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चरखे के सहारे चल पड़ी जीवन की गाड़ी: खादी- ग्रामोद्योग बोर्ड के सहयोग से बदली सुनीता जैसे कई परिवारों की जिंदगी
Mon, 13 Feb 2023 01:46 PM IST
शाहरुख खान
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 13 Feb 2023 01:46 PM IST
सार
इंवेस्टर्स समिट की प्रदर्शनी में अपना स्टॉल लगाने वाली सुनीता ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की सहायता से बिना किसी पूंजी के इसका काम शुरू हो जाता है। उनके बाद उनके पड़ोस के 27 परिवारों ने यह काम शुरू किया है।
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सौर ऊर्जा से चलने वाले चरखे के साथ सुनीता।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
चरखा सिर्फ स्वेदशी की पहचान ही नहीं है। इसके सहारे जीवन और गृहस्थी की गाड़ी भी चल सकती है। हाथ से चलने वाले चरखे अब पुरानी बात हो चुके हैं। वहीं सौर ऊर्जा से चलने वाले चरखे की सहायता से कम समय में ही ज्यादा आमदनी होती है। यह कहना है कि राजधानी के अमेठी निवासी सुनीता का।
इंवेस्टर्स समिट की प्रदर्शनी में अपना स्टॉल लगाने वाली सुनीता ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की सहायता से बिना किसी पूंजी के इसका काम शुरू हो जाता है। उनके बाद उनके पड़ोस के 27 परिवारों ने यह काम शुरू किया है।
सुनीता ने बताया कि उनके पति मैकेनिक का काम करते हैं। घर का काम करने के बाद वह भी गृहस्थी में सहयोग करना चाहती थीं, लेकिन ऐसा कोई काम नहीं था जो घर से किया जा सके। ऐसे में एक दिन उनके पास खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के लोग आए।
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इंवेस्टर्स समिट की प्रदर्शनी में अपना स्टॉल लगाने वाली सुनीता ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की सहायता से बिना किसी पूंजी के इसका काम शुरू हो जाता है। उनके बाद उनके पड़ोस के 27 परिवारों ने यह काम शुरू किया है।
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सुनीता ने बताया कि उनके पति मैकेनिक का काम करते हैं। घर का काम करने के बाद वह भी गृहस्थी में सहयोग करना चाहती थीं, लेकिन ऐसा कोई काम नहीं था जो घर से किया जा सके। ऐसे में एक दिन उनके पास खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के लोग आए।
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उन्होंने बताया कि बगैर किसी पूंजी के यह काम शुरू किया जा सकता है। इसमें बोर्ड की ओर से सूत कातने के लिए सामग्री और चरखा दिया जाता है। उनके कहने पर उन्होंने चरखा ले लिया, लेकिन हाथ से चलने की वजह से दिन में बमुश्किल एक किलो सूत ही कत पाता था।
इसके बाद बोर्ड की ओर से ही निशुल्क सौर ऊर्जा से चलने वाला चरखा मिल गया। अब रोजाना दो किलोग्राम से ज्यादा सूत कात पाती हूं। प्रति किलोग्राम सूत पर 250 रुपये मिलते हैं। ऐसे में महज कुछ समय के काम के एवज में ही उनको रोजाना पांच सौ रुपये की आमदनी हो जाती है। इसकी वजह से अपनी गृहस्थी में सहयोग कर पा रही हूं।
इसके बाद बोर्ड की ओर से ही निशुल्क सौर ऊर्जा से चलने वाला चरखा मिल गया। अब रोजाना दो किलोग्राम से ज्यादा सूत कात पाती हूं। प्रति किलोग्राम सूत पर 250 रुपये मिलते हैं। ऐसे में महज कुछ समय के काम के एवज में ही उनको रोजाना पांच सौ रुपये की आमदनी हो जाती है। इसकी वजह से अपनी गृहस्थी में सहयोग कर पा रही हूं।