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Lucknow News: अधूरी नींद दिल पर पड़ सकती है भारी

Fri, 13 Mar 2026 02:38 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 02:38 AM IST
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Lack of sleep can be heavy on the heart
कार्यक्रम में जुटे चिकित्सक।
लखनऊ। नींद पूरी न होना सेहत पर भारी पड़ सकती है। दिल का दौरा तक पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। 20 से 30 प्रतिशत लोग नींद संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। यह जानकारी केजीएमयू पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने दी।
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वह बृहस्पतिवार को स्लीप डे के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि अच्छी नींद से बेहतर जीवन जिया जा सकता है। नींद में दिक्कत से दिल संबंधी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। बेकाबू शुगर, बीपी, मोटापा हो सकता है। लगातार नींद में खलल से दिल की गंभीर बीमारी हो सकती है। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत वयस्क अनिद्रा संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। सात प्रतिशत वयस्क मोटापे की चपेट में हैं। जो नींद संबंधी बीमारी का बड़ा कारण है।
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10 करोड़ लोग ओएसए से ग्रसित
खर्राटे एवं निद्रा संबंधी रोग देश-दुनिया में काफी बड़ी समस्या हैं। हमारे देश में 40 प्रतिशत वयस्क पुरुष, 20 प्रतिशत वयस्क महिलाएं और 10 प्रतिशत बच्चों को खर्राटे आते हैं। देश में लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोग खर्राटों के कारण होने वाली ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) से पीड़ित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आज इसके संबंध में एक संस्था स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी की स्थापना की गई है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत को चुना गया। राष्ट्रीय सचिव के रूप में हिंदी मेडिकल साइंसेस, अयोध्या रोड, बाराबंकी की डॉ. श्वेता कंचन को चुना गया। केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की डॉ. ज्योति बाजपेई को उपाध्यक्ष एवं डॉ. अंकित कुमार को कोषाध्यक्ष के पद पर चुना गया।
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80 प्रतिशत को नहीं पता चलते लक्षण

लोहिया संस्थान में स्लीप डे पर हुई कार्यशाला में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय वर्मा ने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत नींद संबंधी बीमारी से पीड़ितों को शुरुआत में लक्षण नजर नहीं आते हैं। चार से पांच प्रतिशत वयस्क निद्रा के अन्य विकार जैसे नींद में चलना जैसी समस्या की चपेट में हैं। अच्छी नींद तंदुरुस्ती बढ़ाती है। खराब नींद शरीर और मन के लगभग सभी पहलुओं पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

कार्यक्रम में जुटे चिकित्सक।

कार्यक्रम में जुटे चिकित्सक।

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