बिलो द बेल्ट वार कर रहे हैं पीएम मोदी, बाथरूम में मत झांकिए: लालू यादव
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तीन चरण का चुनाव खत्म हो गया। अब आप यूपी आए हैं। देरी की कोई खास वजह?
हमने चुनाव शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी के नेताओं से कह दिया था कि जहां आप कार्यक्रम लगाइएगा, हम जरूर आएंगे। अब इन लोगों ने मुझे बुलाया है तो आए हैं। वैसे हम बुलंदशहर की सिकंदरा सीट पर दो सभाएं कर चुके हैं। 10-12 जिलों में सभाएं करेंगे।
प्रधानमंत्री रोज नए-नए मुद्दे उठा रहे हैं। आप उनका जवाब कैसे देंगे।
प्रधानमंत्री बिलो द बेल्ट वार कर रहे हैं। वह किसके-किसके बाथरूम में निहारते हैं, आपको क्या बताएं। मोदी और अमित शाह दोनों मिलकर यहां सत्ता हथियाना चाहते थे, बिहार में भी यही चाहते थे, हम लोगों ने जमने नहीं दिया और उखाड़ फेंका। इनको बनाए रखना देश के लिए हानिकारक है।
प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि वह यूपी के गोद लिए बेटे हैं। आपको क्या लगता है?
प्रधानमंत्री जहां जाते हैं, वहां से अपना रिश्ता निकाल लेते हैं। अब यूपी में कह रहे हैं कि गोद लिया बेटा हूं। यह यूपी की माताओं का अपमान है। गोद तभी लिया जाता है जब किसी को कोई संतान नहीं होती। यूपी के पास कई अपने लाल हैं। इसीलिए हमने प्रधानमंत्री से पूछा है कि वह बताएं कि आप अगर गोद लिए बेटे हैं तो आपके पिता कौन हैं?
ऐसा नहीं लगता यूपी चुनाव से विकास का मुद्दा गायब हो गया है?
विकास के मुद्दे से भाजपा भाग रही है क्योंकि उसको जवाब देना पड़ेगा।
निशाने पर माया भी होंगी या सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी?
मायावती को कौन पूछ रहा है। मायावती के बारे में तो सबको पता है कि वह भाजपा वालों के साथ मिलकर सरकार बना लेती हैं। उत्तर प्रदेश को इन तानाशाहों से बचाना है, इसलिए हम सपा और कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं।
नोटबंदी का क्या असर आप देख रहे हैं?
भाजपा को जो हार्डकोर वोट था, नोटबंदी से वह खिसक गया है। व्यापारियों की रीढ़ टूट गई। सोनार पर एक्साइज ड्यूटी दोबारा लगा दिया जिससे इंस्पेक्टर राज चालू हो गया। लोगों के यहां इनकम टैक्स का नोटिस पहुंच रहा है। हालत यह है कि मार्केट में सीए नहीं मिल रहा है। सीरिंज लगाकर जो पैसा निकलवाया अब उन्हीं से पूछ रहे कि कितने का नोट दिए थे, पैसे कहां से आए।
आपके हिसाब से यूपी में किस मुद्दे पर चुनाव लड़ा जा रहा है?
उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने बहुत काम किया है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को यह पच नहीं रहा है। इसलिए वह लोगों का ध्यान भटका रहे हैं। कब्रिस्तान-श्मशान की बात कर रहे हैं। पौने तीन साल खुद कोई काम किया नहीं। इसलिए सांप्रदायिकता का कार्ड खेल रहे हैं।
अखिलेश के लिए भाजपा कह रही है कि जो बाप का नहीं हुआ, वह आपका क्या होगा?
पहले भाजपा को बताना चाहिए कि अटलजी की किसने यह हालत की। इसमें बड़ी साजिश है जिसके तहत अटलजी को बीमार किया गया और उनकी ऐसी हालत कर दी गई कि वह दोबारा खड़े न हो पाएं। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जहां तक मुलायम की बात है, उन्होंने अखिलेश को आशीर्वाद दिया है और कहा भी है कि अखिलेश ही मुख्यमंत्री होंगे।
आप बिहार में कांग्रेस के साथ गठबंधन में हैं। नीतीश, अखिलेश और राहुल में आप किसको पीएम देखना पसंद करेंगे ?
हम लोगों के पास अच्छे नेताओं की कमी नहीं है। सब मिल बैठकर आपस में तय कर लेंगे। अभी यह मुद्दा नहीं है।
अमित शाह ने कहा है कि वह इस चुनाव को नोटबंदी का जनमत संग्रह मानने को तैयार हैं। इसे आप किस तरह से देखते हैं?
अगर केंद्र सरकार के लिए जनमत संग्रह मान रहे हैं तो बताएं कि बैंकों में कितना पैसा जमा हुआ? कितना कालाधन आया? भ्रष्टाचार, आतंकवाद और नकली नोट पर कितना अंकुश लगा। यूपी की जनता इनको सबक सिखाएगी।
यूपी में गठबंधन कितना सफल होगा? कई सीटों पर सपा कांग्रेस प्रत्याशी आमने-सामने हैं?
मुख्यमंत्री के चेहरे पर किसी को संदेह नहीं है। वोटों का बिखराव न हो, इसलिए सपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया। थोड़ा-बहुत तो इधर-उधर होता ही है, वह कोई खास बात नहीं है। हमारा लक्ष्य यूपी में मोदी को रोकना है। प्रधानमंत्री देश को तानाशाही से चलाना चाहते हैं। उनमें पद की भी गरिमा नहीं बची है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में संसद में कैसी भाषा बोल रहे थे, आपने देखा? नोटबंदी करके सबको लाइन में लगा दिया। नोटबंदी लागू करने से पहले अपनी पार्टी में भी किसी से नहीं पूछा, यह तानाशाही नहीं तो और क्या है?
बिहार में नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के कुछ नजदीक जाते दिख रहे हैं। आप इसे किस रूप में देख रहे हैं?
नीतीश ने नोटबंदी के दौरान मोदीजी की तारीफ की थी, अब उनसे हिसाब भी तो मंाग रहे हैं। हम लोगों की बिहार में अच्छी सरकार चल रही है। जो लोग लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वह कामयाब नहीं होंगे।