2075 एकड़ की प्रबंधनगर योजना में फिर विकास शुरू कर रहा एलडीए
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वर्ष 2006 से अटकी प्रबंधनगर योजना को एलडीए फिर से लॉन्च करने जा रहा है। 2075 एकड़ की योजना को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने पर सहमति बन गई है। योजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी इसी महीने शुरू करने की तैयारी है।
डीपीआर को एनजीटी से मंजूरी मिलते ही इसके विकास के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। वहीं, इस बीच किसानों से लैंडपूलिंग पर सहमति बना एलडीए जमीनों का अधिग्रहण शुरू कर देगा। एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश के निर्देश पर योजना को लॉन्च करने में तेजी लाई गई है।
एलडीए के मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह का कहना है कि योजना शुरू करने से पहले इसका पर्यावरण पर होने वाले असर का आकलन अनिवार्य है। इसके बाद ही एनजीटी विकास कार्य कराने की अनुमति देगा। ऐसे में ईआईए के लिए हम विशेषज्ञ एजेंसी के साथ अनुबंध करेंगे।
इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं, एनजीटी की आपत्ति और योजना के लिए चिह्नित जमीन में ग्रीनबेल्ट कम हो जाने से प्रबंधनगर की नई डीपीआर और ले-आउट बनाया जाना है। डीपीआर बनाने के लिए टेंडर जल्द कर दिया जाएगा। इसके लिए टीम ने तैयारी पूरी कर ली है।
महायोजना 2031 से बदली योजना की सूरत
एलडीए के अधिशासी अभियंता अजय पंवार ने बताया कि अभी तक जो नियोजन प्रबंधनगर के लिए हुआ, उसे महायोजना 2021 के आधार पर तैयार किया गया। वहीं, महायोजना 2031 के लागू होने के बाद यहां लैंडयूज में काफी बदलाव हुआ।
सबसे बड़ा बदलाव ग्रीनबेल्ट के 80 प्रतिशत से अधिक तक कम हो जाने के रूप में हुआ है। पहले यहां एलडीए को 40 प्रतिशत से अधिक ग्रीनबेल्ट ही अर्जित होकर मिल रही थी। इसका आवासीय या व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता था।
किसी भी योजना में 15 प्रतिशत तक ग्रीनबेल्ट रखनी होती है। अब इस अनुपात के साथ योजना का विकास हो सकेगा। वहीं, एलडीए को भी विकास कार्य का खर्च निकालने के लिए भूखंडों की कीमतें नहीं बढ़ानी पड़ेंगी।
किसानों से भी वार्ता शुरू
एलडीए अधिकारियों ने बताया कि किसानों से भी लैंडपूलिंग पर वार्ता और समझौता पत्र भरवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 2075 में से 1836 एकड़ जमीन किसानों से लेनी है। बाकी जमीन ग्राम सभा, नजूल आदि से एलडीए को यहां मिल जाएगी।
तीसरी बार बनेगा प्रबंधनगर का ले-आउट
दो साल में पूरा होगा योजना का विकास
जमीन अर्जित होने के बाद विकासकर्ता से काम शुरू कराया जाएगा। इसके दो साल में काम पूरा कर लिया जाएगा। किसान से जमीन लेने के दो साल बाद एलडीए किसान को 25 प्रतिशत विकसित जमीन वापस करेगा। इसके लिए किसान भी सहमति दे रहे हैं। - इंदुशेखर सिंह, मुख्य अभियंता, एलडीए