एलडीए ने 68 लाख में बुक हुए फ्लैट की कीमत 80 लाख पहुंचा दी
प्रीमियम वर्ग के गोमतीनगर विस्तार में बनाए गए सरयू अपार्टमेंट के 3 बीएचके फ्लैटों की कीमत पंजीकरण खोलने के बाद करीब 16 प्रतिशत बढ़ गई है। वहीं एलडीए के इंजीनियर्स को यह नहीं पता कि ऐसा क्या हुआ? जिसकी वजह से कीमतें बढ़ीं। आवंटी अब एलडीए की बढ़ाई कीमतों को कम कराने या रिफंड का आवेदन करने को मजबूर हैं।
एलडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक सरयू अपार्टमेंट में 3 बीएचके फ्लैट की कीमत सितंबर 2015 में आवेदन के 68.50 लाख रुपये प्रस्तावित थी। वहीं मई 2016 में लॉटरी कराये जाने के बाद जब आवंटन पत्र जारी किए गए। उसी समय एलडीए ने कीमत बढ़ा दी।
आवेदकों को जब आवंटन पत्र मिले तो एक फ्लैट की कीमत बढ़कर 74.85 लाख रुपये हो गई। 2018 में अब जब रजिस्ट्री कराकर कब्जा लेने की बारी आई तो आवंटियों ने फाइनल कॉस्टिंग कराई।
इस बार फ्लैट की कीमत बढ़कर 79.89 लाख रुपये हो गई। एलडीए ने सरयू अपार्टमेंट में 240 फ्लैट बनाए हैं। इनके एरिया 1617 वर्गफीट से लेकर 2860 वर्गफीट है।
ठेकेदार को बढ़ा भुगतान नहीं, फिर कीमत कैसे बढ़ी
आवंटी आकांक्षा शुक्ला का कहना है कि हमने एलडीए में कई अधिकारियों से पूछा। लेकिन हमें कोई यह नहीं बता पाया कि ठेकेदार को प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ने की वजह से अधिक भुगतान करना पड़ा। इसकी वजह से फ्लैटों की कीमत बढ़ी कोई दूसरा कारण भी नहीं है। इसके बाद भी 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी कीमत में होना एक अचंभा ही है। एलडीए को इसे स्पष्ट करना चाहिए।
10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती बढ़ोतरी
एलडीए की खुद की कॉस्टिंग नियमावली के मुताबिक आवंटी को बेची गई संपत्ति की कीमत में बढ़ोतरी अधिकतम 10 प्रतिशत तक अनुमन्य है। इधर एलडीए आवेदन के बाद से करीब 11.39 लाख रुपये बढ़ा चुका है। यह आवेदन के समय प्रस्तावित कीमत का करीब 16.62 प्रतिशत है। कीमत में बढ़ोतरी का यही अनुपात अन्य टाइप के 3 बीएचके, 3 बीएचके सर्वेंट, 4 बीएचके, 4 बीएचके सर्वेंट में भी है।
बजट से बाहर हो गया फ्लैट
एलडीए में सरयू अपार्टमेंट में उस समय फ्लैट बुक कराने वाले आवंटियों के बजट से बाहर यह संपत्ति हो गई है। कई फ्लैटों के आवंटी रिफंड ले चुके हैं। वहीं कई आवेदन अब भी एलडीए में रिफंड के लिए लंबित बने हुए हैं। उदाहरण के रूप में 3 बीएचके फ्लैट को ही देखें तो सभी शुल्क और जीएसटी चुकाने के बाद करीब 90 लाख रुपये से अधिक कीमत पहुंच रही है। यह उस समय है जबकि आवंटियों को दो पार्किंग यहां मुफ्त दी गई हैं।
देरी ने टैक्स का बोझ भी बढ़ा दिया
आवंटियों का कहना है कि प्रोजेक्ट को अगर समय पर पूरा कर लिया गया होता तो जीएसटी लागू होने से पहले ही यहां कब्जा शुरू हो गया होता। यह भी चौंकाने वाला है कि जुलाई के बाद ठेकेदार ने कोई काम वहां होने की रिपोर्ट भी एलडीए को नहीं दी। इस देरी की वजह से आवंटियों पर सर्विस टैक्स के 4.5 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत जीएसटी लग गया। यह भी 4 लाख रुपये तक कीमत आवंटियों के लिए बढ़ाने का काम कर रहा है।