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आयुष्मान में लिवर प्रत्यारोपण के लिए तैयार है केजीएमयू

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Tue, 15 Oct 2019 12:51 AM IST
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आयुष्मान योजना में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए तैयार केजीएमयू, सरकार को भेजा प्रस्ताव
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लिवर, किडनी प्रत्यारोपण कराने का इंतजार कर रहे आयुष्मान कार्ड धारकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
केजीएमयू प्रशासन इस योजना में लिवर प्रत्यारोपण के लिए तैयार हो गया है। उसने सरकार को प्रस्ताव भी भेज दिया है।
इसमें आयुष्मान में निर्धारित पांच लाख से अधिक होने वाले खर्चे के लिए दूसरे विकल्प सुझाए गए हैं।
केंद्र सरकार प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में 1394 बीमारियों के इलाज के पैकेज तय हैं।
गंभीर बीमारियों के लिए प्रदेश में एसजीपीजीआई, केजीएमयू, लोहिया संस्थान सहित 30 मेडिकल कॉलेज पंजीकृत हैं। हालांकि, सर्जरी व इलाज में अभी तक लिवर, किडनी प्रत्यारोपण को शामिल नहीं किया गया है।
महंगा इलाज : 10 लाख रुपये तक आता है खर्च
सर्जिकल गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा बताते हैं कि लिवर प्रत्यारोपण की सर्जरी पर करीब पांच लाख खर्च होते हैं। पर, कुल खर्च 10 लाख रुपये तक पड़ता है। सर्जरी के बाद मरीजों के ध्यान रखने में भी खर्च आता है। कुछ मरीजों में दो से पांच तो कई में 10 साल तक दवाओं की जरूरत पड़ती है।
गरीब नहीं करा पाते इलाज, हो जाती है मौत
केजीएमयू प्रशासन ने सरकार को लिवर प्रत्यारोपण को भी आयुष्मान में शामिल किए जाने को लेकर दिए प्रस्ताव में कहा है कि गरीब परिवार के लोग अपनी जेब से रुपये खर्च कर लिवर व किडनी प्रत्यारोपण नहीं करा पाते हैं, जिससे उनकी जल्दी मौत हो जाती है। अगर प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो इन मौतों में कमी आएगी।
...तो हर सप्ताह हो सकेगा लिवर प्रत्यारोपण
सर्जिकल गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी विभाग के डॉ. विवेक गुप्ता बताते हैं कि केजीएमयू में हर माह लिवर प्रत्यारोपण किया जा रहा है। लिवर प्रत्यारोपण को आयुष्मान में शामिल करने की हरी झंडी मिलती है और संसाधन बढ़ते हैं तो हम हर सप्ताह लिवर प्रत्यारोपण कर सकते हैं।
प्रस्ताव में दो प्रमुख विकल्प
कुछ खर्च आयुष्मान से तो कुछ असाध्य रोगियों के इलाज के मद से
डॉ. चंद्रा ने बताया कि प्रस्ताव में दो प्रमुख विकल्प रखे गए हैं। कैंसर सहित कई बीमारियों में असाध्य और बीपीएल के तहत मरीजों को दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकार इस खर्च के लिए संस्थान को अलग से बजट में प्रावधान भी करती है। इसमें लिवर प्रत्यारोपण को शामिल किया जा सकता है। कुछ खर्च आयुष्मान से तो कुछ असाध्य रोगियों (ऐसी गंभीर बीमारी वाले मरीज जिनकी आमदनी सालाना 30 हजार से कम हो) के इलाज के मद से कर दिया जाए।
पांच लाख तक खर्च आयुष्मान से, बाकी सरकार मदद दे
वहीं, दूसरा विकल्प है कि पांच लाख तक का खर्च आयुष्मान से किया जाए जबकि बाकी के लिए सरकार मदद दे। इस तरह से गरीबों के लिवर प्रत्यारोपण की राह आसान हो जाएगी।
आयुष्मान योजना एक नजर में
जन आरोग्य योजना में चयनित परिवारों के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त दिया जाता है। प्रदेश में योजना के लाभार्थी परिवारों की संख्या 1,18,07,068हैं। मुख्यमंत्री जन अरोग्य के लाभार्थी परिवारों की संख्या 8.50 लाख है। लखनऊ के लाभार्थी परिवारों की संख्या 2,79,930 और मुख्यमंत्री जन आरोग्य में 4108 परिवार पंजीकृत हैं।
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