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Lucknow News: पीएनसी इंफ्राटेक पर एलडीए की सख्ती, 194 करोड़ के काम पर नोटिस
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लखनऊ विकास प्राधिकरण।
लखनऊ। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में लापरवाही पर एनएचएआई की ओर से पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को तीन साल के लिए डिबार किए जाने के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी कंपनी पर सख्ती की है। एलडीए ने ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत करीब 194.40 करोड़ रुपये के काम का ठेका मिलने के मामले में कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कंपनी का जवाब मिलने के बाद ही कार्रवाई तय होगी।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत शहीद पथ इंटरसेक्शन पर चार लेन फ्लाईओवर, लूप और रैंप निर्माण के लिए पीएनसी को लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) एनएचएआई की कार्रवाई से करीब चार महीने पहले जारी किया गया था। करीब 215 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के लिए 19 मार्च को निविदा आमंत्रित की गई थी। 11 अप्रैल को तकनीकी बिड में पीएनसी समेत चार कंपनियां चयनित हुईं। इसके बाद सात मई को वित्तीय बिड खोली गई, जिसमें 194.40 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाने पर पीएनसी को एल-वन घोषित किया गया। 27 मई को कंपनी को एलओए जारी कर दिया गया।
वीसी के मुताबिक, एलओए जारी होने के समय कंपनी के खिलाफ कोई विवाद सामने नहीं था और पूरी टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से हुई थी। इसके करीब डेढ़ महीने बाद 13 जुलाई को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ। एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने और निर्माण संबंधी खामियां सामने आने के बाद एनएचएआई ने तीन सितंबर को पीएनसी को तीन साल के लिए डिबार किया। इसके बाद मामला एलडीए के संज्ञान में आया और कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
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यह है मामला
करीब 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 4,700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। निर्माण में गंभीर खामियां सामने आने के बाद एनएचएआई ने पीएनसी को अपनी नई परियोजनाओं की बोली प्रक्रिया से तीन साल के लिए बाहर कर दिया। कंपनी को नॉन-परफॉर्मर भी घोषित किया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी रोक दी गई है। एनएचएआई के अनुसार, सड़क की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कमियां दूर होने तक टोल नहीं लिया जाएगा। अब एलडीए की ओर से जारी नोटिस पर कंपनी के जवाब के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ग्रीन कॉरिडोर के काम को लेकर प्राधिकरण आगे क्या निर्णय लेता है।
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एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत शहीद पथ इंटरसेक्शन पर चार लेन फ्लाईओवर, लूप और रैंप निर्माण के लिए पीएनसी को लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) एनएचएआई की कार्रवाई से करीब चार महीने पहले जारी किया गया था। करीब 215 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के लिए 19 मार्च को निविदा आमंत्रित की गई थी। 11 अप्रैल को तकनीकी बिड में पीएनसी समेत चार कंपनियां चयनित हुईं। इसके बाद सात मई को वित्तीय बिड खोली गई, जिसमें 194.40 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाने पर पीएनसी को एल-वन घोषित किया गया। 27 मई को कंपनी को एलओए जारी कर दिया गया।
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वीसी के मुताबिक, एलओए जारी होने के समय कंपनी के खिलाफ कोई विवाद सामने नहीं था और पूरी टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से हुई थी। इसके करीब डेढ़ महीने बाद 13 जुलाई को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ। एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने और निर्माण संबंधी खामियां सामने आने के बाद एनएचएआई ने तीन सितंबर को पीएनसी को तीन साल के लिए डिबार किया। इसके बाद मामला एलडीए के संज्ञान में आया और कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
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यह है मामला
करीब 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 4,700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। निर्माण में गंभीर खामियां सामने आने के बाद एनएचएआई ने पीएनसी को अपनी नई परियोजनाओं की बोली प्रक्रिया से तीन साल के लिए बाहर कर दिया। कंपनी को नॉन-परफॉर्मर भी घोषित किया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी रोक दी गई है। एनएचएआई के अनुसार, सड़क की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कमियां दूर होने तक टोल नहीं लिया जाएगा। अब एलडीए की ओर से जारी नोटिस पर कंपनी के जवाब के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ग्रीन कॉरिडोर के काम को लेकर प्राधिकरण आगे क्या निर्णय लेता है।