यूपी के मुख्यमंत्री पद की रेस में मनोज सिन्हा व केशव सबसे आगे
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यूपी का मुख्यमंत्री चुनने के लिए 18 मार्च को भाजपा विधायकों की बैठक राजधानी में होगी। सूत्रों के मुताबिक अब इस रेस में सबसे आगे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के नाम सबसे आगे हैं। अभी तक इस पद के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह का नाम चर्चा में था।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सीएम पद के चेहरे पर से अभी तक परदा भले ही न उठाया हो, लेकिन माना जा रहा है कि इस संबंध में फैसला हो चुका है। 18 मार्च को पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाने के फैसले से भी इसको बल मिल रहा है।
अगर बैठक तक पार्टी ने नए सीएम के नाम की घोषणा नहीं की तो विधायकों के सामने ही उनके भावी नेता और सूबे के मुख्यमंत्री के नाम को उजागर कर दिया जाएगा। यह बैठक विधानभवन के तिलक हाल या इंदिरा प्रतिष्ठान में हो सकती है। बैठक में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव बतौर पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे।
संघ के नेताओं से भी होगा विचार-विमर्श
कोयंबटूर में संघ की बैठक शुक्रवार से होगी। तीन दिन की बैठक में यूपी की सीएम पर भी चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम फैसले से पहले भाजपा नेतृत्व संघ के नेताओं से विचार विमर्श करेगा।
कयास इस तरह के भी
पार्टी की तरफ से अभी तक मुख्यमंत्री पद के लिए किसी के नाम की औपचारिक घोषणा न होने के कारण कयासों का दौर जारी है। इनमें मौर्य और सिन्हा के अलावा सांसद महंत आदित्यनाथ, लखनऊ के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा के नाम की अटकलें हैं।
कुछ लोग ऐसे भी कयास लगा रहे हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के फॉर्मूले पर चलते हुए पार्टी किसी अचर्चित चेहरे को आगे लाकर मुख्यमंत्री बना सकती है। जिस पर किसी तरह की लॉबी या गुट का ठप्पा न हो।
इस फार्मूले में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल, पार्टी विधानमंडल दल नेता सुरेश खन्ना, पार्टी के प्रदेश महामंत्री स्वतंत्रदेव सिंह सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्यार्थी परिषद जुड़े रहे कुछ अन्य चेहरे हैं।
इसलिए केशव व मनोज सिंहा के नाम सबसे आगे
मनोज सिन्हा
पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करने वाले मनोज सिन्हा का नाम सीएम की रेस में सबसे आगे चल रहा है। 57 वर्षीय सिन्हा संघ से जुड़े रहे हैं। केंद्रीय मंत्री के रूप में अनुभव उनके पक्ष में जाता दिख रहा है।
केशव प्रसाद मौर्य
47 वर्षीय केशव संघ से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। वे पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते हैं। इसी समीकरण के चलते चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। यूपी में पिछड़ा वर्ग की आबादी 54 फीसदी है।