{"_id":"6a3eea2d30ac88e1f306e63e","slug":"kgmu-drug-scam-investigation-stalled-lucknow-news-c-13-lko1096-1801504-2026-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: केजीएमयू में दवा घोटाले की जांच अटकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: केजीएमयू में दवा घोटाले की जांच अटकी
विज्ञापन
केजीएमयू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। केजीएमयू में सवा करोड़ रुपये से अधिक के दवा खरीद घोटाले की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है। कमेटी अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत दवाओं की खरीद में अनियमितताएं सामने आने के बाद यह जांच शुरू हुई थी। हालांकि, लंबे समय बाद भी जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय नहीं हो पाई है और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई हुई है।
घोटाले में कैंसर, आयरन और प्रोटीन जैसी महंगी दवाएं खरीदी गईं। आरोप है कि मरीजों के यूएचआईडी नंबर का उपयोग कर दवाओं की कालाबाजारी के साथ मृत मरीजों के नाम पर भी दवाएं खरीदी गई थीं। कुछ ऐसे मरीजों के योजना कार्ड से लाखों रुपये की कैंसर दवाएं खरीदी गईं, जिन्हें कैंसर नहीं था। केजीएमयू प्रशासन ने घपला उजागर होने के बाद जांच शुरू की। एक डॉक्टर से दो से अधिक बार पूछताछ की गई और बयान भी दर्ज किए गए। इसके बावजूद डॉक्टर की जिम्मेदारी तय नहीं हुई। इससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
कार्रवाई और वसूली की स्थिति
जांच में मैनपावर एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी। तीन संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था। विभागाध्यक्ष को पद से हटाया गया और एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित किया गया। बर्खास्त संविदा कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। मैनपावर एजेंसी से वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन दो हफ्ते से अधिक समय बीतने के बाद भी एक भी रुपया वसूला नहीं जा सका है।
विज्ञापन
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष को दोबारा नोटिस
केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में भी मरीजों को बाहर से लेंस और दवाएं लिखने का मामला सामने आया था। इस मामले में विभागाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जांच समिति पहले जारी किए गए नोटिस के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। कुलपति ने विभागाध्यक्ष को दोबारा नोटिस जारी कर दस दिन के भीतर स्पष्ट जवाब मांगा है। उनसे पूछा गया है कि स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के बावजूद मरीजों को निजी दुकानों से सामान क्यों लेना पड़ा।
विज्ञापन
घोटाले में कैंसर, आयरन और प्रोटीन जैसी महंगी दवाएं खरीदी गईं। आरोप है कि मरीजों के यूएचआईडी नंबर का उपयोग कर दवाओं की कालाबाजारी के साथ मृत मरीजों के नाम पर भी दवाएं खरीदी गई थीं। कुछ ऐसे मरीजों के योजना कार्ड से लाखों रुपये की कैंसर दवाएं खरीदी गईं, जिन्हें कैंसर नहीं था। केजीएमयू प्रशासन ने घपला उजागर होने के बाद जांच शुरू की। एक डॉक्टर से दो से अधिक बार पूछताछ की गई और बयान भी दर्ज किए गए। इसके बावजूद डॉक्टर की जिम्मेदारी तय नहीं हुई। इससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
कार्रवाई और वसूली की स्थिति
जांच में मैनपावर एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी। तीन संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था। विभागाध्यक्ष को पद से हटाया गया और एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित किया गया। बर्खास्त संविदा कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। मैनपावर एजेंसी से वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन दो हफ्ते से अधिक समय बीतने के बाद भी एक भी रुपया वसूला नहीं जा सका है।
विज्ञापन
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष को दोबारा नोटिस
केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में भी मरीजों को बाहर से लेंस और दवाएं लिखने का मामला सामने आया था। इस मामले में विभागाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जांच समिति पहले जारी किए गए नोटिस के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। कुलपति ने विभागाध्यक्ष को दोबारा नोटिस जारी कर दस दिन के भीतर स्पष्ट जवाब मांगा है। उनसे पूछा गया है कि स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के बावजूद मरीजों को निजी दुकानों से सामान क्यों लेना पड़ा।