{"_id":"692a0f6fade30afd700edc81","slug":"kgmu-will-conduct-an-inquiry-into-the-matter-of-writing-an-external-examination-lucknow-news-c-13-lko1070-1492318-2025-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: बाहर से जांच लिखने के मामले में केजीएमयू कराएगा जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: बाहर से जांच लिखने के मामले में केजीएमयू कराएगा जांच
विज्ञापन
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ।
लखनऊ। केजीएमयू प्रशासन ने खून संबंधी जांच के लिए मरीजों को निजी सेंटरों पर भेजने के मामले में जांच समिति बना दी है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में डॉक्टरों के निजी लैब का नाम सुझाकर मरीजों को बाहर भेजने का मामला उजागर होने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
केजीएमयू के पास निजी संस्थानों से कहीं ज्यादा मशीनें और संसाधन मौजूद हैं। ज्यादातर जांच पीपीपी मॉडल पर ही होती हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों और निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की मिलीभगत से मरीजों को बाहर भेजा जा रहा है। रोजाना करीब आठ हजार ओपीडी मरीज और चार हजार से ज्यादा भर्ती मरीजों के चलते यहां 10-15 हजार जांच होती हैं, जिसका फायदा निजी सेंटर उठाते हैं। अब इस चेन में केजीएमयू के डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आने लगी है।
प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, जांच समिति गठित की जा रही है और आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
नवजात की जांच के लिए काटने पड़ते हैं चक्कर
क्वीन मेरी अस्पताल में सैंपल कलेक्शन की व्यवस्था होने के बावजूद नवजातों की जांच ट्रॉमा सेंटर या बड़ी पैथोलॉजी पर भेजी जा रही हैं, जबकि सभी आवश्यक जांच क्वीन मेरी में ही संभव हैं। इससे परिजनों को अनावश्यक चक्कर काटने पड़ते हैं।
विज्ञापन
फीस का गणित : बढ़ रही मनमानी
केजीएमयू में खून संबंधी जांच निजी एजेंसी के माध्यम से होती हैं, जिसमें वसूली गई फीस का आधा हिस्सा एजेंसी और आधा केजीएमयू को मिलता है। यही मॉडल जांच दरें बढ़ा देता है। अगर संस्थान खुद जांच करे तो फीस काफी कम हो सकती है। निजी सेंटरों की तुलना में मामूली फीस अंतर भी मरीजों को आसानी से बाहरी लैब की ओर खींच लेता है।
विज्ञापन
केजीएमयू के पास निजी संस्थानों से कहीं ज्यादा मशीनें और संसाधन मौजूद हैं। ज्यादातर जांच पीपीपी मॉडल पर ही होती हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों और निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की मिलीभगत से मरीजों को बाहर भेजा जा रहा है। रोजाना करीब आठ हजार ओपीडी मरीज और चार हजार से ज्यादा भर्ती मरीजों के चलते यहां 10-15 हजार जांच होती हैं, जिसका फायदा निजी सेंटर उठाते हैं। अब इस चेन में केजीएमयू के डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आने लगी है।
विज्ञापन
प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, जांच समिति गठित की जा रही है और आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
नवजात की जांच के लिए काटने पड़ते हैं चक्कर
क्वीन मेरी अस्पताल में सैंपल कलेक्शन की व्यवस्था होने के बावजूद नवजातों की जांच ट्रॉमा सेंटर या बड़ी पैथोलॉजी पर भेजी जा रही हैं, जबकि सभी आवश्यक जांच क्वीन मेरी में ही संभव हैं। इससे परिजनों को अनावश्यक चक्कर काटने पड़ते हैं।
विज्ञापन
फीस का गणित : बढ़ रही मनमानी
केजीएमयू में खून संबंधी जांच निजी एजेंसी के माध्यम से होती हैं, जिसमें वसूली गई फीस का आधा हिस्सा एजेंसी और आधा केजीएमयू को मिलता है। यही मॉडल जांच दरें बढ़ा देता है। अगर संस्थान खुद जांच करे तो फीस काफी कम हो सकती है। निजी सेंटरों की तुलना में मामूली फीस अंतर भी मरीजों को आसानी से बाहरी लैब की ओर खींच लेता है।