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UP: मांसाहारी माताओंं के दूध में साढ़े तीन गुना जयादा कीटनाशक, केजीएमयू के अध्ययन का दावा

Sun, 15 Jan 2023 11:09 AM IST
शाहरुख खान सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 15 Jan 2023 11:09 AM IST
सार

केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) में हुए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। इंवायरमेंटल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित शोध डॉ. नैना द्विवेदी, प्रो. अब्बास अली महदी और प्रो. सुजाता देव ने किया है। प्रोफेसर सुजाता देव ने बताया कि खान-पान का हम पर असर पड़ना आम बात है। हम यह पता लगाना चाहते थे कि क्या स्तनपान से शिशुओं में भी कीटनाशक पहुंचता है। 

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KGMU study claims three and a half times more pesticides in the milk of non-vegetarian mothers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujal

विस्तार

खाने-पीने की वस्तुओं में कीटनाशक के अंधाधुंध उपयोग से नवजात भी अछूते नहीं हैं। मां के दूध से इनमें जन्म के साथ ही पेस्टीसाइड व केमिकल पहुंच रहे हैं। मांसाहार करने वाली महिलाओं के मामले में स्थिति और खतरनाक है। शाकाहारी माताओं के मुकाबले इनके दूध से शिशुओं में जाने वाले पेस्टीसाइड की मात्रा साढ़े तीन गुना ज्यादा है। 
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केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) में हुए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। इंवायरमेंटल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित शोध डॉ. नैना द्विवेदी, प्रो. अब्बास अली महदी और प्रो. सुजाता देव ने किया है। प्रोफेसर सुजाता देव ने बताया कि खान-पान का हम पर असर पड़ना आम बात है। हम यह पता लगाना चाहते थे कि क्या स्तनपान से शिशुओं में भी कीटनाशक पहुंचता है। 
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इसके लिए विभाग में आईं 130 महिलाओं पर अध्ययन किया गया। इनमें करीब एक तिहाई करने वाली थीं। प्रसव के बाद लिए गए महिलाओं के दूध में पेस्टीसाइड का प्रभाव मिला। मांसाहार करने वाली महिलाओं के दूध में कीटनाशक की मात्रा साढ़े तीन गुना तक ज्यादा मिली। इसी तरह अधिक उम्र में मां बनने वाली और समय से पहले प्रसव वाली माताओं के दूध में कीटनाशक का प्रभाव सामान्य महिलाओं के मुकाबले कई गुना ज्यादा मिला।
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कीटनाशक को लेकर गाइडलाइन नहीं
प्रो. सुजाता के अनुसार दुर्भाग्य है कि अभी भी अपने यहां कीटनाशक के उपयोग से संबंधित गाइडलाइन नहीं है। किसान मनमानी तरीके और मनचाही मात्रा में इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। फसलों की ज्यादा पैदावार और कीड़ों से रखवाली के लिए बाजार में जो कीटनाशक हैं, उनके लिए कोई मानक नहीं हैं। यही कीटनाशक खाने के माध्यम से हमारे और बच्चों में पहुंच रहे हैं।
 

कीटनाशक के प्रकार पर निर्भर है दुष्प्रभाव
केजीएमयू के फॉरेंसिक एंड टॉक्सोलॉजी विभाग की डॉ. शिऊली राठौर ने बताया कि कोई भी कीटनाशक या रसायन हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इनका प्रभाव दो तरह से होता है। पहले में इसका असर तुरंत दिखाई देता है। दूसरे में धीरे-धीरे ये पदार्थ शरीर में जमा होते हैं और बाद में इनका प्रभाव दिखता है। 

डॉ. शिऊली के अनुसार आमतौर पर चिकन या अन्य जानवरों का वजन, आकार बढ़ाने के लिए जो इंजेक्शन दिए जाते हैं वे हॉर्मोनल होते हैं। मांस में कीटनाशक और रसायन की मौजूदगी पर कोई टिप्पणी विशिष्ट शोध के बाद ही की जा सकती है।
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