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महाराष्ट्र की तरह उत्तर भारत में भी होगा खरीफ प्याज उत्पादन
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महाराष्ट्र की तरह उत्तर भारत में भी होगा खरीफ प्याज उत्पादन
रोली खन्ना
अब बरसात के बाद जहां प्याज की कमी और बढ़ती कीमतें आम आदमी के आंसू नहीं निकालेगीं। वहीं, किसानों की अच्छी आमदनी भी हो सकेगी।
यह संभव होगा महाराष्ट्र की तर्ज पर उत्तर भारत में खरीफ प्याज के उत्पादन से। महाराष्ट्र के इस मॉडल को लखनऊ के कुछ गांवों में लागू किया गया था।
यह प्रयोग सफल रहा और इसका श्रेय जाता है केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा और यहां के किसानों को।
नई तकनीक के तहत काकोरी व माल के किसानों के खेतों में प्याज की फसल तैयार हो चुकी है। अब खरीफ प्याज के उत्पादन को विस्तार देने की तैयारी है, जिसकी शुरुआत आज काकोरी से होगी।
उत्तर भारत में किसान नहीं कमा पाते हैं मुनाफा
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक शैलेंद्र राजन कहते हैं कि उत्तर भारत में परंपरागत खेती में मार्च में प्याज की फसल तैयार होती है। इस वक्त बाजार में भरपूर प्याज होता है लेकिन, इसे बरसात के बाद तक के लिए भंडारित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह अधिक तापमान व नमी के कारण सड़ने लगता है। नतीजा किसान औने-पौने दाम में प्याज बेचने को मजबूर होते हैं।
महाराष्ट्र में होता है भरपूर प्याज
शैलेंद्र राजन बताते हैं कि जिस वक्त उत्तर भारत में प्याज की कमी होती है, उस वक्त महाराष्ट्र के किसान दूसरे राज्यों को प्याज आपूर्ति करके भरपूर मुनाफा कमा रहे होते हैं। इसका कारण है वहां खरीफ प्याज का होना। यह वह सीजन होता है जब उन्हें प्याज की मुंहमांगी कीमत मिलती है। यानी सात-आठ रुपये किलो बिकने वाला प्याज 25-30 रुपये किलो तक बिकता है।
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जानिए क्या है नई तकनीक
शैलेंद्र राजन ने बताया कि महाराष्ट्र की तर्ज पर ही यहां खरीफ प्याज का उत्पादन किया गया। पिछली जनवरी में प्याज उगाकर उसके छोटे-छोटे कंदों को संरक्षित कर लिया था। बरसात के खत्म होने से पहले ही इन कंदों की अगस्त में रोपाई कर दी गई। ये फसल नवंबर-दिसंबर में तैयार हो गई।
दोगुना लाभ, प्याज का आकार भी बड़ा
इस तकनीक से सफलतापूर्वक प्याज उगाने वाले किसान राजेश पुष्कर कहते हैं कि मुनाफा न मिलने से प्याज की खेती बंद कर दी थी। संस्थान के कहने पर खरीफ प्याज की फसल लगाई। इस प्याज का आकार बड़ा है। अब लग रहा है कि यदि इस तकनीक को अपनाया जाए तो दो सीजन में प्याज होंगे और अच्छी कीमत मिलेगी।
शुरुआत अनुसूचित जाति के 40 किसानों से
शैलेंद्र राजन ने बताया कि योजना के तहत काकोरी व माल ब्लाक के अनुसूचित वर्ग के 40 किसानों को इसके लिए चुना जाएगा, जिन्हें नि:शुल्क तकनीक दी जाएगी। इस तकनीक के बारे में बताने के लिए ही काकोरी के काकराबाद में समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इच्छुक किसान को खरीफ प्याज के सेट उत्पादन के लिए उपयुक्त किस्म के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। परंपरागत व नई तकनीक से खेती में लागत के अंतर का आकलन अगले चरण में करेंगे।
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रोली खन्ना
अब बरसात के बाद जहां प्याज की कमी और बढ़ती कीमतें आम आदमी के आंसू नहीं निकालेगीं। वहीं, किसानों की अच्छी आमदनी भी हो सकेगी।
यह संभव होगा महाराष्ट्र की तर्ज पर उत्तर भारत में खरीफ प्याज के उत्पादन से। महाराष्ट्र के इस मॉडल को लखनऊ के कुछ गांवों में लागू किया गया था।
यह प्रयोग सफल रहा और इसका श्रेय जाता है केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा और यहां के किसानों को।
नई तकनीक के तहत काकोरी व माल के किसानों के खेतों में प्याज की फसल तैयार हो चुकी है। अब खरीफ प्याज के उत्पादन को विस्तार देने की तैयारी है, जिसकी शुरुआत आज काकोरी से होगी।
उत्तर भारत में किसान नहीं कमा पाते हैं मुनाफा
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक शैलेंद्र राजन कहते हैं कि उत्तर भारत में परंपरागत खेती में मार्च में प्याज की फसल तैयार होती है। इस वक्त बाजार में भरपूर प्याज होता है लेकिन, इसे बरसात के बाद तक के लिए भंडारित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह अधिक तापमान व नमी के कारण सड़ने लगता है। नतीजा किसान औने-पौने दाम में प्याज बेचने को मजबूर होते हैं।
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महाराष्ट्र में होता है भरपूर प्याज
शैलेंद्र राजन बताते हैं कि जिस वक्त उत्तर भारत में प्याज की कमी होती है, उस वक्त महाराष्ट्र के किसान दूसरे राज्यों को प्याज आपूर्ति करके भरपूर मुनाफा कमा रहे होते हैं। इसका कारण है वहां खरीफ प्याज का होना। यह वह सीजन होता है जब उन्हें प्याज की मुंहमांगी कीमत मिलती है। यानी सात-आठ रुपये किलो बिकने वाला प्याज 25-30 रुपये किलो तक बिकता है।
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जानिए क्या है नई तकनीक
शैलेंद्र राजन ने बताया कि महाराष्ट्र की तर्ज पर ही यहां खरीफ प्याज का उत्पादन किया गया। पिछली जनवरी में प्याज उगाकर उसके छोटे-छोटे कंदों को संरक्षित कर लिया था। बरसात के खत्म होने से पहले ही इन कंदों की अगस्त में रोपाई कर दी गई। ये फसल नवंबर-दिसंबर में तैयार हो गई।
दोगुना लाभ, प्याज का आकार भी बड़ा
इस तकनीक से सफलतापूर्वक प्याज उगाने वाले किसान राजेश पुष्कर कहते हैं कि मुनाफा न मिलने से प्याज की खेती बंद कर दी थी। संस्थान के कहने पर खरीफ प्याज की फसल लगाई। इस प्याज का आकार बड़ा है। अब लग रहा है कि यदि इस तकनीक को अपनाया जाए तो दो सीजन में प्याज होंगे और अच्छी कीमत मिलेगी।
शुरुआत अनुसूचित जाति के 40 किसानों से
शैलेंद्र राजन ने बताया कि योजना के तहत काकोरी व माल ब्लाक के अनुसूचित वर्ग के 40 किसानों को इसके लिए चुना जाएगा, जिन्हें नि:शुल्क तकनीक दी जाएगी। इस तकनीक के बारे में बताने के लिए ही काकोरी के काकराबाद में समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इच्छुक किसान को खरीफ प्याज के सेट उत्पादन के लिए उपयुक्त किस्म के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। परंपरागत व नई तकनीक से खेती में लागत के अंतर का आकलन अगले चरण में करेंगे।