घर के काम न करने पर गोद ली बच्ची को पीटा, विरोध पर छोड़ा बालगृह, लगाए ये आरोप
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हालांकि, उसे यहां ज्यादा दिन सुख नहीं नसीब हुआ। सुनीता काम न करने पर उसे मारती और भूखा रखती। बच्ची ने विरोध जताया तो उसे फिर बालगृह लाकर छोड़ दिया गया। साथ ही चोरी जैसे आरोप लगाए गए। बालगृह भी मामले को दबाए रहा।
बाल कल्याण समिति की ओर से बच्ची की काउंसलिंग से खुलासा होने के बाद सुनीता के खिलाफ नाका थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। बाल कल्याण समिति की सदस्य सुधारानी ने बताया कि अगस्त में मामला सामने आने के बाद बालगृह की दत्तक इकाई की अधीक्षिका शिल्पी सक्सेना को सीडब्ल्यूसी के समक्ष बच्ची को पेश करने और जानकारी देने को बुलाया गया।
गोद लेने और वापसी की भी नहीं दी सूचना
इसे लेकर कई बार नोटिस भेजा गया। तब जाकर शनिवार को बालगृह की ओर से सुनीता के खिलाफ मासूम को मारने-पीटने व एडॉप्शन के नियमों को खिलाफ बच्ची का उत्पीड़न करने का मुकदमा दर्ज कराया गया। इंस्पेक्टर नाका के मुताबिक सुनीता ने 2018 में बच्ची को गोद लिया था।
हालांकि, मई 2019 में वह उसे बालगृह वापस छोड़ गई। पूछताछ में चला कि सुनीता मासूम से घर के काम कराती थी और विरोध पर बेरहमी से पीटती और भूखा रखती थी।
सुधा रानी ने बताया कि बच्ची के गोद लेने और उसकी वापसी को लेकर कोई सूचना सीडब्लूसी को नहीं दी गई। जांच से मिली जानकारी के मुताबिक एडॉप्शन नियमों के विरुद्ध पाया गया। बाल कल्याण समिति ने बालगृह को दत्तकगृह की अधीक्षिका पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए है।
गोद लेने के नियम कानून
जेजे एक्ट कानून के तहत एडॉप्शन व बच्चों की वापसी को लेकर बालगृह की जिम्मेदारी है कि स्थानीय सीडब्ल्यूसी को अवगत कराए। साथ ही सीडब्ल्यूसी के माध्यम से ही बच्चे का एडॉप्शन किया जाए या फिर उसकी वापसी की जाए। सीडब्ल्यूसी के मुताबिक कोई बच्चा अगर किन्हीं कारणों से परिवार के साथ घुल-मिल नहीं पा रहा है और उसे परिवार संस्था में पुन: देना चाहता है तो जिला प्रोबेशन अधिकारी, डीसीपीओ व बाल कल्याण समिति को सूचित करना होता है।
नहीं की तुरंत कार्रवाई
बाल कल्याण समिति के अगस्त में दिए निर्देश पर भी लीलावती मुंशी बालगृह ने तुरंत कार्रवाई नहीं की। दत्तक गृह इकाई की अधीक्षिका शिल्पी ने 13 मई को लौटी बच्ची को बिना किसी को सूचित किए अपने पास रखा था। वहीं, उसे सीडब्लूसी के समक्ष भी नहीं पेश किया।