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लखनऊ विकास प्राधिकरण को अवैध निर्माण को सील करने में लग गए 18 महीने
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लखनऊ विकास प्राधिकरण को अवैध निर्माण को सील करने में लग गए 18 महीने
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण को न्यू सिविल लाइंस कॉलोनी टीजी में अवैध निर्माण को सील करने में 18 महीने लग गए। निर्माण शुरू होने के समय बिल्डर को नोटिस दिया गया था, वहीं अब व्यावसायिक उपयोग के लिए कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरा होने के बाद इसे सील किया गया है।
सुषमा रस्तोगी के भूखंड 567 आंशिक, न्यू सिविल लाइंस में बेसमेंट बनने के बाद भूतल की स्लैब पड़ने के बाद 19 जून 2019 को नोटिस जारी हुआ था। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि निर्माण चालू रहा। इंजीनियरों का दावा है कि यहां काम रुकवाया गया था, लेकिन अवैध निर्माण चालू रहने पर भी इसे इंजीनियरों ने सील नहीं कराया। अब तीन मंजिला निर्माण पूरा होने के बाद इंजीनियरों ने इसकी रिपोर्ट विहित प्राधिकारी को 28 दिसंबर 2020 को दी। रिपोर्ट में विहित प्राधिकारी को बताया कि यहां रात के समय चोरी-छिपे काम चालू था। इस रिपोर्ट के बाद सात जनवरी 2021 को इसे सील करने का आदेश हुआ। इसके बाद प्रवर्तन जोन-6 ने इसे सील करा महानगर पुलिस की अभिरक्षा में दे दिया गया है। अधिशासी अभियंता कमलजीत सिंह के साथ सहायक अभियंता एनएस शाक्य और अवर अभियंता डीके शुक्ला ने इसे सील कराया।
सील तोड़कर शुरू हो जाता है उपयोग
नोटिस देने के बाद निर्माण पूरा होने देने का खेल एलडीए में इसलिए खेला जाता है, क्योंकि, निर्माण पूरा होने के बाद सील तोड़कर इसका व्यावसायिक उपयोग कराना आसान होता है। ऐसी कई इमारतें पूरे लखनऊ में मौजूद हैं। लखनऊ में यह बात हो चुकी है। न्यू सिविल लाइंस के इस प्रकरण की ही अगर ठीक से जांच करा दी जाए तो कई चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।
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लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण को न्यू सिविल लाइंस कॉलोनी टीजी में अवैध निर्माण को सील करने में 18 महीने लग गए। निर्माण शुरू होने के समय बिल्डर को नोटिस दिया गया था, वहीं अब व्यावसायिक उपयोग के लिए कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरा होने के बाद इसे सील किया गया है।
सुषमा रस्तोगी के भूखंड 567 आंशिक, न्यू सिविल लाइंस में बेसमेंट बनने के बाद भूतल की स्लैब पड़ने के बाद 19 जून 2019 को नोटिस जारी हुआ था। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि निर्माण चालू रहा। इंजीनियरों का दावा है कि यहां काम रुकवाया गया था, लेकिन अवैध निर्माण चालू रहने पर भी इसे इंजीनियरों ने सील नहीं कराया। अब तीन मंजिला निर्माण पूरा होने के बाद इंजीनियरों ने इसकी रिपोर्ट विहित प्राधिकारी को 28 दिसंबर 2020 को दी। रिपोर्ट में विहित प्राधिकारी को बताया कि यहां रात के समय चोरी-छिपे काम चालू था। इस रिपोर्ट के बाद सात जनवरी 2021 को इसे सील करने का आदेश हुआ। इसके बाद प्रवर्तन जोन-6 ने इसे सील करा महानगर पुलिस की अभिरक्षा में दे दिया गया है। अधिशासी अभियंता कमलजीत सिंह के साथ सहायक अभियंता एनएस शाक्य और अवर अभियंता डीके शुक्ला ने इसे सील कराया।
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सील तोड़कर शुरू हो जाता है उपयोग
नोटिस देने के बाद निर्माण पूरा होने देने का खेल एलडीए में इसलिए खेला जाता है, क्योंकि, निर्माण पूरा होने के बाद सील तोड़कर इसका व्यावसायिक उपयोग कराना आसान होता है। ऐसी कई इमारतें पूरे लखनऊ में मौजूद हैं। लखनऊ में यह बात हो चुकी है। न्यू सिविल लाइंस के इस प्रकरण की ही अगर ठीक से जांच करा दी जाए तो कई चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।
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