लाइट घोटाले में केजीएमयू का जेई निलंबित, पुलिस नहीं दर्ज कर रही रिपोर्ट
केजीएमयू में लाइट घोटाले के आरोपी जूनियर इंजीनियर विद्युत एसपी सिंह को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एक्सईएन परितोष कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया है। केजीएमयू प्रशासन ने पूरे मामले में एसपी सिंह सहित पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए चौक कोतवाली में तहरीर दी है।
मालूम हो कि केजीएमयू में पांच अक्तूबर को ट्रक पकड़ा गया था। इस पर जनरेटर व लाइटों के बंद पैकेट लदे थे। प्रशासन ने चार सदस्य जांच कमेटी बनाई तो सामने आया कि ये लाइटें यूपी नेडा से आई थीं। इन्हें परिसर में लगाया ही नहीं गया। काफी दिन तक रखी रहीं और अब बाहर भेजा जा रहा था।
यूपी नेडा और केजीएमयू की टीम ने संयुक्त रूप से जांच की तो पता चला कि केजीएमयू को 2646 पैकेट लाइटें उपलब्ध कराई गई। इसमें 900 पैकेट ट्रक में लदी हुई थीं। अन्य लाइटें भी परिसर में नहीं लगी है। पूरे मामले में बड़े घोटाले की बात भी सामने आ रही है।
जांच के दौरान यह भी बात सामने आई है कि केजीएमयू में करीब 90 लाख की लाइटें आई थी, जिसमें अभी तक सिर्फ 10 लाइट लगी हैं। अन्य के बारे में नेडा की टीम जांच कर रही है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर केजीएमयू प्रशासन ने जूनियर इंजीनियर विद्युत एसपी सिंह को निलंबित कर दिया है। पूरे मामले में अनुशासनात्मक रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी एक्सईएन परितोष सिंह को सौंपी गई है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि जल्द से जल्द पूरे मामले में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
नए सिरे से केजीएमयू प्रशासन ने दी तहरीर
केजीएमयू प्रशासन ने चौक कोतवाली में भी तहरीर दी। पुलिस ने जांच की बात कहकर रिपोर्ट नहीं दर्ज की। अब नए सिरे से केजीएमयू प्रशासन ने तहरीर दी है। इसमें जेई एसपी सिंह, सामान लगवाने वाले, तीन संविदा कर्मचारियों के नाम है। हालांकि, देर शाम तक रिपोर्ट नहीं दर्ज की थी।
ट्रक पकड़े जाने के बाद अमर उजाला ने इसे मुद्दा बनाया। आशंका जताई कि लाखों रुपयों का गोलमाल हुआ है। छह अक्तूबर को माई सिटी में ‘केजीएमयू में गुपचुप भेज रहे थे 30 लाख का माल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर घोटाले का खुलासा किया था। आठ अक्तूबर को ‘केजीएमयू में दागियों पर अफसर मेहरबान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर बताया गया कि किस तरह से पहले भी आरोपी इंजीनियर विभिन्न मामलों में संलिप्त रहे हैं।
इसके बावजूद अधिकारी मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। 11 अक्तूबर को ‘केजीएमयू : पूरी लाइटें नहीं लगाई, फिर भी कर दिया लाखों का भुगतान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर बताया गया कि किस तरह बिना लाइट लगाए ही भुगतान कर दिया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि लोहिया संस्थान, आईआईटी ऑफिस, जल निगम ऑफिस सहित सात जगह लाइट लगाई गई हैं। इस पर नेडा की टीम भी अलग से जांच कर रही है।