जानें, यूपी में सोशल इंजीनियरिंग पर कैसे काम कर रही है भाजपा
सूबे के चुनावी समर की तैयारी में जुटी भाजपा जीत की खातिर कोई कोर-कसर नहीं उठा रखना चाहती है। पार्टी के रणनीतिकारों ने इसी सिलसिले में अलग-अलग जातियों के बीच पूजे जाने वाले महापुरुषों का भी सहारा लेने का फैसला किया है।
हालांकि इस रणनीति पर भाजपा सीधे काम नहीं करेगी बल्कि उस समाज से जुड़े किसी संगठन को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। पर, किसी प्रमुख नेता या केंद्रीय मंत्री को इन कार्यक्रमों में भेजकर भाजपा उस समाज के महापुरुष के प्रति आदरभाव दिखाएगी और प्रदेश में सरकार बनने पर महत्व देने का संदेश देकर उन्हें साधने की कोशिश करेगी।
माना जाता है कि भगवा रणनीतिकारों की इस योजना के पीछे सूबे के सामाजिक समीकरण हैं। भाजपा महापुरुषों के जरिये इन समीकरणों को साधकर सत्ता की राह आसान बनाना चाहती है। राजनीतिक समीक्षकों के अनुसार, रणनीतिकारों ने काफी सोच-समझकर इन कार्यक्रमों को सीधे अपने हाथ में न लेकर अलग-अलग संगठनों के सहारे एजेंडे को धार देने की रणनीति बनाई है।
दरअसल, रणनीतिकार जानते हैं कि इस तरह के कार्यक्रम अगर पार्टी की तरफ से आयोजित किए गए तो उनका वैसा संदेश नहीं जाएगा जो उस समाज से जुड़े संगठन की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर बात कहने से जाएगा।
इस एजेंडे पर इस तरह काम कर रही है भाजपा
वैसे, भाजपा इस एजेंडे पर फरवरी से ही काम शुरू कर चुकी है। इसमें संत रविदास जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वाराणसी के संत रविदास मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करना और प्रसाद ग्रहण करना शामिल है।
अमित शाह भी फरवरी में पासी और राजभर समाज के बीच काफी महत्वपूर्ण और सम्मान पाने वाले महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा का बहराइच में अनावरण और उनकी स्मृति में आयोजित सभा में जा चुके हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर भाजपा सत्ता में आने के साथ ही सक्रिय है। पर, अब अन्य महापुरुषों के नाम और काम के सहारे भी भाजपा इस अभियान को आगे बढ़ाएगी।
इन समाज के नेताओं पर भी दे रहे ध्यान
दलितों में गैर जाटव दलित बिरादरी में भाजपा की पकड़ व पहुंच मजबूत बनाने के लिए आने वाले दिनों में भाजपा नेता महाराजा बिजली पासी और महाराजा लखना पासी जैसे महापुरुषों पर आयोजित कार्यक्रमों में पहुंचकर इनके प्रति निष्ठा दिखाएंगे।
वे देश व समाज के लिए किए गए इनके कामों का उल्लेख करके इस वर्ग को भाजपा के पक्ष में लामबंद करने की कोशिश करेंगे। वहीं, महर्षि वाल्मीकि और वीरांगना ऊदा देवी पर विभिन्न संगठनों की तरफ से होने वाले कार्यक्रमों में पार्टी नेता शामिल होंगे।
धोबी समाज को जोड़ने के लिए संत गाडगे पर कार्यक्रम आयोजित करने का खाका खींचा जा रहा है। कोरी समाज के बीच स्वाभिमान व संघर्ष का प्रतीक मानी जाने वाली झलकारी बाई पर भी कार्यक्रम होंगे।
लोधियों के बीच देवी की तरह पूजी जाने वाली अवंतीबाई लोधी व नाइयों के बीच स्वाभिमान का प्रतीक कर्पूरी ठाकुर जैसे अन्य नेता व महापुरुषों पर कार्यक्रमों का भी सहारा लेने की तैयारी है।