारी वकील दुष्यंत मिश्रा एवं अरुण पांडेय ने बताया कि घटना की रिपोर्ट मृतका सविता के पिता रघुवीर प्रसाद ने 27 दिसंबर 2012 को थाना मलिहाबाद में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि घटना के चार साल पहले उसने माधवपुर के रहने वाले कमल किशोर यादव के साथ अपनी बेटी की शादी की थी लेकिन उसके पति एवं ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। ससुराल वालों के आचरण व दबाव को देखते हुए एक बार 2 लाख रुपये देकर मामले को शांत कराया था।अभियोजन की ओर से बहस के दौरान कहा गया कि 2 लाख रुपये देने के बावजूद ससुराल वालों ने सविता की गोली मारकर हत्या कर दी।