{"_id":"647daad8191aa6180b082e68","slug":"knee-replacement-facility-starts-in-balrampur-hospital-2023-06-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow: खराब है घुटना तो बलरामपुर अस्पताल में एक लाख में बदलेगा, निजी अस्पतालों में ढाई लाख आता है खर्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow: खराब है घुटना तो बलरामपुर अस्पताल में एक लाख में बदलेगा, निजी अस्पतालों में ढाई लाख आता है खर्च
Mon, 05 Jun 2023 03:00 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 05 Jun 2023 03:00 PM IST
सार
बलरामपुर अस्पताल में घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा प्रारंभ हो गई है। इसका खर्च करीब एक लाख रुपये आएगा जबकि निजी अस्पतालों में घुटना बदलवाने का खर्च करीब ढाई लाख रुपये है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अब बलरामपुर अस्पताल में भी घुटना प्रत्यारोपण कराया जा सकता है। यहां महज एक लाख रुपये में प्रत्यारोपण हो जाएगा। अगर आपके पास आयुष्मान कार्ड है, तो प्रत्यारोपण पर कोई खर्च नहीं होगा। पहले मरीजों को केजीएमयू, लोहिया संस्थान या एसजीपीजीआई एपेक्स ट्रॉमा की दौड़ लगानी पड़ती थी, जहां मरीजों का दबाव अधिक होने से लंबा इंतजार करना पड़ता था।
विज्ञापन
बलरामपुर अस्पताल में अब तक दस मरीजों का सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में एक घुटने के प्रत्यारोपण पर करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है। घुटने का इम्प्लांट करीब 76 हजार रुपये का आता है। यह दर सरकार ने ही तय कर रखी है। इसके अलावा प्रत्यारोपण के दौरान इस्तेमाल होने वाले डिस्पोजल आइटम पर करीब दस हजार रुपये, आरी पर छह हजार समेत अन्य सामान मिलाकर करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - सपा अध्यक्ष अखिलेश व मायावती ने मुख्यमंत्री योगी को दी बधाई, इस तरह दी शुभकामनाएं
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - इमरजेंसी में कितने मरीज बचाए, मेडिकल कॉलेजों को देना होगा हिसाब, ऐसे चिकित्सा व्यवस्था सुधारेगी योगी सरकार
निजी अस्पतालों में खर्च हो जाते हैं ढाई लाख रुपये तक
शहर के कुछ बड़े निजी संस्थानों में घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा है। कॉरपोरेट हॉस्पिटल में करीब ढाई लाख में प्रत्यारोपण होता है। इसके अलावा दवाएं, बेड चार्ज व अन्य खर्चे भी आते हैं, जिससे बिल और बढ़ जाता है। ऐसे में निजी संस्थानों में सामान्य मरीज का प्रत्यारोपण कराना आसान नहीं है।
सरकारी संस्थानों में करीब सवा लाख रुपये का खर्च
केजीएमयू, लोहिया संस्थान व एसजीपीजीआई एपेक्स ट्रॉमा में एक घुटने के प्रत्यारोपण पर करीब सवा लाख का खर्च आता है। इसमें इम्प्लांट, सामान व दवाएं भी शामिल होती हैं। पर, बड़े संस्थानों में प्रत्यारोपण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह दावा करते हैं कि प्रत्यारोपण के लिए अभी कोई वेटिंग नहीं है।
20 साल तक चलता है इम्प्लांट
प्रत्यारोपण करने वाले डॉ. एपी सिंह बताते हैं कि हम जो इम्प्लांट लगाते हैं, वह निकिल, कोबाल्ट, टाइटेनियम एलॉय का बना होता है। यह इम्प्लांट एमआरआई फ्रेंडली भी होता है। यानी इसे लगवाने के बाद जरूरत पड़ने पर मरीज आसानी से एमआरआई जांच करा सकते हैं। प्रत्यारोपण के बाद यह 20 साल तक चलता है।