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लखनऊ के इस अस्पताल में भी होगा किडनी ट्रांसप्लांट

Tue, 05 Jul 2016 02:25 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 05 Jul 2016 02:25 PM IST
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kidney transplant to be start in dr ram manohar lohiya institute lucknow
डेमो - फोटो : getty images

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भी अब किडनी ट्रांसप्लांट होगा।

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शासन से हरी झंडी मिलते ही संस्थान ने इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। राजधानी में ये तीसरा चिकित्सा संस्थान होगा जहां किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी। एसजीपीजीआई में दो दशक से भी ज्यादा समय से गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा रहा है, जबकि केजीएमयू में दो साल पहले प्रत्यारोपण की शुरुआत हुई थी।
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लोहिया इंस्टीट्यूट में इस समय तीन यूरोलॉजिस्ट और एक नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। इसके साथ ही 14 बेड की किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट, आईसीयू व मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर भी है। सिर्फ कमी एक नेफ्रोलॉजिस्ट की है। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की देखभाल नेफ्रोलॉजी विभाग की जिम्मेदारी होती है। 
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नेफ्रोलॉजिस्ट मरीज के गुर्दे की कार्य प्रणाली पर नजर रखते हैं। लोहिया इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. दीपक मालवीय के अनुसार दोनों विभागों में फैकल्टी के अलावा रेजीडेंट डॉक्टर भी हैं। इससे मरीजों की 24 घंटे देखरेख हो सकती है। कोशिश की जा रही है कि अगस्त में पहला ट्रांसप्लांट किया जा सके।

इंस्टीट्यूट के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. ईश्वर राम धयाल ने बताया कि तीन मरीज और उन्हें गुर्दा देने वाले परिवार के डोनर तैयार हैं। मरीज और डोनर दोनों की सभी तरह की जांचे भी हो गई हैं। कोशिश की जाएगी कि पहला प्रत्यारोपण जल्दी ही किया जा सके।

सूबे में जितने गुर्दा रोगी प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं उनमें से महज 10 फीसदी को ही चिकित्सा संस्थान मदद कर पा रहे हैं। एसजीपीजीआई की वेबसाइट पर नजर डालें तो गुर्दा प्रत्यारोपरण की वेटिंग में 450 से अधिक नाम दर्ज हैं।

एसजीपीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण की वेटिंग में 450 से अधिक नाम दर्ज

kidney transplant to be start in dr ram manohar lohiya institute lucknow
डेमो

एसजीपीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण की क्षमता इस समय साल में 120 से 130 है। इस तरह 450 वें नंबर के मरीज के प्रत्यारोपण का नंबर साढ़े तीन साल बाद आएगा। 

ऐसे मरीज जो सरकारी संस्थानों में प्रत्यारोपण नहीं करा पाते हैं उन्हें हीमोडायलिसिस और पेरीटोनियल डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। इससे मरीज 5 से 10 साल तक जीवित रह सकता है।

गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट होना बहुत जरूरी है।  तीन-तीन बार विज्ञापन के बावजूद एक केजीएमयू अभी तक एक नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं कर पाया है।

लंबी कवायद के बाद दो नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संत पांडेय और डॉ. निखिल ने स्थायी रूप से केजीएमयू में जॉइन तो किया लेकिन डॉ. निखिल ने लगभग तीन माह पहले इस्तीफा दे दिया।  इसके चलते केजीएमयू में किडनी ट्रांसप्लांट ठप पड़ा है।

देश में मरीजों की स्थिति
1.50 लाख गुर्दा रोगी जिन्हें ट्रांसप्लांट या डायलिसिस की जरूरत
50 हजार मरीजों को ही मिल रही डायलिसिस
5 हजार मरीजों को ही प्रत्यारोपण उपलब्ध

आरएमएलआईएमएस को भी गुर्दा प्रत्यारोपण की अनुमति दे दी गई है। उन्होंने प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। निरीक्षण में सभी जरूरी मानक पूरे पाए गए थे। जल्दी ही वहां प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो जाएगी।
प्रो.वीएन त्रिपाठी
महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा

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