{"_id":"615b64568ebc3e4af164a6f5","slug":"last-salute-to-his-son-lucknow-news-lko598654613","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटे को अंतिम सलामी... दिल में गम, आंखें नम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटे को अंतिम सलामी... दिल में गम, आंखें नम
विज्ञापन
बेटे को अंतिम विदाई देते हुए छलक आए आंसू...।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह आठ बजे जब विकासनगर स्थित उनके आवास पर लाया गया तो मां और पत्नी फफक कर रो पड़ीं। वायुसेना में तैनात पिता ने दिल में गम लिए नम आंखों से बेटे को अंतिम सलामी दी तो माहौल गमगीन हो गया। सबकी आंखें छलक पड़ीं।
उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित त्रिशूल पर्वत पर पर्वतारोहण अभियान के दौरान हिमस्खलन में काल के गाल में समाने वाले नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव सोमवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। बैकुंठधाम में सुबह लगभग दस बजे भाई रमाकांत यादव ने उनका अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर नेवी के अफसरों कार्तिक, जी. कमलाकर, मुकेश वर्मा, अंकित सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव का परिवार विकासनगर के सेक्टर-12 आनंदपुरम में रहता है। उनके पिता विजेंद्र सिंह बीकेटी एयरफोर्स स्टेशन पर वारंट ऑफिसर पद पर तैनात हैं। मां परिजेश घर पर ही रहती हैं। रजनीकांत इन दिनों मुंबई में आईएनएस पर तैनात थे। जबकि पत्नी विन्नी मुंबई में ही टाटा स्टील में नौकरी करती हैं।
विज्ञापन
हिमस्खलन के चलते रजनीकांत समेत पूरी टीम लापता हो गई थी। सेना ने हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया तो शनिवार को रजनीकांत व तीन अन्य पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीर मिले।
दोस्त ने दिया परिवार को संबल
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव के करीबी मित्रों में दीपक कुमार सिंह शामिल हैं। वह उनके साथ केंद्रीय विद्यालय में साथ पढ़ते थे। फिर साथ में ही सशस्त्र बलों में चुने गए और ट्रेनिंग भी साथ में की। रजनीकांत के निधन के बाद दीपक कुमार ने परिवार को संबल दिया। अपनी पीड़ा को छुपाकर परिजनों को लगातार ढांढस बंधाते रहे।
मिलेगी 50 लाख की मदद, सरकारी नौकरी
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने रजनीकांत के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान करने की घोषणा की है। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा जनपद की एक सड़क का नामकरण उनके नाम पर करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने उनके परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ है।
विज्ञापन
उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित त्रिशूल पर्वत पर पर्वतारोहण अभियान के दौरान हिमस्खलन में काल के गाल में समाने वाले नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव सोमवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। बैकुंठधाम में सुबह लगभग दस बजे भाई रमाकांत यादव ने उनका अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर नेवी के अफसरों कार्तिक, जी. कमलाकर, मुकेश वर्मा, अंकित सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
विज्ञापन
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव का परिवार विकासनगर के सेक्टर-12 आनंदपुरम में रहता है। उनके पिता विजेंद्र सिंह बीकेटी एयरफोर्स स्टेशन पर वारंट ऑफिसर पद पर तैनात हैं। मां परिजेश घर पर ही रहती हैं। रजनीकांत इन दिनों मुंबई में आईएनएस पर तैनात थे। जबकि पत्नी विन्नी मुंबई में ही टाटा स्टील में नौकरी करती हैं।
विज्ञापन
हिमस्खलन के चलते रजनीकांत समेत पूरी टीम लापता हो गई थी। सेना ने हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया तो शनिवार को रजनीकांत व तीन अन्य पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीर मिले।
दोस्त ने दिया परिवार को संबल
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव के करीबी मित्रों में दीपक कुमार सिंह शामिल हैं। वह उनके साथ केंद्रीय विद्यालय में साथ पढ़ते थे। फिर साथ में ही सशस्त्र बलों में चुने गए और ट्रेनिंग भी साथ में की। रजनीकांत के निधन के बाद दीपक कुमार ने परिवार को संबल दिया। अपनी पीड़ा को छुपाकर परिजनों को लगातार ढांढस बंधाते रहे।
मिलेगी 50 लाख की मदद, सरकारी नौकरी
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने रजनीकांत के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान करने की घोषणा की है। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा जनपद की एक सड़क का नामकरण उनके नाम पर करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने उनके परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ है।