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Lucknow News: केजीएमयू में मिर्गी और मानसिक विकारों की होगी सटीक जांच
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लखनऊ। केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों के मिर्गी और अन्य मानसिक विकारों की सटीक जांच अब उनके बेड पर ही संभव हो सकेगी।
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, न्यूरोलाॅजी विभाग में तमाम प्रकार के मानसिक विकार वाले रोगी भर्ती होते हैं। इनकी जांच के लिए अलग स्थान पर ले जाना पड़ता है। मिर्गी या फिर तंत्रिका संबंधी अन्य समस्याओं की जांच इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) मशीन से संभव होती है। कई बार मरीजों को लेकर जाना मुश्किल होता है। इसको देखते हुए 23.5 लाख रुपये से ईईजी मशीन खरीदी जा रही है। इसे मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही विभाग में यह मशीन लग जाएगी।
ईईजी मशीन मस्तिष्क की गतिविधि और वीडियो को एक साथ रिकॉर्ड करता है। यह तकनीक दौरे के उपचार और प्रबंधन के लिए विशेष उपयोगी है। इसमें मस्तिष्क की तरंगों की गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए रोगी की खोपड़ी पर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। ईईजी डेटा और वीडियो को एक पोर्टेबल डिवाइस से रिकॉर्ड किया जाता है। ये बेहद हल्की होती हैं और इन्हें व्यक्ति पहनकर घूम भी सकता है। एक बार रिकाॅर्डिंग होने के बाद उनका विश्लेषण किया जाता है।
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केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, न्यूरोलाॅजी विभाग में तमाम प्रकार के मानसिक विकार वाले रोगी भर्ती होते हैं। इनकी जांच के लिए अलग स्थान पर ले जाना पड़ता है। मिर्गी या फिर तंत्रिका संबंधी अन्य समस्याओं की जांच इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) मशीन से संभव होती है। कई बार मरीजों को लेकर जाना मुश्किल होता है। इसको देखते हुए 23.5 लाख रुपये से ईईजी मशीन खरीदी जा रही है। इसे मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही विभाग में यह मशीन लग जाएगी।
ईईजी मशीन मस्तिष्क की गतिविधि और वीडियो को एक साथ रिकॉर्ड करता है। यह तकनीक दौरे के उपचार और प्रबंधन के लिए विशेष उपयोगी है। इसमें मस्तिष्क की तरंगों की गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए रोगी की खोपड़ी पर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। ईईजी डेटा और वीडियो को एक पोर्टेबल डिवाइस से रिकॉर्ड किया जाता है। ये बेहद हल्की होती हैं और इन्हें व्यक्ति पहनकर घूम भी सकता है। एक बार रिकाॅर्डिंग होने के बाद उनका विश्लेषण किया जाता है।
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