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loksabha election : कांग्रेस चुनाव में सपा के साथ जाएगी या बसपा के, जानिए क्या-क्या बन सकते हैं समीकरण
Tue, 11 Jul 2023 06:18 AM IST
रोहित मिश्र
अजीत बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 11 Jul 2023 06:18 AM IST
सार
लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटों वाले यूपी में राजनीतिक उठा-पटक भी सबसे ज्यादा देखने को मिल सकते हैं। विपक्ष गठबंधन का ऊंट किस करवट बैठेगा यह देखना अभी बाकी है।
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अखिलेश राहुल क्या फिर मिलेंगे?
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विपक्षी गठबंधन के अपने-अपने समीकरण हैं। लोकसभा चुनाव से पहले सपा जहां राष्ट्रीय फलक पर मजबूत मौजूदगी का संदेश देना चाहती है, वहीं कांग्रेस यूपी में खड़ा होना चाहती है। बाकी दल भी नफा-नुकसान का आकलन कर आगे बढ़ रहे हैं। जनादेश के जरिये जीत-हार से पहले सभी मनोवैज्ञानिक तौर पर जंग जीतने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
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विपक्षी दलों की दूसरी बड़ी बैठक 17-18 जुलाई को बंगलुरू में होगी। जून में पटना में हुई पहली बैठक की मेजबानी जहां जदयू-राजद गठबंधन ने की थी, वहीं दूसरी बैठक की मेजबानी कांग्रेस कर रही है। पटना में तय हुआ था कि अगली बैठक 11-12 जुलाई को शिमला में होगी, लेकिन कई राजनीतिक व व्यावहारिक कारणों के चलते इस बैठक की तिथि आगे बढ़ाई गई। माना जा रहा है कि दूसरी बैठक में विपक्षी गठबंधन का नाम और उसके संयोजक का नाम तय हो सकता है।
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विपक्षी गठबंधन के कई सहयोगियों के इधर-उधर छिटकने की चर्चाएं इधर काफी गरम हैं, लेकिन माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में इस गठबंधन की मजबूत बुनियाद के रूप में सपा और कांग्रेस रहेंगे। कांग्रेस के एक जिम्मेदारी पदाधिकारी ने यहां व्यक्तिगत बातचीत में दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कैंप बसपा को साथ लाने का भी प्रयास कर रहा है। कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि विपक्षी गठबंधन के पक्ष में बयार बहती हुई दिखी तो ऐन वक्त पर बसपा का साथ आना संभव हो सकता है।
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राष्ट्रीय स्तर पर मौजूदगी का अहसास कराना भी जरूरी
सपा चाहती है कि उसकी पहचान भी राष्ट्रीय स्तर की हो
- फोटो : amar ujala
समकालीन यूपी के विश्लेषक और जेएनयू के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. रवि श्रीवास्तव कहते हैं कि वर्ष 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव और वर्ष 2017 व 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा काफी मजबूत होकर उभरी है। भाजपा गठबंधन को कारगर चुनावी रणनीति बनाकर ही चुनौती दी जा सकती है। कांग्रेस यूपी में तो जमीन खो चुकी है, लेकिन उसने कर्नाटक और हिमाचल चुनाव जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संदेश देने का काम किया है।
वहीं, लगातार चार चुनाव हार चुकी सपा की कोशिश है कि वह अपने आधार वोट को यह भरोसा दिलाए कि राष्ट्रीय स्तर पर किसी मजबूत विकल्प का हिस्सा है। यानी चुनाव में हार-जीत का फैसला होने से पहले राजनीतिक पार्टियों के लिए मतदाताओं को अपनी मजबूती का अहसास कराना भी रणनीति का हिस्सा है। यही कारण हैं कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस और सपा नजदीक आते हुए दिख रहे हैं।
वहीं, लगातार चार चुनाव हार चुकी सपा की कोशिश है कि वह अपने आधार वोट को यह भरोसा दिलाए कि राष्ट्रीय स्तर पर किसी मजबूत विकल्प का हिस्सा है। यानी चुनाव में हार-जीत का फैसला होने से पहले राजनीतिक पार्टियों के लिए मतदाताओं को अपनी मजबूती का अहसास कराना भी रणनीति का हिस्सा है। यही कारण हैं कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस और सपा नजदीक आते हुए दिख रहे हैं।
सपा के पास होगी केंद्र में अगली सरकार की चाभी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव।
- फोटो : amar ujala
सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप कहते हैं कि हमारी पार्टी का मत प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। अगले लोकसभा चुनाव में गठबंधन के लिहाज से राष्ट्रीय प्रयासों का सपा भी हिस्सा है, जिसके परिणाम भी जल्द सामने आएंगे। लेकिन, इतना जरूर कह सकते हैं कि केंद्र में अगली सरकार के गठन की चाभी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के हाथ में होगी।
हाईकमान पर निर्भर : खाबरी
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी कहते हैं कि वर्तमान में कांग्रेस सभी 80 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए गठबंधन पर फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व ही लेगा और तब जैसा हाईकमान का निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा।
हाईकमान पर निर्भर : खाबरी
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी कहते हैं कि वर्तमान में कांग्रेस सभी 80 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए गठबंधन पर फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व ही लेगा और तब जैसा हाईकमान का निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा।