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मंत्रिपरिषद फेरबदल: भाजपा के लिए गेमचेंजर बना यूपी का ये हिस्सा, पर अधूरी रह गईं उम्मीदें

Mon, 04 Sep 2017 12:47 AM IST
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 04 Sep 2017 12:47 AM IST
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less importance of west Uttar Pradesh for Modi cabinet.
पीएम मोदी व गृहमंत्री राजनाथ सिंह

पहले लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव में शानदार जीत व सीटें देने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उम्मीदें इस बार भी पूरी नहीं हुईं। न संगठन का नया नेतृत्व तय करते वक्त तवज्जो मिली, न केंद्रीय मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के दौरान भागीदारी या महत्व बढ़ाने की तरफ ही भगवा रणनीतिकारों का ध्यान गया। तमाम चर्चाओं और अटकलों के बावजूद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद फिर पूर्वी उत्तर प्रदेश के पाले में चला गया।

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राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान को हटाकर उनकी जगह डॉ. सत्यपाल सिंह को राज्यमंत्री की शपथ दिलाकर हिसाब-किताब बराबर जरूर रखा गया। उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हो रहे मोदी मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में पश्चिमी यूपी के किसी राज्यमंत्री को पदोन्नति देकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया जाएगा, पर ऐसा भी नहीं हुआ। मोदी मंत्रिमंडल में वेस्ट यूपी से सिर्फ मेनका गांधी ही कैबिनेट मंत्री हैं।
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मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान से इस्तीफा लिया गया और उनकी जगह बागपत के सांसद सत्यपाल सिंह को शपथ दिलाई गई। बालियान राज्यमंत्री थे और सत्यपाल भी राज्यमंत्री ही बने। पश्चिम को कुछ भी अतिरिक्त नहीं दिया गया।
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24 में से 22 सीटें, पर मंत्री सिर्फ पांच
लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की 24 सीटों में से 22 भाजपा को मिलीं, पर मोदी मंत्रिमंडल में पश्चिमी यूपी से सिर्फ पांच लोगों को शामिल किया गया। उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की 137 सीटों में 119 भाजपा की झोली में डालने की एवज में इस बार मोदी मंत्रिमंडल में जरूर महत्व मिलेगा, पर ऐसा नहीं हो पाया।

इन जिलों में नहीं खुल पाया था दूसरे दलों का खाता

less importance of west Uttar Pradesh for Modi cabinet.

लोकसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक सफलता देने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भी मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा व आगरा समेत कई जिलों में दूसरे दलों का खाता ही नहीं खुला।

इसके बावजूद पश्चिमी यूपी से न तो कोई उपमुख्यमंत्री बनाया गया और न ही कई जिलों को योगी मंत्रिमंडल में नुमाइंदगी मिल सकी। यही नहीं, वोट के लिहाज से अहम भूमिका निभाने वाले गुर्जर समाज के पांच विधायक होने के बावजूद कोई मंत्री नहीं बनाया गया।

पश्चिम से सिर्फ दो प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा की स्थापना से अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सिर्फ कल्याण सिंह और डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ही अध्यक्ष रहे हैं। ऐसे में जबसे भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा चल रही थी, कयास लग रहे थे कि इस बार पश्चिमी यूपी के किसी नेता को प्रदेश की बागडोर सौंपी जाएगी।

तर्क दिया जा रहा था कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री पूर्वांचल से हैं। इसलिए पश्चिम के किसी नेता को पार्टी का नेतृत्व सौंपा जाएगा। इस सिलसिले में केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा, पूर्व मंत्री संजीव बालियान, भाजपा के प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया, मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल समेत कई नाम चर्चा में थे, पर ऐसा नहीं हो पाया।

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