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केजीएमयू में थायराइड व मधुमेह के इलाज पर संकट
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मेडिकल इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के एकमात्र एसोसिएट प्रोफेसर का इस्तीफा, केजीएमयू में थाइरॉइड व मधुमेह के इलाज पर संकट
केजीएमयू में मधुमेह, थायरॉइड, बच्चों में होने वाली ग्रोथ डिसऑर्डर, मेटाबॉलिक बोन डिजीज और पुरुषों में होने वाली फर्टिलिटी संबंधी बीमारियों का इलाज मुश्किल हो जाएगा। मेडिकल इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के एक मात्र एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मधुकर मित्तल ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में यह विभाग बंदी के कगार पर पहुंच गया है। हालांकि इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो केजीएमयू प्रशासन उन्हें मनाने में लगा है, लेकिन वह लौटने को तैयार नहीं हैं।
इन मरीजों की बढे़ंगी मुश्किलें : सप्ताह में दो दिन चलने वाली मेडिसिन इंडोक्राइनोलॉजी विभाग की हर ओपीडी में आठ सौ से एक हजार मरीज पहुंचते रहे हैं। यहां पूरे प्रदेश के मरीज होते हैं। नेपाल, मध्य प्रदेश के भी तमाम मरीज यहां आते रहे हैं। वहीं दूसरे विभागों के साथ ही क्वीनमेरी से भी महिलाओं को हार्मोनल डिजीज में परामर्श लेने के लिए डॉ. मित्तल के पास रेफर किया जाता है। डॉ. मित्तल के जाने के बाद इन मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
अब पीजीआई एक मात्र विकल्प
सिविल, लोहिया और बलरामपुर अस्पताल में मेडिकल इंडोक्राइनोलॉजी का कोई चिकित्सक नहीं है। लोहिया संस्थान में सिर्फ एक डॉक्टर हैं। ऐसे में मरीजों के पास एक मात्र विकल्प एसजीपीजीआई बचता है, लेकिन वहां एक दिन में सिर्फ 40 मरीज देखे जाते हैं।
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...इसलिए तो नहीं दिया इस्तीफा
मेडिकल इंडोक्राइनोलॉजी विभाग में दो सीनियर रेजीडेंट हैं। विभाग के पास 30 बेड हैं। हालांकि अभी तक इस विभाग को नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिल पाया है। इस वजह से यहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा था। डॉ. मित्तल लगातार इसके लिए प्रयास कर रहे थे। उनकी ओपीडी में आने वाले तमाम मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें भर्ती किया जाना जरूरी थी। व्यवस्थाएं न मिलना भी डॉ. मित्तल के इस्तीफे की एक वजह बताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में डॉ. मित्तल ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
निजी कारणों से दिया इस्तीफा
डॉ. मधुकर मित्तल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया है। केजीएमयू प्रशासन इस्तीफे पर विचार करेगा। फिर उसे कार्यपरिषद में रखा जाएगा। अभी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है।
-राजेश कुमार राय, कुलसचिव, केजीएमयू
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केजीएमयू में मधुमेह, थायरॉइड, बच्चों में होने वाली ग्रोथ डिसऑर्डर, मेटाबॉलिक बोन डिजीज और पुरुषों में होने वाली फर्टिलिटी संबंधी बीमारियों का इलाज मुश्किल हो जाएगा। मेडिकल इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के एक मात्र एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मधुकर मित्तल ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में यह विभाग बंदी के कगार पर पहुंच गया है। हालांकि इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो केजीएमयू प्रशासन उन्हें मनाने में लगा है, लेकिन वह लौटने को तैयार नहीं हैं।
इन मरीजों की बढे़ंगी मुश्किलें : सप्ताह में दो दिन चलने वाली मेडिसिन इंडोक्राइनोलॉजी विभाग की हर ओपीडी में आठ सौ से एक हजार मरीज पहुंचते रहे हैं। यहां पूरे प्रदेश के मरीज होते हैं। नेपाल, मध्य प्रदेश के भी तमाम मरीज यहां आते रहे हैं। वहीं दूसरे विभागों के साथ ही क्वीनमेरी से भी महिलाओं को हार्मोनल डिजीज में परामर्श लेने के लिए डॉ. मित्तल के पास रेफर किया जाता है। डॉ. मित्तल के जाने के बाद इन मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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अब पीजीआई एक मात्र विकल्प
सिविल, लोहिया और बलरामपुर अस्पताल में मेडिकल इंडोक्राइनोलॉजी का कोई चिकित्सक नहीं है। लोहिया संस्थान में सिर्फ एक डॉक्टर हैं। ऐसे में मरीजों के पास एक मात्र विकल्प एसजीपीजीआई बचता है, लेकिन वहां एक दिन में सिर्फ 40 मरीज देखे जाते हैं।
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...इसलिए तो नहीं दिया इस्तीफा
मेडिकल इंडोक्राइनोलॉजी विभाग में दो सीनियर रेजीडेंट हैं। विभाग के पास 30 बेड हैं। हालांकि अभी तक इस विभाग को नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिल पाया है। इस वजह से यहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा था। डॉ. मित्तल लगातार इसके लिए प्रयास कर रहे थे। उनकी ओपीडी में आने वाले तमाम मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें भर्ती किया जाना जरूरी थी। व्यवस्थाएं न मिलना भी डॉ. मित्तल के इस्तीफे की एक वजह बताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में डॉ. मित्तल ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
निजी कारणों से दिया इस्तीफा
डॉ. मधुकर मित्तल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया है। केजीएमयू प्रशासन इस्तीफे पर विचार करेगा। फिर उसे कार्यपरिषद में रखा जाएगा। अभी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है।
-राजेश कुमार राय, कुलसचिव, केजीएमयू