जब बहुगुणा बोले: 'इंदिराजी शेर की सवारी कर रही हैं उतरेंगी तो वही उन्हें खा जाएगा', पढ़ें पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपात काल लगाने पर इंदिरा गांधी से असहमति जताना हेमवती नंदन बहुगुणा को भारी पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। बहुगुणा सोच रहे थे कि अब वह शांति से जीवन व्यतीत कर सकेंगे। पर, इंदिरा गांधी ने जैसे बहुगुणा को सबक सिखाने की ही सोच ली थी।
मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी बहुगुणा को परेशान करने वाले काम होते रहे। वरिष्ठ पत्रकार रामनरेश त्रिपाठी ने संस्मरण ने लिखा है, ‘बहुगुणा ने इंदिरा गांधी से मिलने केे लिए कई बार समय मांगा, पर उन्हें समय नहीं दिया गया।
उधर, कांग्रेस में बहुगुणा का विरोधी गुट लगातार इंदिरा गांधी के कान भर रहा था। कुछ लोगों ने इंदिरा गांधी के कान भरे, ‘बहुगुणा आपके खिलाफ मध्यप्रदेश के सतना निवासी पूर्णानंद चतुर्वेदी से यज्ञ करा रहे हैं। वह आपको हटाना चाहते हैं।’ इंदिरा गांधी को भरोसा हो गया।
चुनाव में हुई इंदिरा की जबरदस्त पराजय
उन्होंने 80 वर्षीय पूर्णानंद चतुर्वेदी को उनके 20 वर्षीय दो नातियों के साथ गिरफ्तार करा लिया। बहुगुणा ने इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर कहा, ‘चतुर्वेदी जी और उनके नातियों का किसी भी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है। यह परिवार काफी प्रतिष्ठित है। इनकी गिरफ्तारी उचित नहीं है।’
बहुगुणा की पत्नी कमला बहुगुणा ने भी इंदिरा गांधी से मिलने का प्रयास किया ताकि उन्हें पूरे तथ्य बता सकें। पर, इंदिरा गांधी ने मिलने का वक्त ही नहीं दिया। इससे बहुगुणा बहुत आहत हुए और उन्होंने खुलकर कहना शुरू कर दिया, ‘इंदिरा जी शेर की सवारी कर रही हैं उतरेंगी तो वही उन्हें खा जाएगा।’ वही हुआ, आपात काल के बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी की जबरदस्त पराजय हुई।