फूल बेचने वाला कैस बन गया खूंखार आतंकवादी?
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फूल बेचने वाला गांव का एक मामूली आदमी से आतंकी बनने की इरफान की कहानी पैसे के लिए इंसानियत से गिरने की मिसाल है। मोहल्ला नाजिरपुरा निवासी इरफान कभी फूल बेचकर घर का खर्च चलाता था लेकिन ज्यादा कमाने के लालच में उसने फूल कुचलकर बंदूक थाम ली।
90 के दशक में लश्कर ए तैयबा में शामिल हुआ और फिर आतंकी गतिविधियों की गर्त में गिरता चला गया। उसने अपने बेटे अबरार को भी अपने नक्शेकदम पर चलाया। आतंकवादी बनने के बाद उसने लखनऊ की फूल वाली गली में रिश्तेदार के मकान को अपना ठिकाना बनाया था लेकिन पेरोल के दौरान फरार होने के बाद नेपाल के भैरहवा को ठिकाना बना लिया।
वहीं उसने परिवार को भी बुला लिया। बहराइच में उसके भाई का परिवार और एक निशक्त बहन रहती है। मोहल्ला नाजिरपुरा बागवानी में स्थित इरफान का मकान कच्ची दीवारों का बना हुआ है। खपरैल और टीनशेड की छते हैं। इरफान के पिता फारूख पुश्तैनी फूल बेचने का धंधा करते थे। घर में इरफान सबसे बड़ा था। उसका छोटा भाई रिजवान और चार बहने मुन्नी उर्फ चांदबीबी, निशक्त मुल्ला, तस्लीमी और नसीमुन थी।
कानपुर की राजधानी एक्सप्रेस में किया था धमाका
पिता की मौत के बाद फूल बेचकर घर का खर्च नहीं चल रहा था। फिर वह 1990 के आसपास लश्कर ए तैयबा का सदस्य बना। साल भर बाद ही इरफान इंडो-नेपाल बार्डर का डिप्टी कमांडर बना दिया गया। उसके बाद उसने अपनी धाक जमाने के लिए वर्ष 1993 में कानपुर में राजधानी एक्सप्रेस में विस्फोट किया।
इरफान की गिरफ्तारी के लिए उस समय दो बार मुंबई और दिल्ली की एटीएस ने बहराइच में छापामारी की थी लेकिन वह हाथ नहीं लग सका था। दिल्ली स्पेशल सेल ने 1996 में उसे दबोचा था। तीन साल जेल में बंद रहने के दौरान उसका संपर्क आईएम के संस्थापक सदस्य के बेटे आमिर रजा से हुआ था।
उसने जेल से छूटने पर इरफान को कोलकाता आने के लिए कहा। 2004 में जब भाई की शादी में जाने के लिए पेरोल पर वह जेल से बाहर आया तो सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर बहराइच से सीधे कोलकाता की राह पकड़ ली। वहां पर उसने आमिर रजा के संपर्क में रहकर कंप्यूटर संचालन की ट्रेनिंग ली।
खुफिया सूत्रों की मानें तो आमिर रजा उसी दौरान पाकिस्तान निकल गया था लेकिन इरफान कंप्यूटर संचालन की बारीकियां सीखने के बाद नेपाल चला गया। वहां पर भैरहवा में उसने कंप्यूटर सेंटर और जैकेट का कारखाना खोला। परिवार को भी लखनऊ के फूल वाली गली से नेपाल बुला लिया। नेपाल में रहकर ही इरफान भारत में आतंकियों की घुसपैठ, लश्कर-ए- तैयबा और आईएम में युवकों की भर्ती व ट्रेनिंग का काम संभाल रहा था।
इंडो-नेपाल की खुली सीमा में सेंध लगाते रहे हैं आतंकी
इंडो-नेपाल की खुली सीमा देश विरोधी ताकतों को अरसे से रास आ रही है। सीमा के सहारे लश्करे तैयबा ने शहर के नाजिरपुरा निवासी बाप-बेटे को न सिर्फ आतंकवादी बनाया, बल्कि मुंबई बम ब्लास्ट का आरोपी अफजल उस्मानी 2013 के अक्तूबर में बहराइच में पकड़ा गया था।
रिसिया क्षेत्र में डान दाऊद इब्राहीम के खानसामा का मकान है। उसे भी दिल्ली में दाऊद के भाई के साथ पुलिस ने पकड़ा था। पंजाब का शातिर आतंकवादी सतराना दशक भर पूर्व पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ था।
सीमा पर स्थित बहराइच पिछड़ा क्षेत्र होने के चलते अक्सर देशविरोधी तत्वों के आवागमन का केंद्र रहा है। मुंबई बम ब्लास्ट का आरोपी अफजल उस्मानी वर्ष 2013 के अक्तूबर माह में एटीएस के हत्थे चढ़ा था। वह बहराइच के फखरपुर में एक मकान किराये पर लेकर रह रहा था। कपड़े का व्यवसाय शुरू करने की फिराक में था।
बेखौफ बहराइच और नेपाल सीमा पर आवागमन भी करता था। इतना ही नहीं मुंबई के डॉन दाऊद इब्राहीम का खानसामा जिब्राइल दिल्ली में वर्ष 2009 के फरवरी माह में दाऊद के भाई अनीस के साथ गिरफ्तार हुआ था। खानसामा जिब्राइल बहराइच के रिसिया थाना अंतर्गत पटपरगंज इमलिया का निवासी था।
उसके घर की तलाशी के लिए दिल्ली पुलिस एटीएस के साथ दो बार रिसिया थाने में पहुंची थी। पंजाब का आतंकवादी सतराना वर्ष 1997 में मटेरा-नानपारा के मध्य एक पेट्रोलपंप के निकट पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ था। ताल्लुक भी भिंडारवाला संगठन से था।